बंगाल में 'योगी मॉडल' की तैयारी, दंगे किए या सरकारी संपत्ति तोड़ी तो सीधे नीलाम होगी प्रॉपर्टी, जानें इस बिल के बारे में सबकुछ

पश्चिम बंगाल की शुभेंदु सरकार राज्य में दंगों और असामाजिक गतिविधियों को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश और गुजरात की तर्ज पर एक बेहद सख्त कानून ला रही है.

बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी
बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी

इंद्रजीत कुंडू

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पश्चिम बंगाल की शुभेंदु सरकार राज्य की कानून-व्यवस्था को पूरी तरह से बदलने के मूड में नजर आ रही है. प्रदेश में तोड़फोड़, आगजनी, दंगे और असामाजिक हरकतों पर पूरी तरह लगाम कसने के लिए सरकार एक बेहद सख्त कानूनी चाबुक तैयार कर चुकी है. सूत्रों के मुताबिक, आज विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) के साथ-साथ दो ऐसे बड़े और कड़े विधेयक पेश किए जा सकते हैं जो अपराधियों की रीढ़ तोड़कर रख देंगे.

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इस नए कानून के तहत अगर किसी ने भी दंगे या प्रदर्शन के नाम पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, तो उसकी संपत्ति कुर्क कर सीधे नीलाम कर दी जाएगी.

दो नए विधेयकों से कसेगा शिकंजा

सरकार का मानना है कि मौजूदा कानून अपराधियों और साजिशकर्ताओं के हौसले पस्त करने के लिए काफी नहीं हैं. इसीलिए उत्तर प्रदेश और गुजरात की तर्ज पर बंगाल में भी अपराधियों से निपटने का नया फॉर्मूला तैयार किया गया है. इसके लिए दो अहम कदम उठाए जा रहे हैं:

पुराने कानून में बदलाव: पहला बिल 'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने का कानून, 1972' (West Bengal Maintenance of Public Order Act 1972) में संशोधन के लिए है, जो मुख्य रूप से दंगे और तोड़फोड़ करने वालों पर लगाम लगाएगा.

नया एंटी-सोशल बिल: दूसरा विधेयक पूरी तरह नया है, जिसे 'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण कानून, 2026' कहा जा रहा है. यह सीधे तौर पर उन लोगों को टारगेट करेगा जो आम नागरिकों की जान-माल के लिए खतरा बने हुए हैं.

असामाजिक तत्व और गुंडा की नई परिभाषा

इस नए कानून के दायरे को काफी बड़ा और सख्त रखा गया है. इसके तहत सिर्फ दंगाई ही नहीं बल्कि कई अन्य तरह के अपराधी भी नपेंगे.

क्या आएगी असामाजिक गतिविधि के दायरे में?

जनता के बीच खौफ पैदा करना, सरकारी या सार्वजनिक व्यवस्था को ठप करना, किसी की जमीन या संपत्ति पर अवैध कब्जा जमाना, इसके अलावा अवैध माइनिंग (खनन) और वन्यजीवों की तस्करी को भी इसी कैटेगरी में रखा गया है. इसके साथ ही, जो लोग किसी आपराधिक गैंग के लीडर हैं या उसके सदस्य बनकर आदतन ऐसी वारदातों को अंजाम देते हैं, उन्हें कानूनी तौर पर 'गुंडा' माना जाएगा. इस लिस्ट में उन लोगों को भी शामिल किया जाएगा जिन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023, आर्म्स एक्ट, ड्रग्स तस्करी या विस्फोटक कानून के तहत चार्जशीट दाखिल हो चुकी है.

गैर-जमानती होगा अपराध

नए कानून के लागू होते ही प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ में असीमित पावर आ जाएगी. अफसरों के पास यह कानूनी अधिकार होगा कि वे उपद्रवियों और दंगाइयों की पहचान कर सीधे उनकी संपत्ति को कुर्क कर सकें और बाद में उसकी नीलामी कर नुकसान की भरपाई करें.

सबसे बड़ी बात ये है कि इस कानून के तहत आने वाले सभी अपराध गैर-जमानती होंगे. यानी कानून तोड़ने वालों या सरकारी आदेश की धज्जियां उड़ाने वालों को न तो आसानी से राहत मिलेगी और न ही जमानत. सरकार के इस कदम से साफ है कि आने वाले दिनों में बंगाल में कानून तोड़ने वालों की खैर नहीं होने वाली है.

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