दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशनल क्लब ऑफ इंडिया में 5 अगस्त को एमडीएमके (MDMK) प्रमुख वाइको की पुस्तक 'वाइको इन पार्लियामेंट' का विमोचन किया गया. इस खास कार्यक्रम में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और फारुख अब्दुल्लाह समेत कई प्रमुख दिग्गज सांसद पहुंचे. मंच पर वाइको द्वारा राहुल गांधी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया, जिसमें अखिलेश यादव भी शामिल थे. इस दौरान अखिलेश यादव ने मंच से अंग्रेजी में भाषण देकर सभी को चौंकाया और उनका यह अंदाज चर्चा का विषय बन गया.
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राहुल गांधी ने मोदी सरकार और RSS पर साधा निशाना
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और आरएसएस पर करारा हमला बोला. उन्होंने देश के वर्तमान हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि आज भारत एक अजीब दौर से गुजर रहा है, जहां छात्र सड़कों पर हैं और बेहद दर्द में हैं. वे परीक्षाओं में निष्पक्षता और एक बेहतर शिक्षा प्रणाली की मांग कर रहे हैं. दूसरी ओर देश के प्रधानमंत्री उन्हें माफ करने की बात कर रहे हैं. राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री को भारत के भविष्य को माफ करने का अधिकार किसने दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और आरएसएस की सोच के पीछे एक बेहद खतरनाक विचार छुपा हुआ है.
वाइको के व्यक्तित्व और विचारधारा की तारीफ
राहुल गांधी ने वाइको के लंबे राजनीतिक जीवन और उनके विचारों की निरंतरता की जमकर सराहना की. उन्होंने कहा कि किसी भी राजनेता को परखने के लिए निरंतरता सबसे महत्वपूर्ण पैमाना होती है और वाइको हमेशा अपनी विचारधारा को लेकर अडिग रहे हैं. 82 वर्ष की उम्र में भी वाइको सवाल पूछने से पीछे नहीं हटते हैं, जो उन्हें ऊर्जावान बनाए रखता है. राहुल गांधी ने उन्हें अपना एक बेहद भरोसेमंद और पुराना दोस्त बताया और कहा कि दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से गहरा व्यक्तिगत व राजनीतिक संबंध रहा है.
कौन हैं 'संसद के शेर' कहे जाने वाले वाइको?
एमडीएमके प्रमुख वाइको का पूरा नाम व्यायाप पूरी गोपालास्वामी नायाकर है. संसद में अपने जोशीले और दमदार भाषणों के कारण उन्हें 'लायन ऑफ पार्लियामेंट' यानी संसद का शेर भी कहा जाता है. पेशे से वकील वाइको छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे हैं और उन्होंने तमिलनाडु में हिंदी विरोधी आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में तमिलनाडु से जुड़े कई अहम मुद्दों को सदन में उठाया है. अब तक वे 50 से अधिक किताबें भी लिख चुके हैं.
राजनीतिक सफर और उतार-चढ़ाव
वाइको ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत डीएमके से की थी और 1978 में पहली बार राज्यसभा पहुंचे. वे 1978 से 1996 तक लगातार तीन बार राज्यसभा सांसद रहे. पूर्व डीएमके प्रमुख एम. करुणानिधि के करीबी माने जाने वाले वाइको ने 90 के दशक में पार्टी के भीतर वंशवादी राजनीति और स्टालिन को आगे बढ़ाए जाने का विरोध किया, जिसके बाद 1993 में उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया.
इसके बाद उन्होंने 1994 में एमडीएमके (MDMK) की स्थापना की. वे शिवकाशी सीट से दो बार (1998 और 1999) लोकसभा सांसद बने. साल 2004 के चुनाव में उन्होंने बिना किसी ब्रेक के 55 दिनों तक तमिलनाडु की यात्रा की थी. इसके बाद भी उन्होंने चुनाव लड़ा और साल 2019 में डीएमके के समर्थन से पुनः राज्यसभा पहुंचे. 2026 में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक समीकरण बदले और उन्होंने 9 साल पुराना नाता तोड़कर टीवीके का समर्थन किया.
विवाद, गिरफ्तारी और जेल यात्रा
वाइको का राजनीतिक सफर कई विवादों और कानूनी कार्रवाइयों से भी घिरा रहा. साल 2002 में जयललिता सरकार के दौरान लिट्टे (LTTE) के समर्थन में भाषण देने के कारण उन पर पोटा (POTA) के तहत कार्रवाई हुई, जिसके बाद वे 18 महीने तक वेल्लोर जेल में बंद रहे. इसके अलावा साल 2008 और 2009 में श्रीलंका सरकार के खिलाफ और लिट्टे के समर्थन में दिए गए बयानों को लेकर तमिलनाडु सरकार ने उन पर देशद्रोह का मामला दर्ज किया था. साल 2019 में इस मामले में उन्हें एक साल की सजा भी सुनाई गई, हालांकि बाद में मद्रास हाईकोर्ट ने सजा को निलंबित कर दिया और वे न्यायिक हिरासत के 14 दिनों बाद रिहा हो गए.
परिवार और राहुल गांधी से पारिवारिक संबंध
22 मई 1944 को तमिलनाडु के कलिंगपट्टी में जन्मे वाइको का विवाह 14 जून 1971 को रेणुका देवी से हुआ था. उनके तीन बच्चे हैं, एक बेटा दुरई वाइको और दो बेटियां राजलक्ष्मी व कन्नगी. उनके बेटे दुरई वाइको (दुरई वयापुरी) वर्तमान में एमडीएमके के मुख्य सचिव हैं और तिरुचिरापल्ली (त्रिची) से लोकसभा सांसद हैं. अतीत में श्रीलंकाई तमिलों के मुद्दे पर कांग्रेस और वाइको के बीच मतभेद रहे थे, लेकिन हाल के वर्षों में राहुल गांधी और वाइको के बीच नजदीकियां और सम्मान काफी बढ़ा है. राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान दुरई वाइको ने हैदराबाद में उनके साथ लंबी पदयात्रा भी की थी, जो दोनों परिवारों के बीच के मजबूत संबंधों को दर्शाती है.
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