क्यों कभी कंफर्टेबल नहीं रहे राहुल गांधी और अजित पवार? 'दादा' के निधन पर दिखाया बड़ा दिल

अजित पवार के विमान हादसे में निधन के बाद राहुल गांधी ने परिवार से बात कर शोक जताया. दोनों नेता कई बार एक ही गठबंधन में रहे, लेकिन निजी तौर पर करीब नहीं आए. राजनीतिक मतभेदों के बावजूद राहुल का यह कदम इंसानियत की मिसाल माना जा रहा है.

ajit pawar rahul gandhi
ajit pawar rahul gandhi

रूपक प्रियदर्शी

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राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन मानवीय संवेदनाएं अपनी जगह. जब प्लेन क्रैश में अजित पवार का निधन हुआ तो  सबसे पहले शोक व्यक्त करने वालों में राहुल गांधी शामिल हुए. राहुल गांधी ने अजित पवार के जाने को अपूरणीय क्षति बताया.

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राहुल गांधी की ये संवेदनाएं ये दिखाती हैं कि राजनीतिक मतभेदों के बाद भी उन्हें निजी सम्मान बनाए रखा. राहुल गांधी ने अजित पवार के परिवार से बात करके शोक जताया. प्रियंका गांधी ने सुप्रिया सुले और अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा से फोन पर बात की. 

भारतीय राजनीति में रिश्ते विचारधारा से नहीं, वक्त की रफ़्तार से तय होते हैं. महाराष्ट्र की सियासत के 'पावर हाउस' अजित पवार और कांग्रेस के चेहरा राहुल गांधी के बीच का रिश्ता भी कुछ ऐसा ही रहा-जो कभी गठबंधन की मजबूरी से बंधा था, तो कभी तीखे हमलों से लथपथ. दोनों ने एक-दूसरे की पार्टियों के साथ अलायंस किया. सरकारें चलाईं लेकिन कभी अजित पवार और राहुल गांधी या अजित पवार और गांधी परिवार एक दूसरे से कंफर्टेबल नहीं रहे. जबकि राहुल की  शरद पवार, सुप्रिया सुले से बहुत बढ़िया केमेस्ट्री रही.

एक समय था जब अजित पवार की NCP और राहुल गांधी की कांग्रेस महाराष्ट्र में एक ही नाव के सवार थे. 2004 से 2014 के बीच, जब महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी की सरकार थी, तब दिल्ली में राहुल गांधी का उदय हो रहा था और मुंबई में अजित दादा अपनी पकड़ मजबूत कर रहे थे. राजनीति में कहीं ज्यादा सीनियर होने के बाद भी उस दौर में अजित पवार का कद राहुल गांधी से नीचे रहा. सियासी चर्चाएं रहीं कि अजित दादा को कभी कांग्रेस हाईकमान की मुंबई में दखल रास नहीं आई. कभी कांग्रेस को,  राहुल गांधी, सोनिया गांधी को दिल से पसंद नहीं किया. 

अजित पवार ने सोनिया गांधी को लेकर हमेशा एक नपे-तुले लेकिन समय के साथ बदलते हुए राजनीतिक लाइन ले रखी. वो कभी भूले नहीं कि उनकी पारिवारिक पार्टी एनसीपी सोनिया गांधी के विदेशी मूल के विरोध से ही निकली. अजित पवार ये याद दिलाते रहे कि NCP का जन्म ही सोनिया गांधी के विदेशी मूल के विरोध में हुआ था. जब चाचा शरद पवार के खिलाफ बोलने लगे तब उन्होंने कहा था कि अगर विदेशी मूल का मुद्दा इतना बड़ा था, तो पार्टी बनाने के केवल 6 महीने के भीतर ही हमने उसी सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस के साथ गठबंधन क्यों किया? चाचा शरद पवार से मतभेद का पहला मुद्दा यही था कि उन्होंने कांग्रेस से अलायंस क्यों किया. फिर भी उन्होंने चाचा के लिहाज में अलायंस के धर्म का पालन किया. कभी भी सोनिया गांधी के 'विदेशी मूल' के मुद्दे को आक्रामक तरीके से नहीं उठाया. 

अजित पवार ने कभी राहुल गांधी के खिलाफ उस तरह से कभी बयानबाजी या मजाक नहीं उड़ाया जैसा बीजेपी करती रही. हमेशा ये माना कि राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी की तुलना संभव नहीं है. उन्होंने कई बार मोदी की कार्यशैली को राहुल के मुकाबले काफी आगे बताया. सोनिया गांधी की राजनीति को "पुरानी पीढ़ी" का हिस्सा बताते हुए कहा कि अब देश में नरेंद्र मोदी का कोई विकल्प नहीं है. 

जब 2019 में उद्धव ठाकरे के साथ मिलकर महाविकास अघाड़ी (MVA) बनी, तब राहुल गांधी और अजित पवार एक बार फिर एक ही पाले में खड़े दिखे. तब भी राहुल और अजित पवार कभी एक फ्रेम में नहीं दिखे. राहुल के लिए एनसीपी का मतलब शरद पवार ही थे. शरद पवार के बाद अगर कोई था तो उनकी बेटी सुप्रिया सुले. इंटरनेट पर नहीं के बराबर फोटो है जिसमें राहुल गांधी और अजित पवार एक फ्रेम में दिखे हों. 

असली मोड़ तब आया जब अजित पवार ने NCP से बगावत कर NDA का दामन थाम लिया. इसके बाद राहुल गांधी के सुर अजित पवार के लिए बदल गए. राहुल गांधी चुनावी रैलियों में अजित पवार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर तीखा प्रहार करने लगे. जब अजित पवार के बेटे पार्थ पवार की कंपनी पर 1800 करोड़ की जमीन 300 करोड़ में बेचे जाने के आरोप लगे तो तब भी राहुल गांधी ने अजित पवार पर निशाना साधा था. अजित पवार ने राहुल गांधी के वोट चोरी वाले आरोपों पर इतना ही कहा कि चुनाव हारने के बाद इस तरह के संदेश देना गलत है और राजनीति में जिम्मेदारी जरूरी है.

अजित पवार और राहुल गांधी के बीच वन टू वन मुलाकातों का कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता लेकिन अलायंस के दिनों में मुलाकातें होती रहीं.  

2023 में NCP से अलग होकर NDA में शामिल होने से पहले, वो और राहुल गांधी महाविकास अघाड़ी (MVA) के हिस्से के रूप में कई बार मिले थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जून 2023 में जब पटना में विपक्षी एकता बैठक हुई तब अजित पवार ने शरद पवार को सुनाया कि उन्होंने राहुल गांधी के साथ मंच शेयर किया. पटना बैठक के महज 9 दिन बाद, 2 जुलाई 2023 को अजित पवार ने NCP में बगावत कर दी और महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना (शिंदे गुट) गठबंधन सरकार में शामिल होकर डिप्टी सीएम की शपथ ली.

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