Maharashtra politics: महाराष्ट्र की राजनीति में अक्सर 'दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है' वाली कहानी देखनी को मिलती है, लेकिन इस बार समीकरण कुछ अलग ही देखने को मिले है. जो लोग यह सोचते थे कि भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) और कांग्रेस कभी एक साथ नहीं आ सकती है, वो आज गलत साबित हो गए है. महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव में अंबरनाथ नगर परिषद की सत्ता के लिए बीजेपी ने कांग्रेस से हाथ मिला लिया है और आपस में गठबंधन कर शिवसेना को दूर कर दिया है. इस गठबंधन के साथ वे अंबरनाथ नगर परिषद में स्पष्ट बहुमत की ओर बढ़ते हुए नजर आ रहे है.
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अंबरनाथ नगर परिषद का समीकरण
हाल ही में महाराष्ट्र के 129 शहरों में हुए नगर परिषद चुनावों में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया और मेयर पदों पर कब्जा जमा लिया. अंबरनाथ में भी बीजेपी की तेजश्री करंजुले पाटिल मेयर चुनी गईं. लेकिन असल चुनौती तब सामने आई जब पार्षदों की संख्या की बात आई. अंबरनाथ सीट का समीकरण देखें तो 60 सीटों में 27 सीटें एकनाथ सिंदे गुट(शिवसेना) को मिली, जिससे वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. वहीं बीजेपी को 14 सीटें, कांग्रेस को 12 सीटें, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी(अजित पवार गुट) के 4 सीटें और अन्य की 2 सीटें मिलें. इन समीकरणों को देखा जाएं तो बीजेपी के पास कुल 32 पार्षदों के समर्थन के साथ ही स्पष्ट बहुमत है.
शिंदे गुट ने बताया विश्वासघात
अंबरनाथ में बीजेपी और कांग्रेस के गठबंधन के बाद शिवसेना में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है. एकनाथ शिंद के पार्टी के विधायक डॉक्टर बालाजी किनीकर ने बीजेपी-कांग्रेस के गठबंधन को विश्वासघात बताया है. उन्होंने कहा कि, कांग्रेस-मुक्त भारत का नारा देनी वाली बीजेपी अब खुद कांग्रेस को मजबूत कर रही है. यह पीठ में छुरा घोंपने वाली जैसी बात है.
बीजेपी ने किया पलटवार
वहीं बीजेपी ने शिंदे गुट के आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है. बीजेपी नेता अभिजीत करंजुले पाटिल ने कहा है कि, पिछले 25 सालों से अंबरनाथ नगर परिषद में शिवसेना ने भारी भ्रष्टाचार किया है. हमारी लड़ाई उस भ्रष्टाचार और कुशासन के खिलाफ है. शहर के विकास के लिए हमने भ्रष्ट ताकतों (शिंदे गुट) को सत्ता से दूर रखने का फैसला किया है.
महायुति के भीतर बढ़ा तनाव
एक ओर जहां बीजेपी-कांग्रेस गठबंधन से अंबरनाथ नगर परिषद की सत्ता का रास्ता साफ दिखाई दे रहा है, तो वहीं दूसरी ओर महायुति के भीतर तनाव बढ़ रहा है. अंबरनाथ में यह गठबंधन अभद्र, अनैतिक या फिर राजनीतिक मजबूरी है इसे लेकर खूब आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे है. वहीं इस गठबंधन को लेकर कांग्रेस के शहर अध्यक्ष प्रदीप पाटिल से बात करने की कोशिश भी की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया है.
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