2029 के चुनाव में होगा BJP vs CJP? अभिजीत दीपके ने कहा- आज की राजनीति से काबिल होंगे मेरी पार्टी के लीडर, पढ़ें पूरा इंटरव्यू

Abhijeet Deepke Interview: 2029 के चुनाव में क्या BJP को चुनौती देगी 'कॉकरोच जनता पार्टी'? जानिए अभिजीत दीपके ने अपने एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में क्या कहा. पढ़ें CJP के डिजिटल आंदोलन, युवाओं की राजनीति, अरविंद केजरीवाल कनेक्शन, NEET पेपर लीक, हिंदू-मुस्लिम राजनीति और 2029 चुनाव को लेकर अभिजीत की बड़ी बातें.

Abhijeet Deepke Interview
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सोनल मेहरोत्रा कपूर

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पूरे इंटरनेट पर पिछले 2-3 दिनों से 'कॉकरोच जनता पार्टी' छाई हुई है और इसके पीछे जो शख्स है उसका नाम है अभिजीत दीपके. अभिजीत एक सप्ताह पहले बॉस्टन में नौकरी के लिए एप्लाई कर रहे थे, इसी बीच भारत के CJI ने सोशल मीडिया पर एक्टिव भारतीय युवाओं की तुलना कॉकरोच से कर दी. अभिजीत को यह बात जमी नहीं और फिर उन्होंने एक सोशल मीडिया कैंपेन लॉन्च कर दी और टैगलाइन रखा- 'मैं भी कॉकरोच'. युवाओं ने भी इसे सपोर्ट किया और फिलहाल इंस्टाग्राम पर इसके 20.1 मिलियन यानी 2 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके है और वेबसाइट पर लाखों की संख्या में युवा रजिस्टर कर चुके है.

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युवा इस डिजिटल क्रांति में ऑनलाइन के साथ-साथ अब ऑफलाइन भी दिखाई देने लगे है. कॉकरोच मास्क पहने कुछ युवा यमुना की सफाई करने लगे तो विपक्ष के सांसद इस मुहिम में शामिल होने की मिन्नत करने लगे. इसी बीच AAJTAK.IN ने इस कॉकरोच जनता पार्टी बनाने वाले ब्रेन यानी अभिजीत दीपके से खास बातचीत की, जिसमें उन्होंने 2029 के चुनाव, अपने पार्टी के लोग सहित कई मुद्दों पर खुलकर अपनी राय बताई.

क्यों बनाई पार्टी और क्या अभिजीत है असली कॉकरोच?

'कॉकरोच जनता पार्टी' के पीछे जो ब्रेन है, वह भी इंडियन है. अभिजीत दीपके एक 30 साल के भारतीय है और उन्होंने अमेरिका के बॉस्टन यूनिवर्सिटी से PR(Public Relations) में मास्टर्स की डिग्री पूरी की है. बातचीत के दौरान अभिजीत ने खुद बताया कि पिछले सप्ताह तक वो नौकरी के एप्लाई कर रहे थे, लेकिन शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर है इसलिए यह सब हुआ. जब उनसे पूछा गया कि असली कॉकरोच कौन है तो उन्होंने, मैं(अभिजीत) ही कॉकरोच हूं. CJI मेरे जैसे युवाओं की ही बात कर रहे थे.

इस डिजिटल कैंपेन को बनाने के पीछे की वजह पूछने पर उन्होंने कहा कि, भारत के CJI के मुंह से युवाओं के लिए कॉकरोच जैसा शब्द निकलना मेरे लिए सबसे बड़ा ट्रिगर है. अभिजीत ने कहा कि, जो खुद संविधान के रक्षक है अगर वहीं हमारी तुलना कॉकरोच और परजीवियों से करेगा तो हम क्या करेंगे. जो इंसान हमारी अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा करने के लिए बैठा है, अगर वहीं ऐसी बातें बोलेगा, तो मुझे चुभ गया.

पल भर की गर्मी या फिर लंबा चलेगा सफर

अभिजीत से इंटरव्यू के दौरान जब सवाल किया गया कि, क्या है उबाल पल भर की गर्मी की तरह ही है या फिर सफर लंबा चलने वाला है? साथ ही इसके पीछे आपका अपना क्या मकसद है? इनके जवाब में अभिजीत ने कहा कि, यह एक बड़ी चुनौती की तरह है और हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं. हम सबसे उन सभी लोगों एक पहुंचेंगे जिन्होंने रजिस्ट्रेशन कराया है और उनकी समस्याओं को सुनेंगे. अभिजीत का कहना है कि हमने कई शिकायतें सुनाई हैं, जिसमें युवा कह रहे हैं कि, हमारी कोई नहीं सुनता, हमसे कोई बात ही नहीं करता, वे तो हमारे अस्तित्व को भी स्वीकार नहीं करते.' इससे साफ हो गया है कि अभिजीत का यह कैंपेन काफी आगे चलने वाला है और वह युवाओं की नई आवाज बनकर उभर रहे है.

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क्या है एक्शन प्लान?

अभिजीत से जब आगे का प्लान यानी एक्शन प्लान की बात करें तो उनके पास फिलहाल कोई ठोस प्लान नहीं है, लेकिन वो लोगों की बातों को सुनकर आगे की दिशा तय करेंगे. अभिजीत ने कहा कि अभी इसे 3-4 दिन ही हुए है, इससे पहले कुछ भी तय नहीं था. अगर मुझे प्लानिंग करनी होती तो मैं अमेरिका की जगह भारत में होगा. लेकिन एक बात साफ है कि यह सब उसी निराशा का परिणाम है जिसे देश के युवा कई सालों से अपने अंदर दबाए बैठे हुए है. साथ ही भारत में दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है लेकिन हालात ऐसे है कि उसी आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा रोजगार के क्षेत्र से बाहर है.

2029 के चुनाव में पार्टी लड़ेगी चुनाव?

जब अभिजीत से 2029 के चुनाव में उतरने का सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि इस बारे में अभी कुछ बोलना जल्दबाजी होगी. इस आंदोलन को अभी महज 3-4 दिन हुए है. ऐसे में पहले हम युवाओं से बात करेंगे और फिर फैसला लेंगे की आगे क्या करना और क्या नहीं करना चाहिए. उन्होंने इसके पीछे का तर्क दिया कि, युवाओं का कहना है कि देश की कोई भी पार्टी उनकी बात नहीं सुनती, उन्हें पूरी तरह अनदेखा किया जाता है. लेकिन इस डिजिटल कैंपेन में चीजें अलग तरीके की दिख रही हैं और यहां तक की पहले से मौजूद पार्टी भी हमारी मूवमेंट पर नजर रखी हुई है. कई नेता और पार्टी हमें समर्थन देने की बात कह रहे हैं, लेकिन युवाओं के मन में एक नई आस जागी है.

'आज की पॉलिटिक्स में काबिल होंगे मेरी पार्टी के लीडर'

जब अभिजीत से पूछा गया कि आज के दौर में कोई ऐसा नेता आपको दिखता है जो कि युवाओं का नेतृत्व कर सकें? इसका उन्होंने तर्क के साथ जवाब दिया. अभिजीत दीपके ने साफ किया कि, मैं उनका नेतृत्व नहीं कर रहा हूं. इस आंदोलन को युवाओं ने खुद खड़ा किया है और इसकी मुझे उम्मीद भी नहीं थी. 

फिर उनसे पूछा गया कि बिना नेतृत्व के चलने वाले आंदोलन तो खतरनाक होते है और इतिहास भी इसका गवाह है? इसपर उन्होंने कहा कि, मुझे नहीं लगता है कि यह आंदोलन बिना लीडर के रहेगा. जल्द ही यह एक चेहरे को सामने लाएगा. उन्होंने साफ कहा कि, आज जो चेहरे पॉलिटिक्स में है, उनसे कहीं ज्यादा पढ़े-लिखे और काबिल चेहरे इस आंदोलन से उभर कर सामने आएंगे. साथ ही मेरी पार्टी के जो लीडर होंगे वह ज्यादा काबिल होंगे. 

क्या केजरीवाल के साथ जाएगी कॉकरोच जनता पार्टी?

अरविंद केजरीवाल के साथ जाने वाले सवाल पर उन्होंने कहा कि, वो चाहे तो अपना समर्थन दे सकते हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता है कि जेन-जी का कोई भी युवा नहीं चाहेगा कि इस आंदोलन में राजनीतिक दल शामिल हो. आपको बता दें कि इसकी चर्चा इसलिए हो रही हैं क्योंकि साल 2020 से 2023 तक अभिजीत ने केजरीवाल के साथ काम किया था.

क्या किसी भी दल से नहीं मिलाएंगे हाथ?

अभिजीत ने किसी दल के साथ मिलने वाले सवाल पर भी अपना रुख साफ किया है. उन्होंने कहा है कि, यह आंदोलन पूरी तरह स्वतंत्र रहेगा. हमारा तात्कालिक टारगेट भारत के राजनीतिक विमर्श को पूरी तरह बदलना है. उन्होंने कहा कि पिछले 10-12 सालों से यहां की राजनीति हिंदू-मुस्लिम की बातें पर ही घूम रहा है. लेकिन इससे युवाओं को क्या मिल रहा है? इससे किसी का भी भला नहीं हो रहा है और देश के युवा इस बात को पूरी तरह के समझ चुके है.

'NEET पेपर लीक' पर भड़के अभिजीत!

अभिजीत ने भारत और अमेरिका के बीच तुलना करते हुए कहा है कि, अमेरिका में AI इंडस्ट्री, सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री जैसे चीजों की बातें होती है और भारत में हिंदू-मुस्लिम की राजनीति होती है. और इसी तरह की घटिया राजनीति का परिणाम है 'NEET पेपर लीक'. उन्होंने युवाओं की बात करते हुए कहा कि एक 17 साल का बच्चा इसलिए सुसाइड कर ले रहा है क्योंकि पेपर लीक हो गया था. वह बच्चा कल को डॉक्टर बन देश की सेवा कर सकता था, लेकिन उससे पहले ही मजबूर होकर उसने जान दे दी. फिर भी क्या हुआ...क्या शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दिया या फिर विपक्ष ने दबाव बनाया? 

इसलिए पक्ष हो या विपक्ष, लोग किस पर भरोसा करेंगे.  उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि, पुर्तगाल में एक भारतीय टूरिस्ट की मौत हो गई थी, तब वहां के मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था. तो ऐसा हमारे देश में क्यों नहीं हो सकता है.

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