'इंडियन स्टेट' को लेकर राहुल गांधी ने ऐसा क्या कहा कि मामला पहुंचा इलाहाबाद हाइकोर्ट? जानिए पूरा विवाद 

Rahul Gandhi Indian State Remark: राहुल गांधी के 'इंडियन स्टेट' वाले बयान पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है और मामला अब इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंच चुका है. क्या इस बयान पर FIR दर्ज होगी या राहुल गांधी को राहत मिलेगी? जानिए पूरा मामला, कोर्ट में हुई तीखी बहस, याचिकाकर्ता के आरोप, कांग्रेस की दलीलें और यूपी सरकार का स्टैंड.

Rahul Gandhi Indian State Remark
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रूपक प्रियदर्शी

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राहुल गांधी एक बार फिर से विवादों में घिरते हुए नजर आ रहे है. इस बार मामला सीरियस बताया जा रहा है जिसे लेकर सबकी निगाहें इलाहाबाद हाइकोर्ट के फैसले पर टिकी हुई है. दरअसल इलाहाबाद हाई कोर्ट में राहुल गांधी के इंडियन स्टेट कहने पर पक्ष और विपक्ष की दलीलों की वो जंग हुई जिसने सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है.

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अब आगे हाईकोर्ट को फैसला करना है कि इंडियन स्टेट से लड़ाई कहने पर राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़नी चाहिए या नहीं. साथ ही यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या राहुल गांधी के एक बयान ने देश की संप्रभुता को चुनौती दी? क्या राजनीतिक लड़ाई अब सीधे 'भारतीय राज्य' यानी 'Indian State' से होने लगी है? आइए विस्तार से जानते हैं क्या है पूरा मामला.

पहले जानिए मामले की पूरी कहानी

कहानी शुरू होती है पिछले साल की शुरुआत में, जब दिल्ली में कांग्रेस के नए मुख्यालय 'इंदिरा भवन' का उद्घाटन हो रहा था. राहुल गांधी मंच पर थे. भाषण देते हुए राहुल गांधी जोश में दहाड़े कि अगर आप सोचते हैं कि हमारी लड़ाई सिर्फ बीजेपी या आरएसएस से है, तो आप गलत हैं. बीजेपी -आरएसएस ने हर संस्था पर कब्जा कर लिया है. अब हमारी लड़ाई बीजेपी, आरएसएस के साथ-साथ खुद 'इंडियन स्टेट' से है. अब राहुल गांधी की इसी भाषण पर कोर्ट जिरह हो रही है. हालांकि अभी तक कोर्ट से ये तय नहीं हुआ कि राहुल गांधी राहत पा लेंगे या मुश्किलों में और इजाफा होगा. कोर्ट में चल रहा मामला लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की आजादी और राष्ट्र की संप्रभुता के बीच की महीन लकीर पर टिका है.

सिमरन गुप्ता ने राहुल के खिलाफ खोला मोर्चा!

राहुल गांधी के इस बयान को देशद्रोही और राष्ट्रविरोधी बताते हुए सिमरन गुप्ता ने मोर्चा खोल दिया. राहुल गांधी के खिलाफ सबसे पहले मामला संभल की संभल कोर्ट पहुंचा था. मांग की गई कि राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए. पिछले साल 7 नवंबर को संभल कोर्ट ने अर्जी को कमजोर बताते हुए खारिज कर दिया था. सिमरन गुप्ता ने हार नहीं मानी और निचली अदालत के फैसले को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी.  

यह सिर्फ एक बयान की लड़ाई नहीं है, कानून की व्याख्या की जंग है. सिमरन गुप्ता ने जब संभल की निचली अदालत में दस्तक दी, तो क्षेत्राधिकार का रोड़ा अटका. जिला जज ने नोटिस जारी किया तो उम्मीद जगी, लेकिन सत्र न्यायालय ने इसे 'कमजोर' मानकर ठंडे बस्ते में डाल दिया. अब कानूनी पेंच जिसे हाई कोर्ट को सुलझाना है कि क्या संभल की कोर्ट को दिल्ली में दिए गए बयान पर FIR का आदेश देने का अधिकार है? क्या जिला अदालत का पहले जारी किया गया नोटिस इस बात का सबूत है कि प्रथम दृष्टया (Prima Facie) मामला बनता था? क्या सत्र न्यायालय ने याचिका खारिज करते समय किसी कानूनी तथ्य को अनदेखा किया?

कोर्ट रूम में हुई जबरदस्त बहस

इलाहाबाद हाईकोर्ट में जस्टिस विक्रम डी. चौहान की बेंच के सामने दोनों पक्षों में तीखी बहस हुई. याचिकाकर्ता ने दलील दी कि राहुल गांधी की इस टिप्पणी से देशभर में सार्वजनिक भावनाओं को ठेस पहुंची है. बयान केवल राजनीतिक आलोचना नहीं है, बल्कि देश को अस्थिर करने के इरादे से दिया गया देशद्रोही और राष्ट्रविरोधी बयान है.

कांग्रेस ने कभी राहुल के बयान को गलत नहीं माना. कोर्ट में भी राहुल गांधी के वकीलों ने आरोपों को सिरे से खारिज किया. दावा किया कि ये सब राजनीति के लिए किया गया है. जस्टिस चौहान ने दोनों पक्षों को सुन लिया लेकिन फैसला रिजर्व कर लिया.

नजर उस दिन पर टिकी है जब जज फैसला सुनाएंगे कि याचिका खारिज करने का संभल कोर्ट का फैसला सही था या नहीं. राहुल गांधी के खिलाफ जांच के आदेश होंगे या राहत मिलेगी? अगर हाई कोर्ट याचिका को स्वीकार कर लेता है, तो राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का रास्ता साफ हो सकता है और संभल पुलिस को जांच शुरू करनी होगी. अगर याचिका खारिज होती है, तो राहुल गांधी के लिए यह बड़ी राहत होगी. राहुल गांधी एक केस से बच जाएंगे.

यूपी सरकार का दिलचस्प स्टैंड!

इस मामले में यूपी सरकार भी पार्टी है और उसकी स्टैंड दिलचस्प है. उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले में 'कानून का कड़ाई से पालन' करने का रुख अपनाया है. उन्होंने सीधे तौर पर राहुल गांधी का बचाव नहीं किया, लेकिन याचिकाकर्ता की अर्जी में मौजूद तकनीकी खामियों को उजागर किया, जिससे राहुल गांधी को निचली अदालत में राहत मिली थी.

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकीलों ने कहा कि याचिकाकर्ता ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार पेश नहीं किए हैं. सरकार ने ये तर्क दिया कि मजिस्ट्रेट को स्वतंत्र रूप से ये तय करने देना चाहिए कि क्या प्रथम दृष्टया कोई संज्ञेय अपराध बनता है.

राहुल गांधी के खिलाफ कौन-कौन से चल रहें है केस?

कोर्ट कचहरी में राहुल गांधी अकेले ये केस नहीं लड़ रहे हैं. इलाहाबाद हाई कोर्ट में ही उनके खिलाफ दो बड़े केस चल रहे हैं. बीजेपी कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की याचिका पर सुनवाई चल रही है, जिसमें राहुल गांधी की नागरिकता पर सवाल उठाए गए हैं. अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होनी है.

दूसरा केस सेना पर टिप्पणी को लेकर है. सेना के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी मामले में हाई कोर्ट पहले ही राहुल को राहत देने से इनकार कर चुका है, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की भी सीमाएं होती हैं. इंडियन स्टेट समेत अब तीन मामलों में राहुल पर हाईकोर्ट का फैसला आना बाकी है.

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