कांग्रेस की आंध्र बड़ी समस्या है. आंध्र विभाजन की सजा के तौर पर जनता ने पूरी कांग्रेस को जीरो पर समेट दिया. तेलंगाना में तो वापसी हो गई लेकिन आंध्र में कुछ हो नहीं सका. जगन की बहन वाई एस शर्मिला को लाने के बाद भी कांग्रेस जीरो पर है. लोग भविष्यवाणी कर रहे हैं कि आंध्र में जगन को सरवाइव और कांग्रेस को रिवाइव करने के लिए ये अलायंस हो सकता है. मुश्किल ये है कि आंध्र के लोगों का गुस्सा कांग्रेस के लिए कम नहीं हुआ और जगन ने आज तक नरमी नहीं दिखाई कि कभी कांग्रेस से रिश्ते सुधारने के बारे में सोच सकते हैं. जब इंडिया गठबंधन बना तब भी जगन रेड्डी ने इंटरेस्ट नहीं दिखाया. बल्कि चंद्रबाबू पर आरोप लगाते रहे कि उनकी राहुल से बात होती रहती है.
ADVERTISEMENT
सवाल ये है कि जगन नरम होंगे या कठोर लाइन लेकर रखेंगे. उनकी ओर से कोई सिगनल नहीं. 5 राज्यों के चुनाव के नतीजे आने पर जगन रेड्डी ने विजय को बधाई दी, बंगाल में बीजेपी को जीत के लिए बधाई दी. ममता के लिए अफसोस जताया लेकिन केरल में कांग्रेस की जीत पर कुछ नहीं कहा. बस अदर्स लिखा था. राजनीति में अक्सर वही नहीं होता जो आप चाहते हैं. मजबूरी बहुत कुछ करा जाती है.
118 के जादुई आंकड़े से महज 10 कदम दूर
कांग्रेस ने भी यही किया. तमिलनाडु चुनाव के नतीजों ने सबको चौंका दिया. बहुमत के लिए जरूरी 118 के जादुई आंकड़े से महज 10 कदम दूर खड़ी विजय की पार्टी TVK को कांग्रेस ने अपना 'बिना शर्त' समर्थन देकर मास्टरस्ट्रोक खेल दिया है. 5 विधायकों वाली कांग्रेस के इस कदम ने न केवल विजय की सरकार पक्की कर दी, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि कांग्रेस अब तमिलनाडु में DMK के साये से बाहर निकलकर विजय के 'विजन' के साथ अपनी नई पारी शुरू कर रही है. कांग्रेस इस तैयारी के साथ विजय के साथ आगे बढ़ी है कि गठबंधन केवल सरकार बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आगामी स्थानीय निकाय और लोकसभा चुनावों में भी जारी रहेगा.
भले विजय की शपथ में जगन रेड्डी नहीं आए लेकिन विजय की जीत के बाद जगन ने अपना छोटा भाई" बताते हुए बधाई दी थी. जिससे राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा और तेज हो गई कि विजय, कांग्रेस और जगन के बीच के पुराने मतभेदों को मिटाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. कड़ियां जुड़ी रही हैं कि विजय की शपथ में राहुल को आना था. विजय ने जगन को भी बुलाया था. जगन इसलिए नहीं आए कि वो विदेश में थे. मतलब जगन रेड्डी को बुलाने में कांग्रेस ने कोई आपत्ति नहीं जताई.
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री का बधाई संदेश
सोशल मीडिया पर इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के उस बधाई संदेश की हो रही है, जो उन्होंने विजय को भेजा. राजनीतिक पंडित इसे महज औपचारिकता नहीं मान रहे हैं. जगन और विजय की कार्यशैली में काफी समानताएं देखी जाती हैं- दोनों ही यूथ आइकॉन हैं और दोनों ने ही अपने राज्यों के स्थापित बड़े राजनीतिक घरानों को खुली चुनौती दी है. समर्थकों का मानना है कि विजय के साथ जगन की यह बढ़ती नजदीकियां दक्षिण की राजनीति में एक नए 'पावर ब्लॉक' की शुरुआत हैं.
सोशल मीडिया पर चल रही सबसे बड़ी थ्योरी ये है कि विजय 'इंडिया गठबंधन' (INDIA Alliance) के लिए एक 'संकटमोचक' या 'ब्रिज' का काम कर सकते हैं. जगन मोहन रेड्डी और कांग्रेस के बीच का कड़वा इतिहास किसी से छिपा नहीं है, लेकिन अब बदलते समीकरणों के बीच विजय की मध्यस्थता दोनों को करीब ला सकती है. अगर विजय जगन को कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के करीब लाने में कामयाब होते हैं, तो 2029 के लोकसभा चुनाव की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है. लोग अनुमान लगा रहे हैं कि विजय, राहुल गांधी और जगन रेड्डी के बीच मध्यस्थता करके दक्षिण भारत में एक नया सेकुलर और मजबूत मोर्चा खड़ा कर सकते हैं. सोशल मीडिया पर यह भविष्यवाणी की जा रही है कि 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए विजय एक ऐसी धुरी बन सकते हैं जहाँ जगन रेड्डी की YSRCP और कांग्रेस अपने पुराने मतभेदों को भुलाकर एक साथ आ सकें.
फिलहाल, विजय के लिए प्राथमिकता अपनी नई सरकार को स्थिरता देना है, लेकिन जिस तरह से उन्होंने कांग्रेस को साथ लिया और जगन के साथ उनके रिश्तों की चर्चा हो रही है, उसने विपक्ष को एक नई उम्मीद दे दी है. हालांकि, सोशल मीडिया पर एक वर्ग यह भी कह रहा है कि जगन और कांग्रेस के बीच का इतिहास काफी कड़वा रहा है, इसलिए उन्हें करीब लाना विजय के लिए एक बड़ी चुनौती होगी. कुछ लोग इसे केवल राजनीतिक अटकलें भी मान रहे हैं. क्या विजय दक्षिण भारत के 'किंगमेकर' बनकर उभरेंगे? यह तो वक्त बताएगा, लेकिन इतना तय है कि थलापति की इस 'विजय' ने भारतीय राजनीति में एक नई स्क्रिप्ट लिख दी है.
ये भी पढ़ें: Shesh Bharat: संसद में टूटी 'भाई-भाई' की जोड़ी: कांग्रेस से पीछा छुड़ाने के लिए कनिमोझी ने स्पीकर को लिखी चिट्ठी!
ADVERTISEMENT


