Akhilesh Yadav Naveen Patnaik Meeting: नवीन पटनायक जब अपनी राजनीति में पीक पर थे तब भी कभी विपक्ष के मंच पर खड़े नहीं हुए. बीजेपी से दोस्ती बनती-बिगड़ती रही. जब बीजेपी से दोस्ती टूटी तब भी उन्होंने विपक्ष से दूरी बनाकर रखी. किसी न किसी दिन नवीन बाबू विपक्ष के साथ आ जाएंगे, शायद इसीलिए विपक्ष के नेता नवीन पटनायक को लेकर सॉफ्ट स्टैंड लिए रहे. जब जिसका जी चाहा, ओडिशा जाकर मिल लीजिए. विपक्ष के नेता जब भी भुवनेश्वर आकर मिलना चाहे, दरवाजे पर आकर नवीन पटनायक का स्वागत किया.
नवीन पटनायक आज अलग तरह की चुनौतियों से घिरे हैं. 2024 के विधानसभा और लोकसभा चुनावों के बाद बीजेडी में हड़कंप मचा है. नेता टूट रहे हैं, संगठन बिखर रहा है. उनकी सेहत खराब है लेकिन पार्टी चलाने के लिए कोई आदमी तैयार नहीं है. एक बार फिर बीजेपी से दूरियां बनी हैं लेकिन नवीन पटनायक विपक्ष के करीब नहीं हुए.
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नवीन पटनायक के घर पहुंचे अखिलेश यादव
इस बीच अचानक लखनऊ से अखिलेश यादव भुवनेश्वर में नवीन बाबू के घर दिखाई दिए. नवीन पटनायक ने बाहर आकर अखिलेश यादव का स्वागत किया. दोनों में कॉमन ये है कि दोनों के पिता बीजू पटनायक और मुलायम सिंह यादव समाजवादी राजनीति के बड़े चेहरा रहे. जनता परिवार में मिलकर काम किया था. अखिलेश यादव ने मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया. याद किया कि कैसे बीजू पटनायक और नवीन पटनायक ने ओडिशा के विकास के लिए काम किया.
दोनों की मुलाकात को लेकर सस्पेंस
अखिलेश यादव का नवीन पटनायक से जाकर मिलने में कोई राजनीति पकड़ना मुश्किल है. ओडिशा में सपा की राजनीति है नहीं. यूपी में बीजेडी का कोई इंटरेस्ट नहीं. हालांकि उन्होंने कामना कि ओडिशा में पिछड़ा आदिवासी, अल्पसंख्यक यानी पीडीए मजबूत होना चाहिए. अटकलें इतनी ही लग सकती हैं कि इंडिया गठबंधन में लाने के लिए अखिलेश ने कोई प्रपोजल दिया हो लेकिन नवीन बाबू को इंडिया में इंटरेस्ट होता तो उसी समय मान गए होते जब इंडिया गठबंधन बनाने चले नीतीश कुमार आकर मिले थे. तब तो नवीन बाबू ने मुंह पर ही मना कर दिया था कि वो विपक्ष के साथ नहीं हैं. हालांकि गए तो बीजेपी के साथ भी नहीं. अकेले लड़े और अकेले ही हारे.
पहले के मुकाबले बदली नवीन पटनायक की स्थितियां
हालांकि, नवीन पटनायक की स्थितियां तब से बहुत बदल चुकी है. तब वो एक और जीत की उम्मीद में थे. पार्टी काबू में थी. अब चुनाव हार चुके हैं. पार्टी काबू से बाहर है. लोकसभा में बीजेडी जीरो है और राज्यसभा के दो सांसद टूट चुके. बचे खुचे सांसद संसद में इस बात से अवाक है कि मोदी सरकार को लेकर नवीन पटनायक लगातार कन्फ्यूजिंग, कॉन्फ्लेक्टिंग स्टैंड ले रहे हैं.
किसी मिशन पर हैं अखिलेश यादव?
अखिलेश यादव जरूर किसी मिशन पर लगते हैं. 2027 में उन्हें यूपी का सबसे बड़ा चुनाव लड़ना है. कांग्रेस के साथ अलायंस करने से उन्होंने लोकसभा चुनाव में जबर्दस्त फायदा हुआ. अब वही कॉम्बिनेशन विधानसभा में भी रिपीट किया जाना है. अखिलेश यादव ऐसे पार्टियों के साथ संपर्क साध रहे हैं जो इंडिया और एनडीए किसी में नहीं हैं. नवीन पटनायक से मिलने से पहले अखिलेश यादव हैदराबाद गए थे. वहां उन्होंने बीआरएस नेता केटी रामाराव के साथ लंच किया था. वहां भी वही कहानी. बीआरएस का यूपी से कोई मतलब नहीं. सपा को तेलंगाना से कोई लेना-देना नहीं. कहीं अखिलेश वही तो नहीं कर रहे जो बीजेपी के खिलाफ विपक्ष की एकजुट करने के लिए कभी नीतीश कुमार और ममता बनर्जी ने की थी.
ममता बनर्जी से दूरी, लेकिन सोशल मीडिया पर संपर्क
इधर ममता बनर्जी से अखिलेश यादव को भी सीधी मुलाकात नहीं हुई है लेकिन सोशल मीडिया के जरिए अखिलेश यादव लगातार ममता बनर्जी से संपर्क बनाए हुए हैं. जन्मदिन पर बधाई देने से लेकर ममता बनर्जी के फिर चुनाव जीतने की भविष्यवाणी और ईडी रेड के लिए बीजेपी पर निशाना साध चुके हैं अखिलेश यादव. ममता बनर्जी ने भी इंडिया गठबंधन को बनाने की पहल की थी. जैसे ही गठबंधन ने आकार लिया, ममता ने अलग स्टैंड ले लिया. इंडिया अलायंस में टीएमसी आज भी है लेकिन किसी चुनावी अलायंस के मकसद से नहीं. कांग्रेस या लेफ्ट से तो अलायंस का सवाल भी नहीं.
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