राजनीति के शतरंज पर जब शह और मात का खेल शुरू होता है, तो पुरानी फाइलें फिर से जीवित हो जाती हैं. पी. चिदंबरम-वो नाम जिसने दशकों तक भारत की वित्त और गृह नीति की दिशा तय की, आज उन्हीं नीतियों के 'नोट्स' और 'सिग्नेचर' उनके गले की फांस बन गए हैं. क्या पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के खिलाफ फिर से खुला 'पेंडोरा बॉक्स' महज एक कानूनी प्रक्रिया है, या इसके पीछे 2029 की चुनावी बिसात बिछाई जा रही है?
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कहानी शुरू होती है 2019 की उस रात से, जब दिल्ली की सड़कों पर किसी फिल्मी सीन की तरह CBI के अधिकारी चिदंबरम के घर की दीवार फांदकर अंदर घुसे थे. आरोप लगे INX मीडिया और एयरसेल-मैक्सिस सौदों में हेराफेरी के. आरोप था कि विदेशी निवेश की फाइलों पर हस्ताक्षर के बदले करोड़ों की घूस ली गई और शेल कंपनियों का जाल बुना गया. सालों तक यह मामला ठंडे बस्ते में रहा, लेकिन अब ED को मिली 'प्रॉसिक्यूशन सैंक्शन' (मुकदमे की मंजूरी) ने इस ठंडी आग को फिर से भड़का दिया है.
26 फरवरी को मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहुंचा
26 फरवरी 2026 को ED ने वो चाल चली, जिसने इस बरसों पुराने मामले को 'फास्ट-ट्रैक' मोड में डाल दिया है. 26 फरवरी को ED ने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट को बताया किया कि उसे केंद्र सरकार से पी. चिदंबरम के खिलाफ केस चलाने की इजाजत यानी Prosecution Sanction मिल गई है. सुप्रीम कोर्ट के एक नए नियम के बाद ये मंजूरी अनिवार्य थी, जिसके बिना ट्रायल रुका हुआ था. तब से हल्ला मचा है कि अब चिदंबरम पर शिकंजा कसा जाएगा. Prosecution Sanction का मतलब है कि अब कोर्ट सीधे तौर पर चिदंबरम पिता-पुत्र पर केस चला सकता है. इससे पहले पब्लिक सर्वेंट होने के नाते उन्हें कानूनी सुरक्षा मिली हुई थी.
हमेशा की तरह सरकार की साइड ये है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस. कोई भी कानून से ऊपर नहीं, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो. कांग्रेस की लाइन है जांच एजेंसियों का दुरुपयोग. विपक्षी आवाजों को दबाने के लिए पुरानी फाइलों से धूल झाड़ी जा रही है.
चिदंबरम केवल एक नेता नहीं, बल्कि विपक्ष के 'थिंक-टैंक' हैं. उन पर शिकंजा कसने का मतलब है विपक्ष की घेराबंदी करना. तमिलनाडु चुनाव के लिए जब डीएमके और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग फंसी हुई है तब कांग्रेस हाईकमान ने पी चिदंबरम को ड्यूटी पर लगाया स्टालिन से मिलकर मामला सेट करने का.
कौन से हैं वो केस?
दो ऐसे केस, जिन्होंने चिदंबरम साम्राज्य की नींव हिला दी. पहला-INX मीडिया केस. आरोप है कि 2007 में नियम सिर्फ 4 करोड़ रुपये के निवेश के थे, लेकिन चिदंबरम की कलम चली और विदेशी निवेश 300 करोड़ पार कर गया. दूसरा-एयरसेल-मैक्सिस सौदा. जहां 600 करोड़ की सीमा लांघकर 3500 करोड़ की फाइल को बिना कैबिनेट कमेटी की अनुमति के ही हरी झंडी दिखा दी गई.
जांच एजेंसियों के घेरे में आए चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम भी जिनपर द गेटवे टू अप्रूवल यानी मिडिलमैन की भूमिका निभाने का आरोप लगा. एजेंसियों का दावा है कि पिता वित्त मंत्री थे और बेटा 'कंसल्टेंसी' के नाम पर कंपनियों से डील कर रहा था. आरोप है कि विदेशी निवेश की फाइलें तब तक नहीं सरकती थीं, जब तक कार्ति की कंपनियों को 'सलाह शुल्क' नहीं मिल जाता था. क्या यह महज व्यापार था, या फिर सत्ता के रसूख से बुना गया रिश्वत का डिजिटल जाल?"
अब सवाल है कि आगे क्या?
ED की इस कार्रवाई के बाद तीन बड़ी चीजें होने वाली हैं. अब कोर्ट में सुनवाई की रफ्तार 'बुलेट ट्रेन' की तरह होगी. फाइलों पर धूल नहीं, बल्कि गवाहों के बयान जैसे इंद्राणी मुखर्जी के दर्ज होंगे. राउज एवेन्यू कोर्ट में आरोप तय होंगे. फास्ट ट्रैक सुनवाई होगी और फास्ट ट्रैक फैसला भी होगा. जो फाइलों के एक्सपर्ट थे, उन्होंने ही फाइलों में ऐसे लूपहोल छोड़े जिससे उनके परिवार को फायदा हुआ.
केस या सियासी रंजिश?
ये सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि दो कद्दावर नेताओं के बीच की वो 'सियासी रंजिश' है जिसकी जड़ें 2010 के गुजरात एनकाउंटर केस में छिपी हैं. एक ने 'तड़ीपारी' झेली, तो दूसरे को 'तिहाड़' जाना पड़ा. अमित शाह और पी. चिदंबरम की 'अदावत' भारतीय राजनीति की सबसे चर्चित और 'पर्सनल' मानी जाने वाली लड़ाइयों में से एक है. राजनीतिक गलियारों में इसे "हिसाब बराबर करने" (Settling Scores) के एंगल से देखा जाता है.
2010 में, जब पी. चिदंबरम देश के गृह मंत्री थे, तब सीबीआई (CBI) ने सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस में अमित शाह (जो तब गुजरात के गृह राज्य मंत्री थे) को गिरफ्तार किया था. अमित शाह को न केवल जेल जाना पड़ा, बल्कि उन्हें गुजरात से तड़ीपार भी कर दिया गया था. शाह ने हमेशा आरोप लगाया कि चिदंबरम ने उनके खिलाफ 'राजनीतिक साजिश' रची और एजेंसियों का दुरुपयोग किया.
9 साल बाद, 2019 में जब अमित शाह देश के गृह मंत्री बने, तो उसके कुछ ही महीनों के भीतर पी. चिदंबरम को INX मीडिया केस में गिरफ्तार किया. सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा आम थी कि "वक़्त का पहिया घूम गया है." जिस CBI ने शाह को गिरफ्तार किया था, उसी CBI के अधिकारी चिदंबरम के घर की दीवार फांदकर अंदर घुसे थे.
चिदंबरम और कांग्रेस का हमेशा से यह स्टैंड रहा है कि उनके खिलाफ मामले सिर्फ इसलिए खोले गए क्योंकि उन्होंने 2010 में अमित शाह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होने दी थी. अमित शाह के साइड की स्टोरी ये है कि कानून अपना काम कर रहा है. चिदंबरम की गिरफ्तारी उनके कथित भ्रष्टाचार (Corruption) का नतीजा है, न कि किसी व्यक्तिगत रंजिश का.
पी. चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम भारतीय राजनीति में तमिलनाडु के एक शक्तिशाली 'पावर हाउस' के रूप में जाने जाते हैं; जहां पी. चिदंबरम हार्वर्ड से एजुकेटेड हैं जिन्होंने देश के वित्त और गृह मंत्री जैसे सर्वोच्च पदों को संभालते हुए 1997 के 'ड्रीम बजट' और 26/11 के हमले के बाद देश की आंतरिक सुऱक्षा का जिम्मा संभाला. कार्ति चिदंबरम शिवगंगा से मौजूदा कांग्रेस सांसद हैं. अरसे से पिता-पुत्र की जोड़ी अपनी राजनीतिक उपलब्धियों के बजाय INX मीडिया और एयरसेल-मैक्सिस जैसे भ्रष्टाचार के मामलों में ED के कानूनी घेरे में होने के कारण चर्चा में है.
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