राहुल गांधी के पत्र के बाद झुकी महाराष्ट्र सरकार, मान ली गई छात्रों की मांग! जानिए विवाद की पूरी कहानी

राजू झा

• 01:27 PM • 27 Aug 2026

Maharashtra Tribal Hostel Row: महाराष्ट्र के पुणे स्थित सरकारी आदिवासी छात्रावासों के नियमों और सुविधाओं को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगें आखिरकार सरकार ने मान ली हैं. राहुल गांधी द्वारा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखने के तीन दिन बाद 30 साल की उम्र सीमा वाले विवादित नियम को वापस ले लिया गया. जानिए क्या था पूरा विवाद.

Pune Tribal Hostel Protest
राहुल गांधी के पत्र के बाद बैकफुट पर आई महाराष्ट्र सरकार!
Google CTA

महाराष्ट्र में पुणे स्थित सरकारी आदिवासी छात्रावासों के नियमों और सुविधाओं के खिलाफ पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों को राज्य सरकार ने स्वीकार कर लिया है. लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा 24 अगस्त को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लिखे गए पत्र के तीन दिनों के भीतर ही महाराष्ट्र सरकार ने 30 वर्ष की उम्र सीमा वाले विवादित नियम को वापस ले लिया है. इस फैसले के सामने आने के बाद कांग्रेस ने दावा किया है कि विपक्ष के दबाव और राहुल गांधी के हस्तक्षेप के कारण सरकार को अपना निर्णय बदलने पर मजबूर होना पड़ा.

Read more!

राहुल गांधी के पत्र में उठाए गए थे गंभीर मुद्दे

पुणे के सरकारी आदिवासी छात्रावासों में रहने वाले छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल राहुल गांधी से निजी तौर पर मिला था और उन्हें अपनी 11 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा था. इसके बाद 24 अगस्त को राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र भेजकर छात्रों की समस्याओं से अवगत कराया. राहुल गांधी ने अपने पत्र में उल्लेख किया था कि दूर-दराज के आदिवासी इलाकों से आने वाले छात्र शहरों में पढ़ाई के लिए पूरी तरह से इन सरकारी हॉस्टलों पर आश्रित रहते हैं.

नए नियमों के लागू होने से 30 वर्ष से अधिक उम्र के ऐसे छात्र प्रभावित हो रहे थे जो अभी भी अपनी शिक्षा पूरी कर रहे हैं या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने छात्राओं की लंबी अनुपस्थिति के बाद लौटने पर प्रेगनेंसी टेस्ट जैसी मेडिकल जांच कराने के नियम पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी और इसे छात्राओं की गरिमा पर हमला करार दिया था.

महाराष्ट्र सरकार ने वापस लिए नियम, कांग्रेस ने साधा निशाना

इस मामले में आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके ने जानकारी दी है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मंजूरी के बाद 14 अगस्त के सरकारी प्रस्ताव और उससे जुड़े संशोधित नियमों को वापस ले लिया गया है. वहीं, सरकार के इस कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनाव प्रचार के समय ही कहा था कि वे सरकार से अपनी बात मनवा सकते हैं. उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा उठाए गए जनहित के मुद्दों पर कार्रवाई करने के लिए सरकार मजबूर हुई है और 30 साल की उम्र सीमा का नियम खत्म होने का श्रेय राहुल गांधी के निरंतर प्रयासों को जाता है.

परीक्षा रद्द होने पर क्या बोले राहुल गांधी?

इस बीच महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की ड्रग्स इंस्पेक्टर परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया को रद्द किए जाने के फैसले पर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि यह सरकार की कोई मेहरबानी नहीं है, बल्कि उन छात्रों के संघर्ष और धैर्य की जीत है जो मार्च में पेपर लीक होने के बाद से लगातार डटे रहे. राहुल गांधी ने छात्रों का हौसला बढ़ाते हुए आगे कहा कि एक परीक्षा का रद्द होना जीत तो है लेकिन पूर्ण न्याय नहीं है. जब तक पेपर लीक कराने वालों को सजा नहीं मिल जाती, तब तक यह लड़ाई अधूरी है और वे छात्रों के साथ हर कदम पर खड़े रहेंगे ताकि पूरी व्यवस्था को सुधारा जा सके.

छात्रों की 11 सूत्रीय प्रमुख मांगें

पुणे में 13 दिनों तक चले इस विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने अपने ज्ञापन में शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार से जुड़ी 11 सूत्रीय मांगें रखी थीं. छात्रों ने हॉस्टल में प्रवेश की उम्र सीमा 30 साल से बढ़ाकर 36 साल करने की मांग की थी. इसके अलावा, फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर आरक्षित पदों (95,000 पद) पर नौकरी पाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार पेंडिंग भर्तियों को तुरंत लागू करने और हॉस्टल में किसी छात्र की दुर्घटना में मौत या दिव्यांगता पर मुआवजा देने जैसी मांगें प्रमुखता से शामिल थीं.

यहां देखें वीडियो

पुणे के बाद अब नागपुर में गूंजेगी छात्रों की आवाज! महाराष्ट्र में एक्टिव हुए राहुल गांधी, जल्द करेंगे 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम