तमिलनाडु की सियासत में करीब छह दशकों से चली आ रही द्रविड़ राजनीतिक परंपरा को तोड़कर सत्ता के शिखर पर पहुंचने वाले अभिनेता और राजनेता 'थलापति' विजय (जोसेफ विजय) अब देश की राजधानी दिल्ली में अपनी ताकत दिखाने के लिए तैयार हैं. हाल ही में संपन्न हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज करने के बाद, विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कज़गम' (TVK) अब राज्यसभा में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की पूरी तैयारी में है.
ADVERTISEMENT
18 जून को होगा राज्यसभा सीटों पर फैसला
चुनाव आयोग के मुताबिक, देश के 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं, जिनका कार्यकाल जून-जुलाई में समाप्त हो रहा है. इसके लिए 1 जून को नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा और 8 जून नामांकन की आखिरी तारीख होगी. 18 जून को ही वोटिंग होगी और उसी दिन नतीजे भी घोषित कर दिए जाएंगे. इसके साथ ही महाराष्ट्र और तमिलनाडु में एक-एक सीट पर उपचुनाव भी 18 जून को ही कराया जाएगा.
तमिलनाडु में क्यों बना TVK के लिए मौका?
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में मैलाम क्षेत्र से विधायक चुने जाने के बाद AIADMK के नेता सीवी शंगमुगम ने अपनी राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद यह सीट खाली हुई है. तमिलनाडु में इस समय विधानसभा की स्थिति देखें तो TVK ने 234 सीटों में से 108 सीटों पर अकेले जीत हासिल की है.
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए तमिलनाडु में 34 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है. विजय की पार्टी TVK के पास अपने दम पर ही 107 विधायक हैं, जिसका मतलब है कि TVK अकेले अपने दम पर आसानी से 3 राज्यसभा सीटें जीत सकती है (34 × 3 = 102 विधायक).
AIADMK में टूट से विजय को मिला फायदा, नंबर गेम में पिछड़े विरोधी
तमिलनाडु के नंबर गेम ने AIADMK को तगड़ा झटका दिया है. AIADMK के 25 बागी विधायकों ने विश्वास मत के दौरान थलापति विजय की सरकार का समर्थन किया है. इस टूट के बाद अन्नाद्रमुक प्रमुख पलानीस्वामी के खेमे में सिर्फ 22 विधायक बचे हैं, जिससे वह रेस से बाहर हो चुके हैं. वहीं दूसरी तरफ, TVK गठबंधन के पास कुल 144 विधायकों का समर्थन हासिल है. इस गणित के हिसाब से विजय की पार्टी राज्यसभा चुनाव में बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकती है.
दिल्ली की राजनीति में पहली बार होगी TVK की एंट्री
वर्तमान में थलापति विजय की पार्टी के पास लोकसभा या राज्यसभा में कोई सदस्य नहीं है. अगर इस चुनाव में TVK को राज्यसभा सीटें मिलती हैं, तो यह पार्टी के लिए एक बहुत बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धि होगी. जिस साल विजय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनकर सत्ता पर काबिज हुए, उसी साल दिल्ली के संसद भवन में भी उनकी पार्टी का खाता खुलने जा रहा है.
ADVERTISEMENT


