महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और एनसीपी नेता अजित पवार ने हाल ही में पार्टी की एकजुटता, गठबंधन और प्रदेश की सियासत को लेकर खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब भी दोनों एनसीपी के साथ आने की चर्चा शुरू होती है, मीडिया खुद ही नए-नए मुद्दे निकालने लगता है, जबकि हकीकत यह है कि इस विषय पर अभी तक कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है.
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अजित पवार ने बताया कि पुणे के कई पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि अगर दोनों एनसीपी एक साथ आ जाएं तो वोटों का बंटवारा नहीं होगा और राजनीतिक फायदा मिलेगा. इसी सोच के तहत उन्होंने सुप्रिया सुले और शशिकांत शिंदे से फोन पर बात की थी. उनके मुताबिक दोनों नेताओं की ओर से बातचीत को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी.
अब हालात बदल गए
उन्होंने यह भी कहा कि एनसीपी (एसपी) यानी शरद पवार की पार्टी के कुछ विधायक और सांसद उनसे मिलने आते रहते हैं. उनका कहना होता है कि अब दोनों गुटों को साथ आ जाना चाहिए, क्योंकि उन्हें फंड्स मिलने में दिक्कत हो रही है. अजित पवार ने माना कि पहले विपक्ष में रहते हुए भी काम हो जाया करते थे लेकिन अब हालात बदल गए हैं. लगातार कई साल विपक्ष में बैठने के बाद नेता और कार्यकर्ता दोनों परेशान हो जाते हैं.
हालांकि उन्होंने फिर दोहराया कि दोनों एनसीपी के एक होने को लेकर अभी कोई अंतिम या ठोस फैसला नहीं हुआ है. उन्होंने बताया कि राज्य के 29 नगर निगमों में हर जगह अलग-अलग राजनीतिक समीकरण हैं. कहीं कोई पार्टी AIMIM के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है, तो कहीं किसी और दल के साथ गठबंधन नजर आ रहा है.
लगाए जा रहे भ्रष्टाचार के आरोपों
बीजेपी नेताओं की ओर से लगाए जा रहे भ्रष्टाचार के आरोपों पर अजित पवार ने कहा कि उन्होंने अपने नाम से जुड़ी चर्चाएं भी सुनी हैं, लेकिन इस मामले पर वे पार्टी के राज्य और केंद्रीय नेतृत्व से बात कर चुके हैं. इसलिए वे दूसरे नेताओं की बयानबाजी को ज्यादा गंभीरता से नहीं लेते.
एनसीपी मंत्रियों के इस्तीफों पर भी उन्होंने स्थिति साफ की. उन्होंने बताया कि माणिकराव कोकाटे ने इसलिए इस्तीफा दिया क्योंकि मामला कोर्ट में चल रहा है. वहीं धनंजय मुंडे के मामले में मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन अभी रिपोर्ट सामने नहीं आई है.
राज्य की राजनीति पर बात करते हुए अजित पवार ने कहा कि 1999 से अब तक महाराष्ट्र में कई तरह की सरकारें और गठबंधन बनते-बिगड़ते रहे हैं. घोषणापत्र को लेकर उन्होंने बताया कि जून 2026 तक की समयसीमा तय की गई है और एक-एक वादा पूरा किया जाएगा. उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी योजना को बंद करने का कोई इरादा नहीं है और फिलहाल चुनाव गठबंधन के साथ ही लड़ने की तैयारी है.
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