Manipur Election 2027: मणिपुर में BJP और कांग्रेस के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई ! रुद्र रिसर्च की ग्राउंड रिपोर्ट जानें क्या है हाल

न्यूज तक डेस्क

09 Jul 2026 (अपडेटेड: Jul 9 2026 8:59 PM)

मणिपुर चुनाव 2027 से पहले BJP और कांग्रेस के बीच सियासी मुकाबला तेज है. रुद्र रिसर्च की ग्राउंड रिपोर्ट में जानें जातीय समीकरण, चुनावी मुद्दे और किस दल की स्थिति मजबूत दिख रही है.

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मणिपुर में किस पार्टी के सामने कौन सी चुनौतियां ? कौन वहां के लोगों का जीतेगा दिल ? पढ़ें रुद्र रिसर्च एंड एनालिटिक्स की विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट में.
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पूर्वोत्तर भारत की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले मणिपुर में 2027 के विधानसभा चुनाव की राजनीतिक तैयारियां धीरे-धीरे गति पकड़ रही हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव के अनुसार राज्य में कुल 20 लाख 51 हजार 357 मतदाता हैं तथा 60 विधानसभा क्षेत्र हैं. 2022 में पहली बार स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में आई भाजपा के सामने सत्ता बरकरार रखने की चुनौती होगी, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों सीटें जीतने के बाद कांग्रेस ने वापसी के प्रयास तेज कर दिए हैं. 

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राष्ट्रीय पार्टी NPP (National People's Party), नागा बहुल क्षेत्रों में प्रभावी NPF (Naga People's Front), 2023 के बाद हुए जातीय संघर्ष के प्रभाव, बदलते सामाजिक-राजनीतिक समीकरण, संभावित गठबंधन, निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका तथा विभिन्न सामाजिक वर्गों के रुझान को देखते हुए आगामी विधानसभा चुनाव बेहद रोचक होने की संभावना है. राजनीतिक विश्लेषण, चुनावी रुझानों का अध्ययन और चुनाव के पहले व बाद में सर्वेक्षण करने वाली पुणे की संस्था रुद्र रिसर्च एंड एनालिटिक्स ने मणिपुर की वर्तमान राजनीतिक स्थिति, दलों की रणनीति, सामाजिक समीकरण, पिछले चुनावी परिणाम विश्लेषण तथा प्रमुख चुनावी मुद्दों के आधार पर यह विश्लेषणात्मक रिपोर्ट तैयार की है. 

मणिपुर विधानसभा चुनाव 2022 का परिणाम और एनॉलिसिस 

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा मणिपुर के राजनीतिक इतिहास में अपने दम पर स्पष्ट बहुमत हासिल करने वाली दूसरी पार्टी बनी. भाजपा ने 32 सीटें जीतीं. कांग्रेस को 5, NPP को 7, NPF को 5, JD(U) को 6, KPA (Kuki People's Alliance) को 2 तथा अन्य उम्मीदवारों को 3 सीटें मिलीं. भाजपा की जीत के पीछे विकास, शांति, पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह का नेतृत्व, केंद्र सरकार के साथ समन्वय, मजबूत संगठन, प्रभावी उम्मीदवार चयन तथा बेहतर चुनावी प्रबंधन प्रमुख कारण रहे. वहीं कांग्रेस को दल-बदल, संगठनात्मक कमजोरी, नेतृत्व की सीमाएं तथा विपक्षी मतों के विभाजन (कांग्रेस, NPP, JD(U), NPF और अन्य दलों द्वारा अलग-अलग चुनाव लड़ना) का नुकसान उठाना पड़ा. इन सभी कारणों से भाजपा पहली बार अपने दम पर स्पष्ट बहुमत हासिल करने में सफल रही. 

लोकसभा चुनाव 2024 का परिणाम और एनॉलिसिस 

2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस द्वारा मणिपुर की दोनों सीटें जीतने के पीछे 2023 के बाद हुए जातीय हिंसक संघर्ष का प्रभाव, शांति एवं कानून-व्यवस्था को लेकर बनी अनिश्चितता, सत्तारूढ़ दल के प्रति असंतोष, कांग्रेस की उम्मीदवार चयन प्रक्रिया तथा विभिन्न सामाजिक वर्गों का समर्थन प्रमुख कारण माने जाते हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और NPF को मिलाकर 46% मत मिले थे. इसके मुकाबले 2024 के लोकसभा चुनाव में NPP के NDA को समर्थन देने के बावजूद NDA को 36% मत मिले. दूसरी ओर, कांग्रेस का मत प्रतिशत 2022 के 17% से बढ़कर 2024 में 46% तक पहुंच गया.

मणिपुर का जातीय समीकरण और राजनीतिक रुझान 

मणिपुर के जातीय समीकरण के अनुसार राज्य में लगभग मैतेई 51%, नागा (ST) 23%, कुकी-जो (ST) 14%, मैतेई पांगल (मणिपुरी मुस्लिम) 9% तथा अन्य 3% आबादी है. राज्य की राजनीति मुख्य रूप से इन्हीं चार प्रमुख सामाजिक वर्गों के इर्द-गिर्द घूमती है. मैतेई समाज इंफाल घाटी का सबसे बड़ा सामाजिक वर्ग है, जहां भाजपा का पारंपरिक प्रभाव रहा है. नागा समाज में NPF, NPP तथा अन्य क्षेत्रीय दल प्रभावी हैं, जबकि कुकी-जो समाज में KPA और कांग्रेस का अपेक्षाकृत प्रभाव दिखाई देता है. मैतेई पांगल समाज का पारंपरिक समर्थन कांग्रेस को मिलता रहा है.

मणिपुर चुनाव का वैली-हिल्स फैक्टर 

मणिपुर की राजनीति मुख्य रूप से इंफाल वैली और पहाड़ी (हिल) क्षेत्रों के भौगोलिक एवं सामाजिक विभाजन पर आधारित है. 40 विधानसभा क्षेत्रों वाली इंफाल वैली सरकार गठन के लिए निर्णायक मानी जाती है और यहां भाजपा का अपेक्षाकृत मजबूत प्रभाव है. वहीं नागा, कुकी-जो तथा अन्य जनजातीय बहुल हिल क्षेत्रों में NPF, NPP, कांग्रेस तथा अन्य स्थानीय दल प्रभावी हैं. वैली क्षेत्र में विकास, रोजगार और कानून-व्यवस्था प्रमुख मुद्दे हैं, जबकि हिल क्षेत्रों में शांति, पुनर्वास, जनजातीय अधिकार, स्वायत्तता और विकास मुख्य चुनावी मुद्दे हैं. इसलिए 2027 के विधानसभा चुनाव में वैली क्षेत्र का जनाधार और हिल क्षेत्रों के क्षेत्रीय दलों की भूमिका सत्ता के समीकरण तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है. 

आगामी विधानसभा चुनाव के लिए संभावित गठबंधन 

2027 के मणिपुर विधानसभा चुनाव में संभावित गठबंधन और सीटों का बंटवारा परिणामों पर निर्णायक प्रभाव डाल सकता है. अभी तक किसी भी दल ने आधिकारिक रूप से चुनाव पूर्व गठबंधन की घोषणा नहीं की है, लेकिन भाजपा द्वारा NDA के सहयोगी दल NPP, NPF और JD(U) के साथ चुनावी समन्वय की संभावना जताई जा रही है. दूसरी ओर, कांग्रेस INDIA गठबंधन के तहत CPI, CPI(M), Forward Bloc और RSP जैसे वामपंथी दलों के साथ विपक्षी एकजुटता बनाए रखने का प्रयास कर सकती है. वहीं कुकी-जो बहुल क्षेत्रों में KPA तथा पूर्व उपमुख्यमंत्री वाई. जॉयकुमार सिंह के नेतृत्व में सक्रिय PDA (People's Democratic Alliance) जैसे क्षेत्रीय दलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है. 

शांति, विकास और नेतृत्व के दम पर भाजपा की रणनीति 

2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपने दम पर स्पष्ट बहुमत हासिल किया. इसके बाद NPP, NPF, KPA, JD(U) से भाजपा में शामिल हुए विधायकों तथा कुछ निर्दलीय विधायकों के समर्थन से एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार और मजबूत हुई. हालांकि, 2023 के जातीय हिंसक संघर्ष के बाद KPA ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच एन. बीरेन सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया. बाद में 2026 में युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व में भाजपा गठबंधन की सरकार पुनः गठित हुई.

2027 के विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में भाजपा शांति बहाली, विकास कार्यों में तेजी तथा केंद्र-राज्य समन्वय के माध्यम से राज्य को 'डबल इंजन सरकार' का लाभ मिलने का दावा कर रही है. जिरीबाम–इंफाल रेल परियोजना, सड़क विकास, महिलाओं और किसानों के लिए कल्याणकारी योजनाएं, 'Go to Village' एवं 'Go to Hills' अभियान, नशा विरोधी अभियान तथा सीमावर्ती सुरक्षा जैसे मुद्दों से भाजपा को लाभ मिलता दिखाई देता है. मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व में शांति और प्रशासनिक स्थिरता पर जोर दिया जा रहा है, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह का इंफाल वैली में प्रभाव, टी. बिस्वजित सिंह की संगठनात्मक क्षमता तथा प्रदेश अध्यक्ष शारदा देवी के नेतृत्व में बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर पार्टी कार्य कर रही है. 

BJP के लिए चुनौतियां 

हालांकि, 2023 के जातीय संघर्ष के बाद विभिन्न सामाजिक वर्गों का विश्वास दोबारा हासिल करना, सरकार विरोधी नाराजगी कम करना तथा बदले हुए सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों का सामना करना भाजपा के सामने प्रमुख चुनौतियां रह सकती हैं.

संगठन के पुनर्निर्माण पर कांग्रेस का जोर 

2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों सीटें जीतने के बाद कांग्रेस ने 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी के तहत संगठनात्मक पुनर्निर्माण को गति दी है. प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री ओक्रम इबोबी सिंह के नेतृत्व में पार्टी शांति, सामाजिक सौहार्द, विस्थापितों के पुनर्वास, कानून-व्यवस्था और रोजगार जैसे मुद्दों पर जोर दे रही है. कांग्रेस विधायक दल के नेता केशाम मेघचंद्र सिंह, सांसद प्रो. बिमोल अकोइजामऔरआल्फ्रेड कन्नंगम आर्थर, तथा कार्यकारी अध्यक्ष टी. मंगा वैफेई और विक्टर कीशिंग के माध्यम से पार्टी संगठन विस्तार और जनसंपर्क बढ़ाने का प्रयास कर रही है. 

कांग्रेस के लिए चुनौतियां 

हालांकि, 2022 में खोए हुए जनाधार को दोबारा हासिल करना, 2024 के लोकसभा चुनाव की सफलता को विधानसभा चुनाव में परिवर्तित करना, वैली और हिल्स दोनों क्षेत्रों के साथ-साथ मैतेई, नागा, कुकी-जो और पांगल समाज में संतुलित जनाधार तैयार करना, बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करना, क्षेत्रीय दलों के कारण संभावित मत विभाजन को रोकना तथा भाजपा की मजबूत संगठनात्मक मशीनरी का प्रभावी मुकाबला करना कांग्रेस के सामने प्रमुख राजनीतिक चुनौतियां रह सकती हैं. 

NPF और NPP की भूमिका सत्ता का समीकरण तय कर सकती है 

मणिपुर की राजनीति में NPP और NPF दो महत्वपूर्ण दल माने जाते हैं. NPP में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इरेंगबाम हेमोचंद्र सिंह जैसे वरिष्ठ नेता संगठन विस्तार और पार्टी को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं, जबकि शेख नुरुल हसन पार्टी के प्रभावशाली विधायक के रूप में पहचाने जाते हैं. दूसरी ओर, NPF में उपमुख्यमंत्री लोसीई दिखो और प्रदेश अध्यक्ष अवांगबो न्यूमैनागा बहुल क्षेत्रों के प्रभावशाली नेता माने जाते हैं. आगामी विधानसभा चुनाव में दोनों दल NDA के साथ समन्वय बनाए रखते हुए अपना क्षेत्रीय जनाधार मजबूत करने का प्रयास करते दिखाई देते हैं. विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों के नागा और अन्य जनजातीय मतदाताओं के बीच इन दोनों दलों का प्रभाव चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है. 

निष्कर्ष 

मणिपुर में वर्तमान में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार, केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय, पार्टी का मजबूत संगठन, मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह का नेतृत्व, पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह का प्रभाव, विकास एवं शांति बहाली का एजेंडा तथा सरकार में NPP और NPF की भागीदारी के कारण भाजपा कुछ हद तक बढ़त में दिखाई देती है. हालांकि, 2023 के बाद हुए मैतेई–कुकी-जो जातीय संघर्ष के प्रभाव, 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की सफलता, पूर्व मुख्यमंत्री ओक्रम इबोबी सिंह का नेतृत्व, शांति एवं पुनर्वास के मुद्दे तथा सरकार विरोधी नाराजगी इसकी वजह से वर्तमान स्थिती में भाजप और कांग्रेस के बिच में कांटे की टक्कर दिख रही है. इसके अलावा मैतेई, नागा, कुकी-जो और पांगल समाज के मतदान का रुझान, NPP, NPF, PDA, KPA तथा अन्य क्षेत्रीय दलों की संभावित भूमिका, चुनाव पूर्व संभावित गठबंधन और मतों का विभाजन 2027 के विधानसभा चुनाव की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. 

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