क्या मोदी सरकार बिना विपक्ष के पास करा पाएगी परिसीमन और महिला आरक्षण बिल? समझिए लोकसभा और राज्यसभा में बहुमत का पूरा गणित

परिसीमन और महिला आरक्षण बिल को पास कराने के लिए मोदी सरकार को चाहिए 2/3 बहुमत. जानें लोकसभा और राज्यसभा में सीटों का पूरा गणित और क्यों विपक्ष का साथ है जरूरी.

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प्रतीकात्मक तस्वीर: AI

राजू झा

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केंद्र सरकार द्वारा बुलाए गए विशेष सत्र में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में संशोधन और परिसीमन (Delimitation) को लेकर चर्चा तेज है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सरकार के पास इस ऐतिहासिक बदलाव को लागू करने के लिए जरूरी जादुई आंकड़ा मौजूद है? चूंकि यह एक सामान्य विधेयक नहीं बल्कि संविधान संशोधन है, इसलिए इसे पास कराने की राह आसान नहीं दिख रही है.

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संविधान संशोधन के लिए क्यों फंस रहा है मामला? 

किसी भी सामान्य बिल को पास कराने के लिए सरकार को केवल 50% बहुमत (272 सीटें) की जरूरत होती है, जो एनडीए के पास मौजूद है, लेकिन संविधान में संशोधन (अनुच्छेद 81 और 82) के लिए दो-तिहाई (2/3) बहुमत की आवश्यकता होती है. इसके लिए दो शर्तें पूरी होनी चाहिए- 

  • सदन के कुल सदस्यों का बहुमत (50% से अधिक). 
  • सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई समर्थन. 

लोकसभा का गणित: 360 का आंकड़ा और एनडीए की ताकत 

लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं (वर्तमान में 540 प्रभावी). संविधान संशोधन के लिए सरकार को कम से कम 360 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी. 

  • एनडीए की वर्तमान स्थिति: लगभग 292 सांसद. 
  • जरूरत: 360+ सांसद. 

यहां सरकार बहुमत से करीब 68 सीटें पीछे है. यही कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी और सरकार लगातार विपक्ष से सहयोग की अपील कर रहे हैं, क्योंकि बिना 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के समर्थन के यह बिल गिर सकता है. 

राज्यसभा में भी राह कठिन 

राज्यसभा में कुल 245 सीटें हैं, जहां बहुमत के लिए 123 सीटें चाहिए होती हैं, लेकिन विशेष बहुमत (2/3) के लिए सरकार को 164 सांसदों का साथ चाहिए. 

एनडीए की स्थिति: लगभग 120-125 सीटें. 

विपक्ष (इंडिया गठबंधन): लगभग 95 सीटें. 
यहां भी सरकार के पास जादुई आंकड़े की कमी है और विपक्षी दल पहले ही इस बिल का विरोध करने का संकेत दे चुके हैं. 

परिसीमन और 2011 की जनगणना का आधार 

सरकार का तर्क है कि 1971 की जनगणना के समय देश की आबादी 54 करोड़ थी, जो अब 140 करोड़ पार कर चुकी है. आबादी ढाई गुना बढ़ने के कारण सीटों का विस्तार (543 से बढ़ाकर 850) जरूरी है. सरकार इसके लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाना चाहती है, जबकि विपक्ष का कहना है कि यह उचित नहीं है और सरकार को नई जनगणना का इंतजार करना चाहिए. 

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