लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं के साथ हंसते-मुस्कुराते हुए अपना 56वां जन्मदिन मनाया. वैसे तो पीएम मोदी समेत देश के तमाम बड़े नेताओं ने उन्हें बधाई दी, लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान खींचा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर तमिलनाडु की राजनीति से आए दो बधाई संदेशों ने.
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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक घटनाक्रम के बीच पहली बार डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख थलापति विजय ने राहुल गांधी को विश किया, लेकिन इन संदेशों के शब्दों और उसपर राहुल गांधी के जवाब ने राष्ट्रीय राजनीति में नए कयासों को हवा दे दी है.
स्टालिन की बधाई से गायब हुआ 'भाई' शब्द
पिछले साल तक एमके स्टालिन जब राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई देते थे, तो उन्हें 'विचारों का भाई' (Brother in Ideals) कहकर संबोधित करते थे, लेकिन इस बार स्टालिन का बधाई संदेश बेहद औपचारिक और ठंडा था. उन्होंने सिर्फ दो लाइनों में लिखा, "माननीय नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं." इस संदेश से 'भाई' शब्द पूरी तरह गायब था, जिसमें सिर्फ एक राजनीतिक शिष्टाचार नजर आया.
राहुल गांधी का 'मास्टरस्ट्रोक' और साथ आने का न्योता
स्टालिन की इस 'ठंडी' बधाई पर राहुल गांधी ने जो जवाब दिया, उसे राजनीति के जानकार उनका मास्टरस्ट्रोक मान रहे हैं. राहुल ने लिखा, "भारत की अवधारणा, हमारे संविधान और संघवाद की रक्षा के लिए हमारा साझा संकल्प हमारा मार्गदर्शन करता रहेगा. यह हमारे लोकतंत्र की आत्मा की लड़ाई है और हम इसे जीतने तक साथ मिलकर लड़ेंगे."
पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, राहुल गांधी ने स्टालिन को राज्य स्तर पर नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर दोबारा साथ आने का एक बड़ा पॉलिटिकल ऑफर दे दिया है.
थलापति विजय की गर्मजोशी और कांग्रेस की दोहरी रणनीति
स्टालिन की फीकी बधाई के उलट तमिलनाडु की राजनीति के नए सुपरस्टार और मुख्यमंत्री थलापति विजय ने राहुल गांधी को 'मेरा प्यारा भाई' कहते हुए बेहद गर्मजोशी से बधाई दी. राहुल ने भी विजय को जवाब देते हुए कहा कि वे तमिलनाडु के लोगों की आकांक्षाओं के लिए मिलकर काम करते रहेंगे.
यही कांग्रेस की पेचीदा और दोहरी रणनीति को दिखाता है. तमिलनाडु में कांग्रेस थलापति विजय की सरकार को समर्थन दे रही है, जबकि केंद्र में नंबर गेम की मजबूरी के चलते वह स्टालिन की डीएमके को भी मनाना चाहती है.
क्या है कांग्रेस की मजबूरी?
हाल ही में संपन्न हुए तमिलनाडु चुनाव में हार के बाद कांग्रेस ने डीएमके का साथ छोड़कर बहुमत से थोड़ा दूर रही थलापति विजय की पार्टी टीवीके (TVK) को समर्थन दे दिया था, जिससे विजय की सरकार बन गई. इसे स्टालिन ने पीठ में छुरा घोंपना बताया और जून के पहले हफ्ते में डीएमके इंडिया (INDIA) गठबंधन से अलग हो गई.
अब चर्चा है कि डीएमके एनडीए (NDA) में शामिल हो सकती है. तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में टूट के बाद कांग्रेस के लिए संसद में मुश्किल खड़ी हो सकती है. अगर डीएमके के 22 सांसद एनडीए के पाले में चले गए, तो विपक्ष के लिए बड़ा झटका होगा. यही वजह है कि राहुल गांधी ने जन्मदिन के बहाने स्टालिन को साथ मिलकर लड़ने का संदेश भेजा है. अब देखना होगा कि क्या स्टालिन इस कड़वाहट को भुलाकर राहुल का यह ऑफर स्वीकार करते हैं या नहीं.
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