झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव में भारी उलटफेर और क्रॉस-वोटिंग देखने को मिली है. तमाम राजनीतिक समीकरणों को ध्वस्त करते हुए एनडीए (NDA) समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी ने जीत दर्ज की है. उन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी प्रणव झा को शिकस्त दी. वहीं, दूसरी सीट पर सत्ताधारी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम विजयी रहे.
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इससे पहले निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट किया है जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी थी. निशिकांत दुबे ने पोस्ट करते हुए लिखा कि, झारखंड से राज्यसभा के चुनाव में NDA समर्थित प्रत्याशी परिमल नाथवाणी जी को जीत की बधाई , उन्हें कुल 28 मत मिले. वहीं कांग्रेस प्रत्याशी को केवल 20, महा गठबंधन बुरी तरह हारा.
क्रॉस-वोटिंग ने बदला खेल, कांग्रेस को लगा झटका
चुनाव अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस मतदान में जमकर क्रॉस-वोटिंग हुई, जिसका सीधा फायदा निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी को मिला. नथवाणी को कुल 28 वोट मिले, जिसके बाद उन्हें विजेता घोषित कर दिया गया. वहीं, कांग्रेस के प्रणव झा को केवल 20 वोटों से ही संतोष करना पड़ा और उन्हें हार का सामना करना पड़ा.
बैद्यनाथ राम को मिले सबसे ज्यादा वोट, 3 वोट हुए अमान्य
जेएमएम (JMM) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम ने सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 30 वोट हासिल किए और आसानी से अपनी सीट पक्की कर ली.इस चुनाव में वोटों की गिनती के दौरान भारी लापरवाही भी सामने आई. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, कुल 3 वोट अमान्य घोषित किए गए, जिनमें से दो वोट बीजेपी के और एक वोट कांग्रेस के विधायक का था.
आंकड़ों के खेल में ऐसे जीते नथवाणी
81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में राज्यसभा सीट सुरक्षित करने के लिए किसी भी उम्मीदवार को पहली वरीयता के न्यूनतम 28 वोटों की आवश्यकता थी. इस चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास केवल 24 विधायक थे, जो जीत के जादुई आंकड़े से 4 कम थे. इसके बावजूद, विपक्षी खेमे में हुई भारी सेंधमारी और क्रॉस-वोटिंग ने परिमल नथवाणी की राह आसान कर दी और वे 28 वोट जुटाकर विजयी रहे.
दूसरी ओर, जेएमएम और कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ इंडिया (INDIA) ब्लॉक के पास सदन में कुल 56 सदस्यों का भारी-भरकम बहुमत था. इस बहुमत के दम पर गठबंधन दोनों सीटें आसानी से जीत सकता था, लेकिन क्रॉस-वोटिंग और आपसी तालमेल की कमी के कारण वे अपने दूसरे उम्मीदवार प्रणव झा को नहीं जिता पाए. इस परिणाम के बाद झारखंड की सियासत में क्रॉस-वोटिंग करने वाले विधायकों को लेकर कयासों का बाजार गर्म हो गया है.
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