मुंबई का मुस्लिम वोटर किसके साथ? सर्वे में कांग्रेस ने मारी बाजी, ठाकरे गुट और महायुति को लगा बड़ा झटका!

BMC Election Survey 2026: BMC चुनाव 2026 से पहले Ascendia सर्वे ने सियासी समीकरण हिला दिए हैं. सर्वे के मुताबिक मुस्लिम वोटर सबसे ज्यादा कांग्रेस की ओर झुकता दिख रहा है, जिससे ठाकरे गुट और महायुति को बड़ा झटका लग सकता है. मराठी वोटों में भी जबरदस्त उलटफेर सामने आया है. जानिए मुस्लिम और मराठी वोट बैंक का पूरा गणित, कांग्रेस की रणनीति, ठाकरे बंधुओं का असर और BMC चुनाव में किसे हो सकता है फायदा.

Mumbai BMC election 2026 Survey
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15 जनवरी 2026 को मुंबई में होने वाले बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव को लेकर राजनीतिक पारा अपने चरम पर है. इस चुनाव में बीजेपी-शिवसेना के अलावा कांग्रेस ने भी अलग रणनीति अपनाई है. पार्टी ने खुद से चुनाव लड़ने का फैसला किया है. इसी बीच Ascendia ने एक सर्वे किया, जिसमें कांग्रेस को कई मोर्चों पर बढ़त मिलते हुई दिखाई दे रही है. जहां एक तरफ शिवसेना के दोनों गुट और बीजेपी अपनी जमीन बचाने में लगे हुए है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस मुस्लिम वोट बैंक के सहारे एक बड़ी छलांग लगाती दिख रही है. आइए विस्तार से समझते हैं पूरी कहानी.

BMC चुनाव में मुस्लिम किसे देंगे वोट?

Ascendia के इस ताजा सर्वे के मुताबिक मुस्लिम वोटर्स का रुझान कांग्रेस पार्टी की ओर सबसे ज्यादा है. सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक BMC चुनाव में 41% मुस्लिम कांग्रेस को वोट कर सकते है. इसके अलावा शिवसेना(UBT+MNS) के खाते में 28%, BJP-शिवसेना(शिंदे)के खाते में 11% और अन्य(SP,AIMIM) के खाते में 20% वोट पड़ सकते है.

BMC चुनाव में मराठी किसे देंगे वोट?

वहीं मराठी वोट बैंक में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है. सर्वे के मुताबिक शिवसेना(UBT+MNS) को सबसे ज्यादा 44% मराठी समर्थन दे रहे हैं, तो BJP-शिवसेना(शिंदे) को 42% समर्थन मिलते दिखाई दे रहा है. इसके अलावा कांग्रेस को 4% और अन्य को 11% मराठी का समर्थन मिल सकता है.

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5 बातें जो मुंबई की राजनीति बदल सकती है

1. मुस्लिम वोट बैंक का 'पावर गेम' और कांग्रेस की वापसी

सर्वे के अनुसार, मुंबई का मुस्लिम वोटर अब गठबंधन के बजाय सीधे तौर पर कांग्रेस पर भरोसा जताता दिख रहा है क्योंकि सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि मुस्लिम समाज के 41% वोट सीधे कांग्रेस की झोली में जा सकते हैं. विधानसभा चुनाव में जो मुस्लिम वोट महाविकास अघाड़ी (MVA) के पास एकमुश्त (72%) था, वह अब बंट गया है. उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के साथ आने के बावजूद इस गठबंधन को केवल 28% मुस्लिम वोट मिलने की उम्मीद है.

2. 'असली शिवसेना' की जंग का फायदा

मुंबई की जनता के बीच एक बड़ा सवाल था कि 'असली शिवसेना' कौन है? सर्वे में सामने आया कि मराठी वोटर अभी भी शिवसेना (UBT) को ही असली शिवसेना मान रहे हैं. इसका सीधा असर यह हुआ है कि मराठी वोटों में बीजेपी-शिंदे गठबंधन की 24% की लीड अब खत्म हो गई है. अब 44% मराठी वोट ठाकरे बंधुओं के पक्ष में दिख रहे हैं, जबकि महायुति 42% पर सिमट गई है.

3. महायुति (BJP-शिंदे) के लिए खतरे की घंटी

बीजेपी और एकनाथ शिंदे के गठबंधन के लिए सबसे बड़ी चिंता मराठी वोटों का खिसकना है. रिपोर्ट के अनुसार, मराठी समाज मुंबई की आबादी का 40% हिस्सा है. यहां महायुति को करीब 10% वोट शेयर का नुकसान होता दिख रहा है. हालांकि, गैर-मराठी और उत्तर भारतीय वोटरों के बीच बीजेपी अभी भी 53% समर्थन के साथ मजबूत बनी हुई है.

4. ठाकरे बंधुओं का साथ आना: फायदा या नुकसान?

उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के समर्थकों के लिए यह खबर मिली-जुली है. एक तरफ जहां वे मराठी वोटों को एकजुट करने में सफल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम वोटों का एक बड़ा हिस्सा (जो पहले उद्धव ठाकरे के साथ था) अब कांग्रेस की तरफ शिफ्ट हो गया है. सर्वे के मुताबिक मुस्लिम वोटों में ठाकरे गुट की लीड 35% तक कम हो गई है.

5. क्या कांग्रेस बनेगी किंगमेकर?

सर्वे का सार यह है कि अगर कांग्रेस अकेले या मजबूती से चुनाव लड़ती है, तो वह बीएमसी में किंगमेकर की भूमिका निभा सकती है. मुस्लिम वोटों का 41% हिस्सा कांग्रेस को मिलना उसे मुंबई की कई सीटों पर जीत की दहलीज तक ले जा सकता है.

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