16 मार्च को राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव के लिए करीब 40 उम्मीदवार मैदान हैं. चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक नामांकन करते समय सबको अपनी संपत्ति की डिटेल देनी पड़ती है. तेलंगाना से कांग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी ने संपत्ति का ऐसा एफिडेविट दिया कि सबकी आंखें खुली रह गई. वकालत के मूल पेशे से राजनीति में अभिषेक मनु सिंघवी की 2800 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति की खबर से तहलका मचा है.
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राजनीति में जब-जब विपक्ष की सांसें अटकती हैं, जब-जब जेल की सलाखें विपक्ष के नेताओं को पुकारती हैं तब एक काला कोट वाला व्यक्ति कोर्ट रूम में एंट्री मारता है और देखते-देखते बाजी पलट देता है. कहानी है कांग्रेस, गांधी परिवार और विपक्ष के सबसे बड़े संकटमोचक और देश के दिग्गज वकील डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी की. इस समय अभिषेक मनु सिंघवी अकेले एक नेता हैं जो मेंबर तो कांग्रेस पार्टी के हैं लेकिन उन्हें संसद भेजने के लिए सब में होड़ मची रहती है. केजरीवाल ने भी कर्ज चुकाने के लिए राज्यसभा भेजने की कोशिश की थी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया. 2024 में एक वोट से हिमाचल से राज्यसभा चुनाव हारने के बाद भी कांग्रेस ने सिंघवी को पार्ट टाइम के लिए तेलंगाना से राज्यसभा भेजा. अब पूरे 6 साल के लिए फिर से तेलंगाना से उम्मीदवार बनाया है.
कई पार्टियों के लिए सुरक्षा कवच बन चुके हैं सिंघवी
जब राहुल गांधी की संसद सदस्यता चली गई, जब सीएम रहते अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी हो गई, जब हेमंत सोरेन के लिए सीएम बने रहना मुश्किल हो गया तब विपक्ष के लिए संकटकाल का इकलौता इलाज बने अभिषेक मनु सिंघवी. आम आदमी पार्टी से लेकर तृणमूल कांग्रेस तक, और जेएमएम से लेकर डीएमके तक- नेताओं के लिए वो सिर्फ एक वकील नहीं, एक 'सुरक्षा कवच' हैं. 2800 करोड़ की संपत्ति वाले इस वकील का सबसे बड़ा एसेट पैसा नहीं, बल्कि वो भरोसा है जिसने कटिंग एक्रॉस पार्टी लाइन सिंघवी का फैन बनाया हुआ है.
2800 करोड़ की दौलत कहां से आई?
सिंघवी की फीस करोड़ों में है, लेकिन विपक्षी नेताओं के लिए वो इन्वेस्टमेंट हैं. यही वजह है कि आज वो सिर्फ एक पार्टी के नहीं, बल्कि पूरे 'इंडिया गठबंधन' के अघोषित कानूनी चाणक्य बन चुके हैं. सिंघवी की काबिलियत का अगर किसी को नसीब नहीं तो वो है बीजेपी और मोदी सरकार.
सिंघवी की दलीलों के कायल लोग 2800 करोड़ की दौलत के बारे में सुनकर दंग हैं, लेकिन हकीकत यही है- सिंघवी ने ये साम्राज्य सिर्फ वकालत से नहीं, बल्कि उस भरोसे' से बनाया है जिसने उन्हें विपक्ष का सबसे बड़ा 'सुपरस्टार' बना दिया."
इन 5 केस ने सिंघवी को बनाया हिरो
ज्यादा नहीं तो बस 5 केस ही लीजिए जिन्होंने सिंघवी को विपक्ष का सुपरहीरो बना दिया. राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता जा चुकी थी, सरकारी बंगला छिन गया था और चुनाव लड़ने पर तलवार लटकी थी. तब सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में ऐसी दलीलें दीं कि सजा पर रोक (Stay) लग गई. राहुल की सांसदी बहाल हुई और वो संसद में दहाड़ते हुए वापस लौटे. विपक्ष के लिए ये सिंघवी का सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक था.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जेल में थे, सरकार संकट में थी. सिंघवी ने पीएमएलए (PMLA) जैसे कड़े कानून के बावजूद केजरीवाल को जमानत दिलाकर जेल से बाहर करा लिया. झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन को पद से इस्तीफा देकर जेल जाना पड़ा.
हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सिंघवी ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़कर सोरेन को उनकी सत्ता वापस दिला दी. ममता बनर्जी के भतीजे और TMC के नंबर 2 नेता अभिषेक बनर्जी के लिए भी सिंघवी ढाल बने. गिरफ्तारी से राहत दिलाई, जिससे वो ममता के भी सबसे भरोसेमंद वकील बन गए. शिवसेना दो फाड़ हो गई थी और उद्धव की कुर्सी खतरे में थी. उन्होंने आधी रात को भी सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खटखटाया. सरकार तो नहीं बची, लेकिन सिंघवी की कानूनी दलीलों ने शिंदे सरकार की वैधानिकता' पर जो सवाल उठाए, उससे वो उद्धव के चहेते बन गए.
कोर्ट में दिग्गज वकील फिर भी राजनीति में क्यों?
अक्सर लोग पूछते हैं कि जो शख्स कोर्ट में एक पेशी के लाखों-करोड़ों लेता है, वो राजनीति की ऊबड़-खाबड़ सड़कों पर क्यों उतरा? अभिषेक मनु सिंघवी का राजनीति में आना कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति और 'पावर' के केंद्र तक पहुंचने की प्यास थी. 34 वर्ष की आयु में सबसे यंग सीनियर एडवोकेट और 37 साल में देश के सबसे युवा एडिशनल सॉलिसिटर जनरल बने. Criminal matter, constitutional law, administrative law, corporate law or commercial law-सिंघवी सबके चैम्पियन हैं. अभिषेक मनु सिंघवी के पिता लक्ष्मीमल सिंघवी देश के जाने-माने कानूनविद और बीजेपी के राज्यसभा सांसद थे. ब्रिटेन में भारत के हाई कमिश्नर रहे और उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था. पिता के बीजेपी में होने के बावजूद, सिंघवी ने कांग्रेस का हाथ थामा.
कहा जाता है कि माधवराव सिंधिया ने इनकी लॉन्चिंग कराई और सोनिया गांधी तक पहुंचाया. आज उनकी संकटमोचक की पहचान है और गांधी परिवार के कवच की भी. सिंघवी का कद राजनीति में उनके भाषणों से ज्यादा उनकी कानूनी ढाल की वजह से बढ़ा. कांग्रेस में वकीलों की कमी नहीं. एक से बढ़कर दिग्गज पार्टी में अच्छी पोजिशन पर रहे, लेकिन जितनी धाक सिंघवी ने जमाई, वो कोई और नहीं कर पाया.
सफर में विवाद भी
कहते हैं शिखर पर पहुंचने वाला रास्ता कभी सीधा नहीं होता. अभिषेक मनु सिंघवी का सफर भी विवादों, आरोपों और फिर जबरदस्त वापसी की एक ऐसी दास्तां है जिसे सुनकर कोई भी दंग हो जाए. आखिर कैसे एक शख्स विवादों में घिरने के बाद और भी ताकतवर होकर उभरा?
सबको बचाने वाले सिंघवी खुद एक विवाद में फंसे जिसने उनकी दुनिया हिला दी, लेकिन वो लड़ाई उन्हें खुद लड़नी पड़ी. 2012 में एक कथित सीडी सामने आई, जिसने सिंघवी के राजनीतिक और कानूनी करियर पर सवालिया निशान लगा दिए. नैतिकता के आधार पर उन्होंने कांग्रेस प्रवक्ता और संसदीय समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी, कानूनी लड़ाई लड़ी और बाउंस बैक किया. इनकम टैक्स ने टैक्स चोरी का आरोप लगाया. सिंघवी ने दावा किया कि दीमकों ने उनके ऑफिस के दस्तावेज और वाउचर खा लिए. इस दलील पर काफी मीम्स बने और चर्चा हुई. अंततः उन्हें सेटलमेंट के तहत करोड़ों रुपये चुकाने पड़े.
विवाद आए, सीडी कांड हुआ, टैक्स के आरोप लगे, लेकिन सिंघवी ने हर बार बाउंस बैक किया. आज वो राजनीति के वो खिलाड़ी हैं जिन्हें सरकारें भले ही पसंद न करें, लेकिन नजरअंदाज करना नामुमकिन है.. अक्सर लोग विवादों में खत्म हो जाते हैं, लेकिन सिंघवी 'फीनिक्स' की तरह राख से उठे. उन्होंने खुद को विवादों से दूर कर पूरा ध्यान देश के सबसे बड़े मुकदमों पर लगा दिया. आज आलम ये है कि विपक्ष का कोई भी नेता फंसता है, तो उसे सिर्फ सिंघवी की याद आती है.
कितनी है दिग्गज वकील सिंघवी की फीस?
आखिर क्या है इतने बड़े वकील का प्राइस टैग. दावा किया जाता है कि अभिषेक मनु सिंघवी एक बार कोर्ट में One Appearance के लिए 10 लाख से 25 लाख रुपए तक चार्ज करते है. कितना सच, कितना फसाना, ये खुद सिंघवी बता सकते हैं. ये तो उन्होंने ही लिखकर दिया है कि पांच साल उन्होंने 1,516 करोड़ से ज़्यादा कमाए. पिछले एक साल में उन्होंने 374 करोड़ कमा लिए. हलफनामे में एक दिलचस्प बात यह भी सामने आई कि सिंघवी ने घर और दफ्तर में इस्तेमाल होने वाले एक कंप्यूटर की मौजूदा कीमत 163 रुपये बताई है, जो 2024 के हलफनामे में 454 रुपये थी.
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