दिसंबर 2023 में सत्ता संभालने के बाद से तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी स्विट्ज़रलैंड, अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान समेत 5 बड़े देशों का दौरा कर चुके हैं, लेकिन ऐसा पहली बार है कि जब उनका कोई विदेश दौरा बीच में ही रुक रहा है. रेवंत रेड्डी के तेलंगाना राइजिंग ग्लोबल कैंपेन को केंद्र सरकार से बड़ा झटका लगा है. मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि विदेश मंत्रालय ने राजनीतिक आधार पर सीएम रेवंत रेड्डी को अमेरिका जाने की 'पॉलिटिकल क्लीयरेंस' देने से साफ इनकार कर दिया है. जब केंद्र सरकार ने मना कर दिया तो रेवंत रेड्डी लंदन से एक इंच बाहर कदम नहीं रख पाएंगे. उन्हें केंद्र सरकार के प्रशासनिक निर्णय का सम्मान करना होगा. रेवंत रेड्डी को अपना अमेरिका दौरा छोड़कर 23 अगस्त को वापस देश लौटना पड़ रहा है.
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सदर्न जोनल काउंसिल की बैठक में नहीं पहुंचे रेवंत
तमिलनाडु के महाबलीपुरम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने साउथ के सीएम के साथ सदर्न जोनल काउंसिल की बैठक की लेकिन उसमें रेवंत रेड्डी शामिल नहीं हुए. सीएम रेवंत रेड्डी बैठक से पहले से ही लंदन रवाना हो चुके थे. उनकी अनुपस्थिति में तेलंगाना का प्रतिनिधित्व राज्य के डिप्टी सीएम मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने किया. रेवंत रेड्डी 20 अगस्त को ही 10 दिन के दौरे पर विदेश यात्रा पर निकले थे. पहले यूके गए. फिर अमेरिका जाना था. केंद्र सरकार ने यूके तो जाने दिया लेकिन अमेरिका में उन्हें बोस्टन और न्यूयॉर्क जाने की परमिशन ये कहकर नहीं दी कि राजनीतिक आधार पर अमेरिका जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती है.
तेलंगाना सरकार ने केंद्र पर लगाए गंभीर आरोप
तेलंगाना सरकार का यह भी आरोप है कि राज्य सरकार ने समय रहते 16 अगस्त को ही अनुमति मांगी थी. केंद्र ने जानबूझकर तब तक इंतजार किया जब तक कि सीएम और उनका पूरा डेलिगेशन उड़ान भरकर लंदन नहीं पहुंच गया. डेलिगेशन के लंदन पहुंचने के बाद लिखित में 'पॉलिटिकल एंगल' से मना करना यह दर्शाता है कि यह फैसला प्रशासनिक नहीं, बल्कि जानबूझकर मानसिक और कूटनीतिक दबाव बनाने के लिए लिया गया राजनीतिक फैसला है.
रेवंत रेड्डी ने केंद्र के रवैये को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
केंद्र सरकार के इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए सीएम रेवंत रेड्डी ने कहा कि ज्यादातर नेता अपने बच्चों को विदेश भेजना चाहते हैं, लेकिन मैं दुनिया के बेहतरीन संस्थानों को भारत और हैदराबाद लाना चाहता था ताकि आम युवाओं को यहीं वर्ल्ड-क्लास डिग्री मिल सके. उन्होंने केंद्र के इस रवैये को दुर्भाग्यपूर्ण बताया, हालांकि विदेश मंत्रालय ने अधिकारियों के अमेरिका जाने से नहीं रोका है. सिर्फ सीएम रेवंत रेड्डी नहीं जाएंगे. उनका साथ गए अधिकारियों का डेलिगेशन अमेरिका जाकर संस्थानों के साथ एमओयू (MoUs) की प्रक्रिया पूरी कर सकता है.
'छोटी राजनीति' पर रेवंत रेड्डी का निशाना
रेवंत रेड्डी ने सीधे तौर पर केंद्र सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए इसे 'छोटी राजनीति' करार दिया है. उन्होंने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि "जब बात राष्ट्र-निर्माण और देश के युवाओं के भविष्य की हो, तो राजनीति और चुनावी दुश्मनी से ऊपर उठकर सोचना चाहिए. यात्रा कोई राजनीतिक या निजी छुट्टी नहीं थी, बल्कि केंद्र की अपनी 'नई शिक्षा नीति' (NEP) को जमीन पर उतारने का एक प्रयास था.
विदेश यात्रा के लिए सीएम को क्यों चाहिए मंजूरी?
रेवंत रेड्डी या कोई भी सीएम अपने राज्य में सर्वशक्तिशाली हो सकते हैं लेकिन केंद्र सरकार से ऊपर नहीं हो सकते. एक मुख्यमंत्री अपनी मर्जी से सीधे विदेश यात्रा पर नहीं जा सकते, चाहे वह ऑफिशियल दौरा हो या प्राइवेट. सरकार का नियम है कि किसी भी मुख्यमंत्री या मंत्री के विदेश दौरे के लिए राजनीतिक, सुरक्षा और आर्थिक मंजूरी लेना अनिवार्य होता है. नियमों के मुताबिक यात्रा से 4 से 6 हफ्ते पहले विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय को दौरे का पूरा शेड्यूल, पूरी डिटेल भेजनी पड़ती है. ये भी बताना पड़ता है कि कौन-कौन साथ जा रहा है और क्यों जा रहा है.
विदेश मंत्रालय किन बातों की जांच करता है?
विदेश मंत्रालय ये जांचता है कि सीएम का दौरा देश की विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और 'पद की गरिमा' के अनुकूल है या नहीं. रेवंत रेड्डी के मामले में विदेश मंत्रालय ने उनके यूके दौरे को तो हरी झंडी दे दी, लेकिन ऐन वक्त पर अमेरिका की यात्रा को 'पॉलिटिकल एंगल' का हवाला देकर रोक दिया, जिसके बाद से ही यह पूरा विवाद खड़ा हुआ है.
आधिकारिक और निजी विदेश दौरे में क्या अंतर है?
यदि सीएम राज्य में निवेश लाने, किसी ग्लोबल सम्मेलन में हिस्सा लेने या किसी यूनिवर्सिटी के साथ एमओयू (MoU) करने जा रहे हैं, तो इसे आधिकारिक दौरा माना जाता है. इसका खर्च राज्य सरकार उठाती है. इसके लिए 'डिप्लोमैटिक पासपोर्ट' (Diplomatic Passport) का इस्तेमाल हो सकता है. अगर सीएम इलाज के लिए, छुट्टी मनाने या परिवार से मिलने जा रहे हैं, तो भी उन्हें विदेश मंत्रालय को सूचित कर 'पॉलिटिकल क्लीयरेंस' लेनी होती है, भले ही खर्च वे खुद उठा रहे हों.
मंजूरी के बाद दूतावास की भूमिका
जब विदेश मंत्रालय मंजूरी दे देता है, तो संबंधित देश में स्थित भारतीय दूतावास को इसकी सूचना भेजी जाती है. भारतीय दूतावास वहां मुख्यमंत्री के ठहरने, लोकल ट्रांसपोर्ट और सुरक्षा (Security) को देखता है. उसी हिसाब से मुख्यमंत्री को स्टेट गेस्ट का दर्जा या उचित प्रोटोकॉल दिया जाता है.
तेलंगाना राइजिंग के लिए कई देशों का दौरा
तेलंगाना की ब्रांडिंग करने के लिए रेवंत रेड्डी अब तक स्विट्ज़रलैंड, अमेरिका, दक्षिण कोरिया, जापान और अब यूनाइटेड किंगडम (लंदन) समेत करीब 5 देशों का दौरा कर चुके हैं. हालांकि, विपक्ष लगातार उन पर राज्य की समस्याओं को छोड़ बार-बार दिल्ली और विदेश दौरों पर रहने का आरोप लगाता रहा है, लेकिन मौजूदा संकट पहला ऐसा वाकया है जहां मुख्यमंत्री के किसी दौरे को केंद्र सरकार से लिखित तौर पर 'पॉलिटिकल क्लीयरेंस' देने से मना किया गया है.
लंदन में यूनिवर्सिटीज से मुलाकात
मुख्यमंत्री 20 अगस्त को 10 दिवसीय दौरे पर रवाना हुए थे. उन्होंने लंदन में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और लंदन बिजनेस स्कूल के शीर्ष प्रतिनिधियों से मुलाकात कर राज्य के युवाओं के लिए स्किलिंग और वैश्विक पार्टनरशिप पर चर्चा की. लंदन के बाद सीएम को अमेरिका के बोस्टन और न्यूयॉर्क जाना था. उनका मकसद हार्वर्ड, एमआईटी (MIT), नॉर्थ-ईस्टर्न और वर्जीनिया टेक जैसे दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों को हैदराबाद लाकर एमओयू (MoUs) साइन करना था. न्यूयॉर्क में 'इंडियन ओवरसीज कांग्रेस' (IOC) के एक मंच पर भी शामिल होने वाले थे. अटकलें हैं कि इसी कार्यक्रम में पॉलिटिकल एंगल देखकर सरकार ने रेवंत का अमेरिका जाना कैंसल करा दिया.
पहले भी मुख्यमंत्रियों के विदेश दौरे रोके गए
मुख्यमंत्रियों के विदेश दौरे पर केंद्र की रोक का यह कोई पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी केंद्र सरकार कई गैर-बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की फाइलें रोक चुकी है. इसी साल जनवरी और फरवरी में पंजाब के सीएम भगवंत मान के यूके, इजरायल और नीदरलैंड के दौरों को राजनीतिक क्लीयरेंस नहीं मिली थी. उससे पहले सुरक्षा कारणों से उन्हें पेरिस ओलंपिक जाने से भी रोका गया था. 2022 में दिल्ली के तत्कालीन सीएम अरविंद केजरीवाल के सिंगापुर के 'वर्ल्ड सिटीज समिट' जाने की अनुमति यह कहकर रोकी गई थी कि यह सम्मेलन सीएम स्तर का नहीं है.
ममता बनर्जी का दौरा भी रोका गया था
2021 में पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को रोम के वैश्विक शांति सम्मेलन में जाने से यह कहकर रोका गया था कि यह कार्यक्रम एक मुख्यमंत्री के राजनीतिक कद के अनुरूप नहीं है. रेवंत रेड्डी के मामले में विदेश मंत्रालय ने यूके दौरे को तो हरी झंडी दे दी, लेकिन ऐन वक्त पर अमेरिका के दौरे को 'पॉलिटिकल एंगल' का हवाला देकर होल्ड कर दिया, जिससे यह बड़ा विवाद खड़ा हुआ है. केंद्र के इस कड़े रुख के बावजूद रेवंत झुके नहीं हैं. उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि "राजनीतिक बाधाओं के बावजूद 'तेलंगाना राइजिंग' (TelanganaRising) का कारवां अजेय है और इसे रोका नहीं जा सकता".
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