Nitin Gadkari Interview: एथेनॉल मिले पेट्रोल (E20) को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक तरह-तरह के वीडियो वायरल हो रहे हैं. इनमें दावा किया जा रहा है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से गाड़ियां खराब हो रही हैं. खासकर यह कहा जा रहा है कि इससे गाड़ियों के रबर पार्ट्स गल रहे हैं. इन दावों के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी पर भी आरोप लग रहे हैं कि एथेनॉल नीति से उनकी बेटों की कंपनियों को फायदा पहुंच रहा है. अब इन सभी आरोपों और विवादों पर केंद्रीय मंत्री ने 'आज तक' से बातचीत में अपना पक्ष रखा है. आज तक की मैनेजिंग एडिटर श्वेता सिंह के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में नितिन गडकरी ने एथेनॉल, E20 पेट्रोल और अपनी कंपनी से जुड़े आरोपों पर जवाब दिया.
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नितिन गडकरी ने बताया क्यों जरूरी है एथेनॉल?
केंद्रीय मंत्री ने नितिन गडकरी बताया कि वे केवल एथेनॉल ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन, मिथेनॉल और सीएनजी जैसे वैकल्पिक और बायोफ्यूल की बात साल 2004 से कर रहे हैं. इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि हमारे देश में 22 लाख करोड़ रुपये का फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन) इंपोर्ट होता है, जो हमारी ऊर्जा जरूरतों का 87 प्रतिशत है. देश को आत्मनिर्भर बनाने, युवाओं के लिए रोजगार पैदा करने और गांव, गरीब, मजदूर और किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए यह बेहद जरूरी है. इससे देश का किसान सिर्फ अन्नदाता नहीं, बल्कि ऊर्जा दाता, ईंधन दाता और हाइड्रोजन दाता बनेगा.
बेटों की कंपनी को फायदे के आरोपों क्या कहा?
गडकरी ने अपनी बेटों की कंपनियों को फायदा पहुंचाने के आरोपों पर भी जवाब दिया. उन्होंने कहा कि एथेनॉल नीति शुरू होने से पहले ही उन्होंने शुगर फैक्ट्री शुरू की थी, जिसे अब उनके बेटे देखते हैं. देश में कुल 1500 करोड़ लीटर एथेनॉल की खरीदी 550 इंडस्ट्रीज से की जाती है, जो चावल, मक्के, गन्ने के जूस और मोलासेस से इसे बनाते हैं. इस कुल खरीदी में उनकी कंपनी का शेयर 0.07% है. उन्होंने कहा कि वे सिर्फ अल्कोहल बनाते हैं. इसलिए उन्हें इसका कोई अलग से फायदा मिलने का सवाल ही नहीं उठता.
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