Bengal Election 2026: क्या ममता के 'किले' में सेंध लगा पाएगी BJP? 74 विधायकों के टिकट कटे, 'खेला' होने के आसार

Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में ममता बनर्जी ने एंटी-इंकंबेंसी को देखते हुए 74 विधायकों के टिकट काट दिए हैं, जबकि बीजेपी डिजिटल प्लेटफॉर्म और सरकारी मुद्दों के जरिए सत्ता परिवर्तन की कोशिश में है. 23 और 29 अप्रैल को होने वाला मतदान बंगाल की अगली दिशा तय करेगा.

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न्यूज तक डेस्क

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Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों का बिगुल बज चुका है और सियासी पारा अपने चरम पर है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जहां चौथी बार सत्ता में वापसी के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रही हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) राज्य में परिवर्तन का दावा कर रही है. राज्य की 294 सीटों पर होने वाले इस महामुकाबले में इस बार कई नए समीकरण देखने को मिल रहे हैं जो बंगाल की भविष्य की राजनीति तय करेंगे.

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ममता बनर्जी का विनिंग फैक्टर वाला दांव

एंटी-इंकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) को मात देने के लिए तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने इस बार बहुत बड़ा जोखिम लिया है. पार्टी ने अपने 291 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी करते हुए 74 मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिए हैं. इनमें कई कद्दावर नेता और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे नाम शामिल हैं. ममता का यह दांव साफ संकेत है कि वे संगठन में नई ऊर्जा भरना चाहती हैं और जनता के बीच 'क्लीन इमेज' के साथ जाना चाहती हैं.

क्या है बीजेपी की स्ट्रैटजी 

दूसरी तरफ, बीजेपी ने बंगाल विजय के लिए एक अभूतपूर्व डिजिटल कैंपेन तैयार किया है. पार्टी ने राज्य भर में 1.3 लाख से ज्यादा व्हाट्सएप ग्रुप बनाए हैं. जिनके जरिए 20-30 सेकंड के वीडियो संदेशों से सीधे मतदाताओं तक पहुंचा जा रहा है. बीजेपी का मुख्य फोकस सरकारी कर्मचारियों की नाराजगी मिडिल क्लास की समस्याएं और 7th Pay Commission जैसे मुद्दों पर है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी बंगाल में "सोनार बांग्ला" के अपने पुराने वादे को नए कलेवर में पेश कर रही है.

चुनावी जंग के मुख्य मुद्दे: SIR और भ्रष्टाचार

इस चुनाव में Special Intensive Revision (SIR) यानी मतदाता सूची में संशोधन का मुद्दा सबसे गरमाया हुआ है. ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और बीजेपी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि लाखों मतदाताओं के नाम जानबूझकर काटे गए हैं. वहीं, बीजेपी संदेशखाली जैसी घटनाओं और टीएमसी नेताओं पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को आधार बनाकर ममता सरकार को घेर रही है.

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