Shesh Bharat: आसिम वकार ने बताया क्यों छोड़ा AIMIM, ओवैसी से जुड़े पुराने राज भी खोले

रूपक प्रियदर्शी

• 11:10 AM • 23 Sep 2026

आसिम वकार ने AIMIM छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा है. उन्होंने ओवैसी की राजनीति पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि उन्हें ओवैसी को समझने में 10 साल लग गए. वकार ने ओवैसी और कांग्रेस के पुराने रिश्ते का भी जिक्र किया. 2012 में दोनों के बीच 29 साल पुराना रिश्ता टूट गया था.

asim waqar
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राजनीति में जब दोस्त दुश्मन बनते हैं, तो गड़े मुर्दे भी उखाड़े जाते हैं और इतिहास के वो पन्ने भी खोले जाते हैं जिन पर धूल जम चुकी होती है. असदुद्दीन ओवैसी के सबसे भरोसेमंद, टीवी डिबेट्स में विरोधियों के छक्के छुड़ाने वाले AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद आसिम वकार ने ओवैसी का साथ छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है. लेकिन कहानी सिर्फ पार्टी बदलने की नहीं है. आसिम वकार ने अब ओवैसी की पॉलिटिक्स के धागे खोल दिए हैं.

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सपा से शुरू हुआ था आसिम वकार का सफर

आसिम वकार ने राजनीति की शुरुआत समाजवादी पार्टी से की थी, जहां वो करीब 20 साल तक मुलायम सिंह यादव के साथ रहे. लेकिन 2012 के बाद जब अखिलेश यादव से उनके मतभेद बढ़े, तो उन्होंने सपा छोड़ दी. 2017 में जब असदुद्दीन ओवैसी हैदराबाद से निकलकर यूपी में पैर पसार रहे थे, तब उन्हें एक ऐसे चेहरे की तलाश थी जो पढ़े-लिखे अंदाज में मुखर होकर बात रख सके. यहीं पर ओवैसी और आसिम वकार का मिलन हुआ. वकार ओवैसी के इतने चहेते बने कि ओवैसी ने उन्हें सीधे राष्ट्रीय प्रवक्ता बना दिया. पिछले 10 सालों में जब-जब विपक्षी दल ओवैसी पर बीजेपी की 'बी-टीम' होने का आरोप लगाते थे, तब-तब टीवी चैनलों पर आसिम वकार ही ओवैसी की सबसे मजबूत ढाल बनकर खड़े होते थे.

10 साल बाद खत्म हुई सियासी मोहब्बत

10 साल बाद इस 'सियासी मोहब्बत' का अंत बेहद कड़वाहट के साथ हुआ. अब आसिम वकार ने ओवैसी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मुझे ओवैसी की राजनीति को पहचानने में 10 साल लग गए, और जैसे ही मुझे असलियत का एहसास हुआ, मैंने खुदा हाफिज कह दिया. वकार का सीधा आरोप था कि ओवैसी की पार्टी असल में बीजेपी के खिलाफ नहीं लड़ रही है. वकार ने कहा कि वे देश में फासीवादी ताकतों और बीजेपी के खिलाफ जमीन पर एक मजबूत लड़ाई रखना चाहते थे, लेकिन AIMIM में रहकर उन्हें महसूस हुआ कि पार्टी बीजेपी को हराने के बजाय उन विपक्षी ताकतों जैसे कांग्रेस और सपा को कमजोर करने का काम करती है जो बीजेपी के सामने डटकर खड़ी हैं. वकार ने साफ कहा कि आज के दौर में बीजेपी से असली लड़ाई सिर्फ राहुल गांधी लड़ रहे हैं.

आसिम वकार का बयान

जब आसिम वकार के इस्तीफे पर ओवैसी और उनके समर्थकों ने पलटवार करते हुए कहा कि वकार को ओवैसी को समझने में 10 साल लग गए? तो वकार ने पलटकर इतिहास का वो पन्ना खोल दिया जिसे ओवैसी आज की तारीख में शायद कभी याद नहीं करना चाहेंगे.

ओवैसी और कांग्रेस के पुराने रिश्ते की कहानी

वकार का इशारा उस दौर की तरफ था जब आज कांग्रेस को मुसलमानों की सबसे बड़ी दुश्मन बताने वाले ओवैसी खुद दशकों तक कांग्रेस के सबसे वफादार साथी हुआ करते थे. 1980 के दशक में इंदिरा गांधी और असदुद्दीन ओवैसी के पिता सुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसी के बीच बेहद करीबी रिश्ते थे, जो आगे चलकर 2012 तक जारी रहे.

UPA सरकार के दौरान AIMIM का साथ

ये वो दिलचस्प इतिहास है जिसे या तो बहुत सारे लोग जानते नहीं या भूल चुके हैं. 2004 और 2009 में जब केंद्र में मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस की UPA सरकार बनी, तो ओवैसी की पार्टी AIMIM उसी UPA गठबंधन का हिस्सा थी. यहां तक कि 2008 में जब भारत-अमेरिका परमाणु समझौते (Nuclear Deal) पर लेफ्ट ने समर्थन वापस ले लिया और मनमोहन सरकार गिरने की कगार पर थी, तब असदुद्दीन ओवैसी ने खुद संसद में कांग्रेस सरकार के पक्ष में वोट देकर सरकार बचाई थी.

2012 में टूटा 29 साल पुराना रिश्ता

29 साल पुराना रिश्ता नवंबर 2012 में अचानक एक बड़े विवाद के बाद टूट गया. हैदराबाद के ऐतिहासिक चारमीनार से सटे भाग्यलक्ष्मी मंदिर पर शेड लगाने को लेकर विवाद हुआ था. ओवैसी की पार्टी ने तत्कालीन आंध्र प्रदेश की किरण कुमार रेड्डी सरकार, जो कि कांग्रेस की थी, पर सांप्रदायिक रवैया अपनाने का आरोप लगाया. जब इस विवाद के विरोध में प्रदर्शन कर रहे AIMIM के विधायकों को कांग्रेस सरकार ने जेल में डाल दिया, तो भड़के असदुद्दीन ओवैसी ने दिल्ली से लेकर आंध्र प्रदेश तक कांग्रेस सरकार से अपना 29 साल पुराना नाता हमेशा-हमेशा के लिए तोड़ लिया. फिर हमेशा के लिए कांग्रेस और ओवैसी के रास्ते अलग हो गए. ओवैसी कांग्रेस के खिलाफ बीजेपी के साथ तो नहीं गए लेकिन कुछ न कुछ ऐसा करते रहे जिससे उनकी इमेज बीजेपी के मददगार की बन गई.

राहुल गांधी और ओवैसी की पुरानी तकरार

वकार का यह पाला बदलना इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि राहुल गांधी और असदुद्दीन ओवैसी के बीच एक-दूसरे पर तीखे हमले करने का पुराना इतिहास रहा है. राहुल गांधी चुनावी रैलियों में खुलेआम ओवैसी को 'मोदी के दो यार' कहकर चिढ़ाते रहे हैं और आरोप लगाते रहे हैं कि ओवैसी बीजेपी से पैसे लेकर कांग्रेस के वोट काटते हैं. जवाब में ओवैसी भी राहुल गांधी पर निजी तंज कसने और उन्हें हैदराबाद से चुनाव लड़ने की खुली चुनौती देने से पीछे नहीं हटे.

गठबंधन को लेकर भी जारी रही खींचतान

इस राजनीतिक रंजिश का सबसे दिलचस्प मोड़ यह है कि पिछले काफी समय से ओवैसी विपक्षी दलों के 'इंडिया गठबंधन' में शामिल होने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, कभी अखिलेश यादव को तो कभी राहुल गांधी को अल्टीमेटम दे रहे हैं. लेकिन कांग्रेस और उनके सहयोगियों ने ओवैसी को पूरी तरह दरकिनार कर रखा है और इस गठबंधन में उन्हें कोई घास तक नहीं डाल रहा है. आसिम वकार का आरोप है कि इसी उपेक्षा के बावजूद ओवैसी सेक्युलर वोटों को बांटने का खेल खेल रहे हैं.

कांग्रेस में वकार की एंट्री से बढ़ी सियासी हलचल

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आसिम वकार का कांग्रेस में जाना और ओवैसी के पुराने 'कांग्रेसी प्रेम' का इतिहास सरेआम खंगालना, ओवैसी की राजनीति के लिए एक बड़ा झटका है. टीवी पर ओवैसी के लिए तर्क गढ़ने वाला शख्स अब राहुल गांधी के लिए बैटिंग कर रहा है. देखना दिलचस्प होगा कि वकार के इन तीखे तीरों का जवाब ओवैसी और उनकी पार्टी आने वाले दिनों में किस अंदाज में देती है.

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