Shesh Bharat: केरल की लेडी सिंघम आर श्रीलेखा और BJP में तकरार? PM मोदी के मंच पर जो हुआ उसने सबको चौंकाया!

Shesh Bharat: केरल में बीजेपी नेता और पूर्व आईपीएस अधिकारी आर श्रीलेखा मेयर पद न मिलने और पीएम मोदी की रैली में उनसे मुलाकात न होने के बाद चर्चा में हैं. सोशल मीडिया पर विवाद बढ़ा तो उन्होंने प्रोटोकॉल का हवाला देकर सफाई दी.

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रूपक प्रियदर्शी

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Shesh Bharat: केरल में विधानसभा चुनाव से पहले लोकल बॉडीज इलेक्शन में कांग्रेस अलायंस यूडीएफ की जीत हुई. लेफ्ट अलायंस एलडीएफ की हार हुई. लेकिन सबसे ज्यादा नाची बीजेपी. केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम के नगर निगम चुनाव में जीत ने बीजेपी को जोश से भर दिया. केरल की पहली महिला आईपीएस और डीजीपी रैंक की ऑफिसर आर श्रीलेखा ने राजनीति में कदम रखा. बीजेपी ज्वाइन की. तिरुवनंतपुरम चुनाव में बीजेपी की फेस बनी. माना जा रहा था कि चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद श्रीलेखा ही मेयर बनेंगी. बीजेपी के तिरुवनंतपुरम चुनाव में जीतते ही बड़ा खेल हो गया.

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श्रीलेखा की दावेदारी धरी की धरी रह गई. पार्टी ने वीवी राजेश को मेयर बना दिया. तब से श्रीलेखा और बीजेपी के रिश्ते को लेकर बहुत सारी बातें कही जा रही हैं. मेयर पर पत्ता कटने से श्रीलेखा का दिल टूटा. केरल पुलिस में इतना बड़ा कद होने के बाद भी बीजेपी आते ही बस पार्षद बनकर रह गईं श्रीलेखा. अब जो हुआ उसने श्रीलेखा और बीजेपी के बीच चल रही खींचतान को और हवा दे दी है. 

श्रीलेखा से मांगा गया जवाब

केरल चुनाव का माहौल बनाने पीएम मोदी 23 जनवरी को केरल के दौरे पर थे. तिरुवनंतपुरम के पुथारिकंदम मैदान में पीएम की बड़ी रैली हुई जिसमें एनडीए के तमाम नेता मंच पर बुलाए गए. श्रीलेखा भी मंच पर तो थीं लेकिन पीएम मोदी से उनकी मुलाकात नहीं होने से बड़ा हंगामा मचा है. दावा किया जा रहा है कि न तो पीएम मोदी से श्रीलेखा की मुलाकात कराई गई. न श्रीलेखा ने पीएम मोदी से मिलने की कर्टसी निभाई. जो जहां बैठी थीं वहीं बैठी रहीं. मोदी मंच पर आए. लोगों से मिले. मेयर वीवी राजेश को तो गले भी लगा लिया लेकिन श्रीलेखा की कहीं कोई पूछ नहीं थी. विजुअल्स में श्रीलेखा को मंच पर अलग थलग और पीएम का अभिवादन नहीं करते हुए देखा गया. पीएम के ठीक पीछे सीट मिलने के बाद भी उन्होंने कोई कोशिश नहीं की पीएम से अप्ररोच करने की. हल्ला मचने के बाद केरल बीजेपी के कान खड़े हुए. द न्यूज मिनिट्स की रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी ने श्रीलेखा से एक्सप्लेनेशन मांगा कि उन्होंने ऐसा क्यों किया. 

श्रीलेखा ने सफाई में क्या जवाब दिया

माना लिया गया कि मेयर नहीं बनाने से नाराज श्रीलेखा ने सार्वजनिक रूप से अपना विरोध दर्ज कराया. वही वीडियो वायरल हो रहा है. सोशल मीडिया में दावा किया जा रहा है कि मेयर न बनाए जाने से नाराज श्रीलेखा ने ही पीएम मोदी को इग्नोर कर दिया. इतना हल्ला मचा कि श्रीलेखा को फेसबुक पर आकर सफाई देनी पड़ी कि 33 साल की पुलिस सेवा के कारण वो अनुशासन और प्रोटोकॉल का पालन कर रही थीं. ट्रेनिंग में सिखाया गया जब तक आमंत्रित न किया जाए, किसी वीवीआईपी  के पास नहीं जाना चाहिए. इसलिए मैं अपनी सीट पर ही बैठी रही. मुझे लगा कि प्रधानमंत्री जिस वीवीआईपी प्रवेश द्वार से आते-जाते हैं, उसके पास जाना उचित नहीं होगा, इसलिए मैं अपनी सीट के पास ही खड़ी रही.

प्रोटोकॉल राजनीति पर भारी!

हो सकता है श्रीलेखा बीजेपी में आने के बाद भी पुलिस ड्यूटी और प्रोटोकॉल भूल न पाईं हों. उनके लिए ये संभव न हो कि एकदम से कूदकर किसी के सामने चले जाएं लेकिन उनका प्रोटोकॉल उनकी राजनीति पर भारी पड़ रहा है. और ये सब इसलिए हो रहा है क्योंकि एक बैकग्राउंड भी है. मेयर चुनाव में पत्ता कटने के बाद उन्होंने बड़ा दावा किया था कि बीजेपी ने उन्हें चुनाव से पहले मेयर बनाने का वादा किया था. वो तो चुनाव लड़ने के लिए भी तैयार नहीं थी लेकिन मेयर बनाने के वादे पर चुनाव लड़ने के लिए मान गईं. चुनाव के दौरान उन्होंने खुद को बार-बार आईपीएस की तरह प्रोजेक्ट किया जिसको लेकर विवाद भी हुआ. चुनाव आयोग के निर्देश पर आईपीएस टैग हटाना पड़ा क्योंकि रिटायर के बाद राजनीति में पद का उपयोग अनुचित माना गया.

वीवी राजेश को मिला मेयर पद

तिरुवनंतपुरम नगर चुनाव में बीजेपी भी जीती और शास्तमंगलम वार्ड से श्रीलेखा भी लेकिन मेयर पद मिला वीवी राजेश को जो बीजेपी के पुराने कार्यकर्ता हैं. डिप्टी मेयर पद भी नहीं मिला जो आशा नाथ को मिला. इतना कुछ बोलने के बाद श्रीलेखा की पार्टी से अनबन को हवा मिली लेकिन उन्होंने सारी अटकलें खारिज करते हुए कहा कि वो असंतुष्ट नहीं हैं और पार्टी की वफादार कार्यकर्ता हैं. पीएम मोदी को इग्नोर किए जाने के विवाद के बाद भी उन्होंने बीजेपी के लिए प्रति वफादारी जताई. बार-बार पार्टी के लिए वफादारी जताने से ही शक पैदा हो रहा है कि श्रीलेखा का मामला कुछ ठीक नहीं चल रहा है. 

रिटायरमेंट के बाद 2020 में बीजेपी ज्वाइन की बीजेपी

आर श्रीलेखा केरल में बीजेपी के उस सर्च अभियान से निकली जो पार्टी के विस्तार के लिए चल रही है. जनाधार बनाने के लिए बीजेपी ने राजनीतिक लोगों के साथ ऐसे लोगों को भी पार्टी से जोड़ा है जो अराजनीतिक रहे. लेकिन शासन, प्रशासन, सिस्टम में काम कर चुके हैं. श्रीलेखा ने रिटायरमेंट के बाद 2020 में बीजेपी ज्वाइन की थी. वेलकम तो बढ़िया हुआ. सीधे केरल बीजेपी में उपाध्यक्ष बनाया गया. श्रीलेखा से पहले केरल के दो और एक्स डीजीपी टीपी सेनकुमार और जैकब थॉमस भी बीजेपी में आ चुके हैं. केरल की रहने वाली आर श्रीलेखा ने 26 साल की उम्र में 1987 में आईपीएस सर्विस ज्वाइन करके केरल कैडर ही चुना. आईपीएस बनने से पहले English Literature और Human Resource Management MBA किया था. श्रीलेखा ने लेक्चरर से करियर शुरू किया था. उसके बाद आरबीआई की ग्रेड बी ऑफिसर के लिए सेलेक्शन हुआ. 

IPS रहते हुए ऐसा रहा करियर

1987 में आईपीएस बनने के बाद 33 साल पुलिस यूनिफॉर्म में गुजार दिए. अलग-अलग जिलों की एसपी रहने के अलावा सेंट्रल डेप्युटेशन पर सीबीआई भी ज्वाइन की. पहले सीबीआई की एसपी रहीं, फिर डीआईजी बनीं. दो-दो बार President’s Police Medal for Meritorious Service के लिए चुनी गईं. सीबीआई में पोस्टिंग के दौरान उन्होंने जमकर रेड मारी. इतनी रेड कि उनका निकनेम रेड श्रीलेखा पड़ गया.

करियर में सब कुछ अच्छा होने के बाद भी श्रीलेखा के ये अफसोस रहा कि 2017 में डीजीपी रैंक की आईपीएस तो बनीं लेकिन डीजीपी नहीं बनीं. Fire and Rescue Services Department की डीजीपी पोस्ट से 2020 में रिटायरमेंट हुआ. न जाने क्या बात थी कि इतनी बड़ी पोजिशन, इतनी लंबी पारी के बाद भी उन्होंने अपना रिटायरमेंट फेयरवेल नहीं होने दिया. रिटायरमेंट के बाद 65 साल की उम्र में राजनीति में आकर नया करियर शुरू किया लेकिन राजनीति की शुरूआत से ही हिचकोले लग रहे हैं. श्रीलेखा के लिए मुश्किल नहीं होगा इसे संभालना. हालांकि उनके पास विधानसभा चुनाव एक और बड़ा मौका बनेगा ब्लॉकबस्टर इनिंग खेलने का.

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