तमिलनाडु में बन रहा ऐसा समीकरण कि अब CM विजय को नहीं पड़ेगी कांग्रेस की जरूरत, AIADMK के तीन विधायकों ने पलटा पूरा गेम?

Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है. मुख्यमंत्री सी.जोसेफ विजय की पार्टी TVK अब अपने दम पर सरकार बनाने की रणनीति में जुटी नजर आ रही है. अब क्या कांग्रेस को जल्द बड़ा झटका लगने वाला है? जानिए TVK, AIADMK, कांग्रेस और तमिलनाडु विधानसभा के बदलते राजनीतिक समीकरण की पूरी कहानी.

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मृगांक शेखर

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तमिलनाडु में सी. जोसेफ विजय अपनी नई गठबंधन वाली सरकार चला रहे है. लेकिन इसी बीच एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है. कहा जा रहा है कि विजय ने गठबंधन में सरकार भले ही बनाई हो, लेकिन उनका इरादा कुछ अलग ही नजर आ रहा है. बताया जा रहा है कि विजय अब राज्य में अपने बल-बूते पर सरकार चलाना चाहते है और अगर यह सही है तो कांग्रेस को तगड़ा झटका लग सकता है.

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मुख्यमंत्री विजय एक ओर लोगों के लिए कल्याणकारी कदम उठा रहे है, ताकि जनता में उनका विश्वास बढ़े. तो वहीं दूसरी ओर बिना किसी तोड़-फोड़ के ही विरोधी खेमे यानी AIADMK के तीन नेता विजय की पार्टी TVK का दामन थामने के लिए चले आते हैं. ऐसे में राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई है कि TVK जल्द ही कांग्रेस को झटका दे सकती है और अपनी सरकार बना सकती है. साथ ही AIADMK के तीन विधायकों का विजय को सपोर्ट मिलते ही विजय पूरा गेम पलट सकते है. आइए विस्तार से जानते है पूरी कहानी.

राज्यसभा में एंट्री, ऐसे साधेंगे जनता को

तमिलनाडु की मेलम विधानसभा सीट से जीतने के बाद सीवी शनमुगम ने राज्यसभा पद से इस्तीफा दे दिया है और इसलिए राज्य में 18 जून को राज्यसभा की एक सीट के लिए उपचुनाव होगा. अब विजय इसी सीट के जरिए TVK की राज्यसभा में एंट्री कराना चाहते है. इस सीट के लिए टीवीके की ओर से रिटायर्ड IAS अफसर यू सगायम को राज्यसभा भेजने की तैयारी कर रही है. इसके पीछे की वजह है यू सगायम की ईमानदारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी मशहूर लड़ाई.

यू सगायम ऐसे अफसर है जिनका 28 साल में 25 बार ट्रांसफर हुआ, लेकिन उन्होंने अपना रवैया नहीं बदला. अब मुख्यमंत्री विजय उनको राज्यसभा भेजकर जनता में साफ संदेश चाहते है कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त है और ऐसे में DMK और AIADMK अपने आप निशाने पर आ जाएगी. विजय इस बहाने जनता को साध लेंगे और विश्वास को मजबूत करना चाहते है.

उपचुनाव पर विजय की पैनी नजर

राज्यसभा के अलावा राज्य के 4 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव भी होने है. एक सीट तो विजय ने ही खाली की है क्योंकि तमिलनाडु चुनाव में उन्होंने दोनों ही सीट से चुनाव जीत लिया था, जबकि तीन सीटें AIADMK से TVK में शामिल हुए नेताओं के इस्तीफे की बाद खाली हुई है.

AIADMK के तीन विधायक के. मरगथम कुमारवेल, एस. जयकुमार और पी. सत्यभामा ने विधानसभा स्पीकर से मिलकर अपना इस्तीफा सौंप दिया है. अब राज्य में होने वाले उपचुनाव में यह तीनों विधायक TVK के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे. उपचुनाव जीतने के बाद ही यह तीनों TVK के विधायक बन जाएंगे और फिर किसी गठबंधन को इससे समस्या नहीं होगी.

TVK देगी कांग्रेस को झटका? पूरा समीकरण

कहा जा रहा है कि फिलहाल हुए तीन विधायकों का इस्तीफा तो सिर्फ ट्रेलर है, असल में पिक्चर अभी बाकी है. TVK के बड़े सूत्रों के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने बताया है कि आने वाले दिनों में कम से कम 7 से 8 विधायक इस्तीफा देने वाले है और सारे टीवीके को ही जॉइन करने वाले है. अगर ऐसा हुआ तो राज्य में सीटों का जो समीकरण है वह पूरी तरह बदल जाएगा.

सीटों के समीकरण की बात करें तो राज्य में 234 विधानसभा सीट है और सरकार बनाने के लिए 118 की संख्या चाहिए होती है. फिलहाल TVK के पास 107 विधायक अपने है. उपचुनाव में अगर 4 सीटों पर TVK की जीत होती है तो यह संख्या 111 का हो जाएगा. साथ ही उपचुनाव से पहले अगर 7-8 विधायक इस्तीफा देकर TVK जॉइन करते है और उप-चुनाव जीतते है तो विजय के पास अपने बल-बूते पर सरकार बनाने की संख्या आराम से हो जाएगी.

फिलहाल कांग्रेस के 5 विधायकों का समर्थन विजय की पार्टी TVK को प्राप्त है, जिसे सरकार बनाने में काफी मदद मिली है. अगर विधायकों का इस्तीफा हुआ और वे उपचुनाव जीत गए तो विजय कांग्रेस को बड़ा झटका दे सकते हैं और उनसे छुटकारा पा लेंगे. TVK के एक सीनियर नेता का कहना है कि, अगर ऐसा होता है तो जनता में सीधा मैसेज जाता है कि सरकार स्थिर है और ऐसे में लोग सरकार को लंबे समय तक समर्थन देने के लिए सोच सकते है.

TVK का एक्शन 'ऑपरेशन लोटस' जैसा?

शुरुआत में राजनीतिक सपोर्ट के तौर पर टीवीके ने गठबंधन की थी, जिसमें AIADMK के बागी नेताओं का भी समर्थन मिला था. लेकिन अब राजनीतिक सपोर्ट बदलकर रणनीतिक बदलाव की तौर पर दिआई दे रहा है. अब जो भी हो रहा है, वह हद तक राजनीतिक अधिग्रहण जैसा लग रहा है. बीते समय में कर्नाटक और मध्य प्रदेश में बीजेपी ने ऐसे तरीके अपनाए, जिसमें 'ऑपरेशन लोटस' का नाम दिया गया.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जिस तरह से सत्ताधारी दल टीवीके अपने कदम आगे बढ़ रही है, उसे तमिलनाडु की राजनीति के कई नेता निजी तौर पर महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट मान रहे है. साथ ही कहा जा रहा है कि टीवीके का मोटिव एकदम क्लियर है कि अब सहयोगी दलों पर निर्भरता कम करके अपने बल पर सरकार चलाना.

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