Rahul Gandhi Karnataka High Court Verdict: क्या राहुल गांधी को फंसाने की साजिश हुई थी? क्या उन पर लगे मानहानि के आरोप महज एक राजनीतिक स्टंट थे? कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपना हथौड़ा चला दिया और राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि के एक केस को जड़ से Quash कर दिया. राहुल गांधी के खिलाफ चल रही एक और कानूनी घेराबंदी ध्वस्त हो गई है. कर्नाटक हाईकोर्ट ने बीजेपी नेता के मानहानि केस को कूड़ेदान में डाल दिया है. ये राहुल गांधी की राजनीतिक जीत है और बीजेपी की कानूनी हार.
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कहानी शुरू होती है साल 2023 के विधानसभा चुनावों से. तब बीजेपी सत्ता में थी. कांग्रेस को बीजेपी से सत्ता लेनी थी. कांग्रेस ने एक ऐसा विज्ञापन निकाला जिसने बीजेपी की नींद उड़ा दी. कर्नाटक की सड़कों पर एक पोस्टर चिपका था- 'PayCM' और अखबारों में छपा था-'करप्शन रेट कार्ड'. कांग्रेस ने राहुल गांधी के नेतृत्व में बीजेपी को हराने के लिए घातक नैरेटिव बुना-40 परसेंट कमीशन सरकारा. जनता के मन में ये बात बैठ गई कि बीजेपी के राज में हर सरकारी काम के लिए 40% घूस देनी पड़ती है.
मोदी लहर के बाद भी गंवाई कर्नाटक में सत्ता
रैलियों में, भाषणों में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी ने जोर-जोर से गर्जना की. ये सिर्फ एक चुनावी कैंपेन नहीं था. बीजेपी के कर्नाटक किले में लगाया गया वो डायनामाइट था जिसने चुनाव पलट दिया. देश में प्रचंड मोदी लहर के बाद भी कर्नाटक की सत्ता बीजेपी ने गंवाई. 40% करप्शन सरकार कैंपेन ने बीजेपी को सत्ता से बेदखल कर दिया. कांग्रेस ने 224 में से 135 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया. बीजेपी की हार की सबसे बड़ी वजह माना गया उसी करप्शन के रेट कार्ड को जिसने उसे महज 66 सीटों पर समेट दिया.
मानहानि केस से राहुल को फंसाने की कोशिश
बीजेपी सुलग उठी. राहुल गांधी की लीगल घेराबंदी का पूरा प्लान बना. केशव प्रसाद ने कर्नाटक हाईकोर्ट में राहुल गांधी, सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार पर मानहानि का केस ठोक दिया. आरोप लगा कि राहुल गांधी चुनाव से पहले पार्टी की इमेज खराब कर रहे हैं. मामला गंभीर स्टेज में पहुंचा तो राहुल गांधी को बेंगलुरु की विशेष अदालत में खुद पेश होकर जमानत लेनी पड़ी. लगा कि राहुल गांधी कानूनी चक्रव्यूह में फंस जाएंगे.
जस्टिस सुनील दत्त यादव की टिप्पणी ने पलटा पूरा केस
उस कैंपेन को चले करीब 3 साल होने वाले हैं. केस चलते-चलते अंजाम तक पहुंचा. जस्टिस एस. सुनील दत्त यादव की बेंच ने फाइलें देखीं और जो कहा, उसने शिकायतकर्ता के होश उड़ा दिए. कोर्ट ने साफ-साफ कहा कि सिर्फ राहुल की फोटो होने से गुनाह साबित नहीं होता. विज्ञापन पार्टी ने दिया, राहुल गांधी उस वक्त न अध्यक्ष थे, न उपाध्यक्ष. कोर्ट ने माना कि बिना सबूत के राहुल को घसीटना गलत ही नहीं, कानून का दुरुपयोग है.
कोर्ट में बीजेपी से हुई ये तकनीकी गलती
बीजेपी से बस गलती ये हो गई कि कोर्ट में बीजेपी ने केस नहीं किया था. यही बात भी केस के फैसले में बड़ा फैक्टर बनी. लाइव लॉ रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने माना कि शिकायत करने वाली पार्टी का किसी काबिल व्यक्ति ने रिप्रेजेंट नहीं किया. जस्टिस सुनील दत्त यादव ने अपने आदेश में कहा कि ट्रायल कोर्ट में शिकायत करने वाली भारतीय जनता पार्टी है. शिकायत से ऐसा लगता है कि विज्ञापन से BJP की स्टेट यूनिट, BJP की पूर्व सरकार और BJP पॉलिटिकल पार्टी की बदनामी हुई. अगर पीड़ित पार्टी नेशनल पार्टी BJP है, तो शिकायत नेशनल पार्टी के सही तरीके से ऑथराइज़्ड प्रतिनिधि के जरिए फाइल की जानी चाहिए थी. इसी के साथ जज ने आदेश दिया कि केस क्लोज.
हाईकोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को पूरी तरह रद्द कर दिया. राहुल के केस मुकदमों की लिस्ट से एक केस खत्म हो गया. बीजेपी इस केस को राहुल गांधी के गले की फांस बनाना चाहती थी, वहीं हाईकोर्ट ने क्लीन चिट देकर कांग्रेस और राहुल को बड़ी राहत दे दी. राहुल गांधी अब इस कानूनी जंजाल से पूरी तरह आजाद हैं.
केसे मेरे लिए मेडल की तरह हैं-राहुल गांधी
कर्नाटक की ये जीत राहुल गांधी के लिए ऑक्सीजन की तरह है, लेकिन कानूनी चुनौतियों का समंदर अभी बाकी है. भले ही राहुल गांधी ने कर्नाटक की इस कानूनी लड़ाई जीत ली हो लेकिन उनके लिए रास्ता अभी कांटों भरा है. राहुल गांधी खुद कह चुके हैं कि उन पर 32 से ज्यादा केस चल रहे हैं. राहुल गांधी खुद कह चुके हैं कि केसे मेरे लिए मेडल की तरह हैं. लेकिन हकीकत में उन पर मुकदमों का अंबार है. क्या राहुल गांधी इन सभी 'मेडल्स' को जीत में बदल पाएंगे जो बीजेपी ने पहनाया हुआ है. एक केस में जीत ने राहुल गांधी को संजीवनी तो दी है, लेकिन क्या वो बाकी के 31 केसों में भी इसी तरह 'बाजीगर' बनकर उभरेंगे?
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