ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयानों पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने वेशभूषा, भारतीय परंपरा, संविधान और मनुस्मृति के मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए कहा कि भारत में राजनीति करने के लिए नेताओं को यहां की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक बारीकियों को गहराई से समझना होगा. विस्तार से जानिए पूरी कहानी.
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'जैसा देश, वैसा वेश'- राहुल गांधी को दी नसीहत
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भारतीय परंपरा और पहनावे पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत का एक सामान्य नियम है-'जैसा देश, वैसा वेश'. जब हम रक्षाबंधन जैसे भारतीय संस्कृति और हिंदू परंपरा से जुड़े पर्व मनाते हैं, तो हमारा वेश भी उसी परंपरा के अनुरूप होना चाहिए. अगर कोई भारतीय संस्कृति का त्योहार मनाते हुए विदेशी शैली के वस्त्र पहनेगा, तो लोग उस पर प्रतिक्रिया जरूर देंगे. उन्होंने यह भी कहा कि इसमें स्त्री स्वतंत्रता या पितृसत्तात्मक समाज को चुनौती देने जैसी बातें खींच लाना उचित नहीं है, क्योंकि भारतीय संस्कृति में माता और पिता दोनों को समान और एक ही माना गया है. यह बात राहुल गांधी को समझनी चाहिए.
ओवैसी और आरएसएस पर करारा हमला
असदुद्दीन ओवैसी द्वारा आरएसएस और भाजपा पर मनुस्मृति को लेकर किए गए हमले पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने साफ कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) कोई धार्मिक संस्था नहीं, बल्कि एक सामाजिक संस्था है और वह खुद भी यही दावा करती है. संघ द्वारा दिए गए किसी बयान से संपूर्ण हिंदू समाज का कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा कि संघ की बातों को हिंदू धर्म से जोड़ना और उस पर राजनीति करना ओवैसी की समझ की कमी को दर्शाता है.
संविधान और मनुस्मृति का संबंध
संविधान और मनुस्मृति पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि भारत के संविधान ने कभी भी मनुस्मृति का खंडन या उसे अवैध घोषित नहीं किया है. संविधान का अनुच्छेद 25 से 28 देश के नागरिकों को अपने-अपने धर्म ग्रंथों के अनुसार जीवन जीने और धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है. समाज में आज भी पारिवारिक परंपराएं और रीति-रिवाज धर्म ग्रंथों की मान्यताओं के अनुसार ही चल रहे हैं.
संविधान और परलोक की चर्चा
उन्होंने आगे कहा कि केवल संविधान के सहारे पूरा जीवन नहीं चलाया जा सकता, क्योंकि संविधान केवल सामने दिखने वाली व्यवस्था की बात करता है, जबकि हिंदू, मुस्लिम और ईसाई सभी धर्म परलोक को मानते हैं. संविधान में परलोक सुधारने को लेकर कोई व्यवस्था नहीं है, इसलिए जीवन में धर्म ग्रंथों का पालन जरूरी है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी और ओवैसी दोनों ही भ्रम के शिकार हैं और बिना सोचे-समझे बयानबाजी कर रहे हैं.
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