भारत सरकार ने टेलीग्राम को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है. NTA(National Testing Agency) और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Re-NEET एग्जाम को देखते हुए इसे 22 जून तक भारत में रोक लगा दिया है, वहीं 30 जून तक टेलीग्राम पर पहले से बैडकेट एडिटिंग की सुविधा भी बंद रहेगी. ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि आखिर क्यों टेलीग्राम पर ही यह एक्शन लिया गया है? क्या है बैकडेट एडिटिंग का फीचर और कैसे यह पेपर लीक से जुड़ा हुआ है? विस्तार से जानिए सारे सवालों के जवाब.
ADVERTISEMENT
टेलीग्राम पर ही क्यों लगा बैन?
टेलीग्राम पर अस्थायी बैन लगने के बाद लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर टेलीग्राम ही क्यों, व्हाट्सएप और दूसरे एप्स पर यह एक्शन क्यों नहीं लिया गया? तो दरअसल जब भी पेपर लीक या ऐसे गंभीर मुद्दे उठते है तो टेलीग्राम पर आरोप लगते हैं. बहुत से स्कैमर्स टेलीग्राम पर ही अकाउंट बनाकर लोगों को अपना शिकार बनाते है. ऐसा वे इसलिए कर पाते है क्योंकि टेलीग्राम के अंदर कुछ ऐसे फीचर्स है, जो उन्हें ऐसा करने का स्पेस देती है. साथ ही टेलीग्राम ऐसा ऐप है जहां अकाउंट बनाना काफी आसान है, लेकिन कुछ अकाउंट का पता करना उतना ही मुश्किल है.
बैकडेट एडिटिंग और पेपर लीक
सरकार ने 21 जून को NEET का री-एग्जाम कराने के बाद भी टेलीग्राम के एक फीचर 'बैकडेट एडिटिंग' को 30 जून तक बंद रहने की बात बताई है. बैकडेट एडिटिंग या मैसेज एडिट फीचर, टेलीग्राम के बेहतरीन फीचर्स में से एक है. इस फीचर के तहत कुछ लोग परीक्षा खत्म होने के बाद पुराने मैसेज में असली प्रश्नपत्र जोड़कर उसे पहले से लीक हुआ पेपर बताकर वायरल कर देते थे. इस फीचर की खास बात यह था कि मैसेज में बदलाव करने के बाद भी उसका मूल टाइमस्टैम्प नहीं बदलता था और इससे लगता था कि पेपर पहले ही लीक हो गया है. NTA ने भी दावा किया था कि इस फीचर का पेपर लीक के नाम पर मिसयूज हो रहा था.
टेलीग्राम के कुछ अन्य फीचर्स
ग्रुप की कैपिसिटी: टेलीग्राम के खास फीचर्स में एक फीचर वहां बनाए गए ग्रुप के कैपिसिटी की है. टेलीग्राम के एक ग्रुप में मैक्सिमम 2 लाख तक पार्टिसिपेंट(लोग) शामिल किया जा सकता है. ऐसे में कोई भी जालसाज एक बार में 2 लाख लोगों को शामिल कर एक साथ फायदा उठा सकता है.
सीक्रेट चैट फीचर: टेलीग्राम के अंदर एक और खास फीचर सीक्रेट चैट्स का है. इस फीचर में यूजर्स को एंड टू एंड एनक्रिप्शन की सुविधा मिल जाती है, जिसका मतलब है कि मैसेज सिर्फ सेंडर और रिसीवर को ही मिलेगा और बीच में उसे हैक करके कोई डिकोड नहीं कर सकता है.
ओपन Bot API: टेलीग्राम पर ओपन Bot API की भी सुविधा मिलती है. इस फीचर से साइबर स्कैमर्स, जालसाज या डेवलपर चंद मिनटों में ही बॉट तैयार कर सकता है. वे इसका इस्तेमाल फिशिंग लिंक भेजने के लिए, फेक कस्टमर सपोर्ट बनाने के लिए और अन्य दूसरी कॉन्फिडेंशियल चीजों को इकट्ठा करने के लिए करते है.
NEET परीक्षा से पहले सरकार का बड़ा एक्शन... एग्जाम वाले दिन Telegram पर लगाई रोक
ADVERTISEMENT


