तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों 'बर्थडे पॉलिटिक्स' को लेकर जबरदस्त सियासी हलचल मची हुई है. राज्य के नए मुख्यमंत्री थिरू जोसेफ विजय के जन्मदिन पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा दी गई बधाई और उस पर उनके पुराने सहयोगी दल डीएमके (DMK) की तीखी प्रतिक्रिया ने राज्य से लेकर देश की राजनीति को गरमा दिया है. तमिलनाडु में गठबंधन बदलने के बाद अब आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर भी कांग्रेस असमंजस में दिखाई दे रही है.
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राहुल गांधी और सीएम विजय के बीच क्या हुआ संवाद?
तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री विजय के 52वें जन्मदिन पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उन्हें सोशल मीडिया पर बधाई दी. राहुल गांधी ने लिखा, "तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थिरू जोसेफ विजय को जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं. मैं आपके अच्छे स्वास्थ्य और सफलता की कामना करता हूं. तमिल लोगों के अधिकारों, सम्मान और आकांक्षाओं की रक्षा करने तथा राज्य की प्रगति के लिए मिलकर काम करने में मैं आपके साथ हूं." इसके जवाब में मुख्यमंत्री विजय ने भी राहुल गांधी का आभार जताते हुए उन्हें धन्यवाद दिया.
DMK का हैरान करने वाला पलटवार: 'Thanks but No Thanks'
इस बर्थडे विश से ठीक पहले 19 जून को राहुल गांधी का जन्मदिन था, जिस पर डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने उन्हें बधाई दी थी. राहुल गांधी ने स्टालिन को जवाब देते हुए संविधान और संघवाद की रक्षा के लिए साझा संकल्प के साथ मिलकर लड़ने की बात कही थी. राहुल गांधी के इस बयान को स्टालिन को साथ रहने का ऑफर माना जा रहा था.
लेकिन इस पर डीएमके नेता अन्ना दुरई ने राहुल गांधी के पोस्ट को टैग करते हुए बेहद हैरान करने वाला जवाब दिया. उन्होंने लिखा, "थैंक्स बट नो थैंक्स, हम आपके साथ कुछ भी शेयर नहीं कर रहे हैं और हम मिलकर चुनाव भी नहीं लड़ने वाले हैं." इसके बाद उन्होंने एक और पोस्ट में राहुल गांधी की राजनीति पर सवाल उठाते हुए उन्हें असमंजस में न रहने की सलाह दी.
क्यों आई पुराने साथियों के रिश्ते में ये खटास?
दरअसल, यह पूरा विवाद तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के बाद शुरू हुआ। चुनाव के बाद कांग्रेस ने डीएमके से अपना पुराना गठबंधन तोड़कर मुख्यमंत्री विजय की नई सरकार को अपनी 5 सीटों का समर्थन दे दिया था। कांग्रेस के इस फैसले से डीएमके खेमे में भारी नाराजगी है। यही वजह थी कि जून 2026 में दिल्ली में हुई इंडिया गठबंधन की बैठक से भी डीएमके ने पूरी तरह दूरी बना ली थी।
जबकि साल 2024 के लोकसभा चुनाव और 2021 के विधानसभा चुनाव में डीएमके और कांग्रेस ने मिलकर शानदार प्रदर्शन किया था। अब तमिलनाडु की बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों के बीच कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती यह है कि वह 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए विजय के साथ खड़ी रहे, डीएमके के पास वापस जाए या फिर दोनों को साथ लाने की कोशिश करे.
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