Telangana Politics: प्रशांत किशोर हैं तो इलेक्शन स्ट्रैटजिस्ट. करीब 10 साल में उन्होंने मोदी, स्टालिन, ममता, केजरीवाल, जगन रेड्डी-सबको चुनाव जिताने का काम किया. स्ट्राइक रेट एकदम धाकड़. सबको जिताते-जिताते प्रशांत किशोर उब गए. सोचा क्यों न खुद को जिताया जाए. 2022 में उन्होंने इलेक्शन स्ट्रैटजिस्ट वाला काम छोड़ दिया. और पूरी तरह उतर गए बिहार में चुनाव जीतने. बिहार में प्रशांत किशोर ने बहुत खराब किया. न खुद चुनाव लड़े, न जनता ने उनके उम्मीदवारों को जिताया. प्रशांत किशोर आगे क्या करेंगे, इसका ठीक-ठीक खुलासा नहीं किया लेकिन ऐसा लग रहा है कि फिर से इलेक्शन स्ट्रैटजिस्ट वाले रोल में लौट रहे हैं. बिहार से फ्री होकर प्रशांत किशोर तेलंगाना में पाए गए हैं जहां उन्होंने जिम्मा संभाला है कि केसीआर की बेटी के कविता की नई पार्टी को चमकाने का. PTI रिपोर्ट के मुताबिक कविता ने अपनी पार्टी तेलंगाना जागृति को स्टैबलिश करने के लिए प्रशांत किशोर की सर्विसेस ली हैं. इसका एलान न तो कविता ने किया, न प्रशांत किशोर ने. प्रशांत किशोर पिछले दिनों 5 दिन तक हैदराबाद में थे और उन्होंने कई दौर में कविता से लंबी मुलाकातें कीं..
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के कविता का सबसे बड़ा परिचय है कि वो तेलंगाना राज्य बनाने के आंदोलन के चेहरा और पूर्व सीएम के चंद्रशेखर राव की बेटी हैं. केसीआर के आंदोलनों से न केवल आंध्र का विभाजन होकर अलग तेलंगाना राज्य बना. बल्कि दो-दो चुनाव जीतकर केसीआर ने अपनी सरकार बनाई. 2023 में कांग्रेस के हाथों सत्ता गंवाने के बाद केसीआर की पार्टी बीआरएस बुरे हाल में है. कई विधायक पाला बदलकर कांग्रेस में जा चुके हैं. लोकसभा चुनावों में करारी हार हुई और इतने सबके बाद घर-परिवार में कलह हुई. कविता के पार्टी और परिवार विरोधी तेवरों से नाराज होकर सितंबर में उन्हें सस्पेंड किया गया था. पिता और भाई केटी रामाराव की अनदेखी से नाराज होकर के कविता ने परिवार की पार्टी बीआरएस छोड़ दी. MLC पद से भी इस्तीफा दे दिया. अपने कल्चरल संगठन तेलंगाना जागृति को राजनीतिक पार्टी बना रही हैं. उसी पार्टी को बड़ा और बहुत बड़ा बनाने के लिए उन्होंने प्रशांत किशोर को बुलाया है.
बिहार के बाद अब प्रशांत किशोर की तेलंगाना में एंट्री
बिहार में प्रशांत किशोर अपना चुनाव भले न जीते हों लेकिन अभी भी उन्हें सबसे काबिल माना जाता है इलेक्शन स्ट्रैटजी बनाने में. कविता ने 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए तैयारी शुरू की है. इस एलान के साथ कि वो तेलंगाना की सीएम बनकर दिखाएंगी. केसीआर के परिवार और पार्टी में फूट का पहला फायदा कांग्रेस को ही मिलना है. बीजेपी इतनी बड़ी कि केसीआर के भक्त उन्हें छोड़कर बीजेपी में फायदा देखें. रेवंत रेड्डी ने चुनाव से पहले केसीआर के परिवार के करप्शन पर निशाने पर लिया हुआ है. जब कविता की परिवार से चीजें खराब हो रही थी तब भी रेवंत रेड्डी ने कविता को कांग्रेस के पास लाने में कोई इंटरेस्ट नहीं दिखाया. कविता की भी मजबूरी हो गई कि या तो घर बैठ जाएं या अपनी पार्टी के दम पर नए सिरे से राजनीति में जमने की कोशिश करें.
परिवार और पार्टी के खिलाफ बगावत?
2023 के चुनावों में कांग्रेस की बंपर जीत हुई. बीआरएस को करारी हार मिली और हार के बाद पार्टी बुरे हाल में पहुंच गई. बीजेपी कभी तेलंगाना में मजबूत बन नहीं पाई. कविता की कोशिश होगी कि वो पिता की राजनीतिक विरासत संभालें जो कि अभी उनके भाई केटीआर के पास है, केटीआर ही बीआरएस चला रहे हैंय केटीआर के राज में शुरू-शुरू कविता का सब ठीक था. फिर न जाने क्या बात हुई कि बहन-भाई के रिश्ते गड़बड़ाने लगे. कविता ने भाई की साइड लेने का आरोप लगा दिया और फिर एक दिन ऐसा आया कि कविता ने परिवार और पार्टी के खिलाफ बगावत कर दी.
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शराब घोटाला, बीजेपी एंगल और केसीआर से टकराव?
बीजेपी और केसीआर की लड़ाई में सबसे बड़ी कीमत के कविता ने ही चुकाई. दिल्ली के जिस शराब घोटाले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह की गिरफ्तारी हुई उसी केस में कविता को भी ईडी उठाकर ले गई थी. 2023 के चुनावों के बाद सरवाइवल के संकट से जूझ रहे बीआरएस में चर्चा शुरू हुई बीजेपी से अलायंस की. यहीं से कविता के परिवार और पार्टी से संबंध खराब होने लगे. केसीआर ने राजनीतिक विरासत और पार्ट बेटे केटीआर को सौंपी है. कविता के हिस्से में कुछ नहीं आया. न पार्टी में पद, न बड़े मामलों में कोई दखल. मई में पिता केसीआर को लिखी कविता की चिट्ठी लीक हुई थी. कविता ने लिखा था कि उन्हें पिता केसीआर से मिलने तक नहीं दिया जाता. केसीआर राक्षसों से घिरे हैं. कविता ने आरोप लगाया कि केसीआर उस बीजेपी से अलायंस की फिराक में हैं जिसने उनकी बेटी को जेल भिजवाया था.
कौन हैं के कविता?
केसीआर पहले बड़े बेटे केटी रामाराव को राजनीति में लाए. फिर बेटी को. शायद यही गलती हो गई. जब तेलंगाना राज्य के लिए आंदोलन चल रहा था तब केटीआर पिता के साथ थे. कविता विदेश में पढ़ाई कर रही थी. बीटेक करने के बाद अमेरिका से Master of Sciences की डिग्री ली. अमेरिका में software engineer की जॉब करने लगीं. 2003 में बिजनेसमैन अनिल कुमार से शादी हो गई. दोनों के दो बच्चे हैं जो अमेरिका में पढ़ते हैं. कविता 2006 में लौटकर परिवार के पास भारत आईं. तब तक केटीआर पिता के साथ बड़े नेता बन चुके थे. कविता पिता और भाई के साथ तेलंगाना राज्य के आंदोलन से जुड़ीं. टीआरएस की तेलंगाना जागृति संगठन की कमान संभालकर आंदोलन तेज किया. तेलंगाना राज्य बनने के बाद 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ीं और निजामाबाद सीट से 1 लाख 64 हजार वोटों से जीत हासिल की. 2019 में चुनाव हार गईं तो MLC बनाई गईं. अब वो सब छोड़कर कविता खुद कुछ बनने निकली हैं और इसमें मदद करेंगे प्रशांत किशोर. तेलंगाना में ये सवाल रहेगा कि कविता अपने पिता और भाई से जंग लड़ेंगी या कांग्रेस या बीजेपी से.
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