Tamil Nadu politics: 13 साल की उम्र से राजनीति में सक्रिय स्टालिन अब 73 साल के हो चुके हैं. उन्होंने अपने पिता की तरह ही अपने बेटे उदयनिधि को भी राजनीति में आगे बढ़ाया. लेकिन जहां करुणानिधि स्टालिन के प्रति इतने सख्त नहीं थे, वहीं स्टालिन अपने बेटे के मामले में ज्यादा कड़े नजर आ रहे हैं. डीएमके में टिकट बांटने की प्रक्रिया में स्टालिन खुद उम्मीदवारों का इंटरव्यू ले रहे हैं. उनके साथ टीआर बालू समेत चार और पार्टी नेता मौजूद रहते हैं. खास बात यह है कि टिकट उदयनिधि को भी मिलना तय है, लेकिन इसके बावजूद स्टालिन ने अपने बेटे को भी बाकी उम्मीदवारों की तरह लाइन में खड़ा कर दिया है.
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इंटरव्यू की वायरल तस्वीर और सियासी संदेश
सोशल मीडिया में खूब वायरल है उदयनिधि की फोटो जिसमें ट्राउजर-टीशर्ट और स्लीपर पहनकर इंटरव्यू देते दिख रहे हैं. चेन्नई में पार्टी मुख्यालय 'अन्ना अरिवलयम' का बड़ा सा हॉल जिसमें उदयनिधि के सामने स्टालिन की कैंडिडेट सेलेक्शन टीम बैठी है. पार्टी ने प्रोसेस बनाया है तो उदयनिधि स्टालिन को भी प्रोसेस का हिस्सा बनना पड़ा. चेपॉक-तिरुवल्लिकेनी सीट के लिए फिर से टिकट पाने के लिए इंटरव्यू देकर टिकट मांगना पड़ा. पूछा गया उनके इलाके में वोटर कितने हैं, पिछले चुनावों में हार-जीत का मार्जिन क्या रहा, विधायक के तौर क्या काम किया. सबसे बड़ी बात ये कि इंटरव्यू के बाद ऑन द स्पॉट कन्फर्म नहीं किया कि टिकट मिलेगा या नहीं. कहा गया कि जैसे होगा आपको बताया जाएगा.
दिखावा या मेरिट आधारित राजनीति?
वैसे तो कोई भी देखेगा तो कहेगा कि ये सब दिखावा नहीं तो और क्या है. उदयनिधि न केवल स्टालिन के बेटे हैं बल्कि सरकार के डिप्टी सीएम भी हैं. उनका टिकट क्यों ही रोका जाएगा. सवाल ये है कि उन्हें इस प्रोसेस से गुजरना ही क्यों पड़ा. किसी पार्टी में इतने बड़े नेता को टिकट के लिए ऐसे संकोच के साथ बैठे नहीं देखा गया ताकि इंटरव्यू अच्छा जाए और सेलेक्शन पैनल पर इंप्रेशन अच्छा पड़े.
फोटो के पीछे का पॉलिटिकल मैसेज
सोशल मीडिया पर फोटो इसलिए चर्चा में है क्योंकि इसमें उदयनिधि एक सामान्य पार्टी कार्यकर्ता की तरह सीएम पिता के सामने खड़े होकर अपना पक्ष रख रहे हैं. पार्टी फोटो के जरिए ये मैसेज देने की कोशिश कर रही है कि टिकट बांटने में सभी के लिए Merit-based selection अपनाया जा रहा है, चाहे नो परिवार का सदस्य ही क्यों न हो.
AIIMS की ईंट से शुरू हुआ टर्निंग प्वाइंट
2015 में केंद्र सरकार ने मदुरै में AIIMS बनाने का ऐलान किया था. 2019 तक चुनाव आ गए थे, लेकिन वहां सिर्फ एक चारदीवारी बनी थी. पीएम मोदी ने Foundation Stone रखा लेकिन एम्स बनने का काम आगे नहीं बढ़ा. डीएमके ने इसे बीजेपी के खिलाफ हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया. उसी चुनाव में स्टालिन ने उदयनिधि का पहली बार जमकर इस्तेमाल किया. 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान, उदयनिधि मदुरै के पास चुनाव प्रचार कर रहे थे. उन्होंने अचानक एक लाल ईंट उठाई जिस पर AIIMS लिखा था.
ईंट वाला कैंपेन और सियासी असर
उठाई गई ईंट सरकारी थी. उन्होंने भीड़ के सामने ईंट लहराते हुए हुंकार भरी कि मैं मदुरै से चोरी करके लाया हूं. केंद्र सरकार ने तमिलनाडु को जो AIIMS दिया था, वो बस यही एक ईंट है. वही ईंट उठाना उदयनिधि के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. बीजेपी और मोदी को ललकारते उदयनिधि का वीडियो रातों-रात पूरे तमिलनाडु में वायरल हो गया.
ईंट बना चुनावी हथियार
आगे उदयनिधि ने अपनी हर रैली में वह ईंट ले जाना शुरू कर दिया. इस मैसेज के साथ कि बीजेपी और AIADMK ने तमिलनाडु के साथ धोखा किया है और विकास के नाम पर सिर्फ एक ईंट दी है. जनता, खासकर युवाओं को ये बात चुभ गई. ईंट वाले कैंपेन' ने DMK अलायंस को इतनी मजबूती दी कि उन्होंने तमिलनाडु की 39 में से 38 सीटें जीत लीं. उदयनिधि, जो तब तक सिर्फ एक स्टार प्रचारक थे, पार्टी के सबसे बड़े क्राउड पुलर बन गए.
2021 चुनाव और बीजेपी को जवाब
2021 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने इसी ईंट का इस्तेमाल किया. बीजेपी ने उन पर चोरी का मामला दर्ज कराने की धमकी दी, जिस पर उदयनिधि ने पलटवार किया. अगर ये ईंट चोरी की है तो जाओ और मदुरै में AIIMS ढूंढ कर दिखाओ, वहां तो कुछ है ही नहीं!
एक ईंट से बनी पहचान
एक ईंट ने उदयनिधि की अन्याय के खिलाफ लड़ने वाले नौजवान की इमेज बना दी. साबित किया कि राजनीति में भारी-भरकम भाषणों से ज्यादा एक 'छोटा सा सिंबल' लोगों के दिलों में उतर सकता है. आज भी तमिलनाडु की राजनीति में उस 'ईंट' को उदयनिधि के सबसे सफल 'पॉलिटिकल स्टंट' के रूप में याद किया जाता है. अब सवाल ये है कि क्या 2026 का चुनाव जीतने के लिए क्या फिर से उदयनिधि फिर से वही ईंट उठाकर बीजेपी पर हमला करेंगे. इस चुनाव में बीजेपी पहले से कहीं ज्यादा तैयारी और आक्रामक होकर उतर रही है. उदयनिधि के लिए अच्छा ये है कि मदुरै एम्स आज भी पूरी तरह बनकर तैयार नहीं हुआ है, लेकिन काम पहले से ज्यादा गति में है.
चुनावी जीत से मंत्री और राष्ट्रीय पहचान तक
2019 के चुनावों में एक 'ईंट' को हथियार बनाकर उन्होंने जो राजनीतिक पारी शुरू की, उसने उन्हें रातों-रात जनता का चहेता बना दिया. 2021 के विधानसभा चुनाव में चेपॉक-तिरुवल्लिकेनी सीट से भारी जीत हासिल करके उन्होंने अपनी पहली चुनावी परीक्षा पास की. इसके बाद, उन्हें खेल और युवा कल्याण मंत्री बनाया गया. सबसे विवादास्पद और चर्चा वाला मोड़ 'सनातन धर्म' पर दिया गया बयान था, जिसने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई. इमेज बनाई कि आगे वही हैं जिनके पास बीजेपी से निपटने का हुनर है.
डिप्टी सीएम बनकर बढ़ा कद
पिता का भरोसा बढ़त गया. सितंबर 2024 में उन्हें तमिलनाडु का डिप्टी सीएम बनाकर स्टालिन ने साबित कर दिया कि द्रविड़ साम्राज्य की अगली कमान अब अधिकारिक तौर पर 'उदय' के हाथों में है.
फेज वाइज पॉलिटिकल ट्रेनिंग
एमके स्टालिन 72 साल के हैं. राजनीति में 70-72 की उम्र रिटायरमेंट की ओर नहीं ले जाती लेकिन स्टालिन ने पिता की तरह अपने उदयनिधि को पॉलिटिकल ट्रेनिंग देते हुए फेज वाइज मैनर में आगे बढ़ाया. 2022 में पहली बार चुनाव लड़ाया. 2023 में डिप्टी सीएम बनाकर संकेत दिया कि डीएमके का भविष्य उदयनिधि के ही हाथों में होगा. चुनाव से पहले उन्होंने कतई संकेत नहीं दिया कि जीतने पर सरकार उदयनिधि संभालेंगे या नहीं.
क्या उदयनिधि बनेंगे अगला सीएम?
राजनीति में वंशवाद नया नहीं है लेकिन दादा-पिता की वंशवादी राजनीति को आगे बढ़ाना का दमखम तब दिखता है जब जमीन पर उतरना पड़ा. इस बात की बहुत चर्चा है कि अगर डीएमके की सत्ता में वापसी हुई तो उदयनिधि को सीएम की कमान सौंपकर मार्गदर्शक बन सकते हैं स्टालिन.
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