Shesh Bharat: तमिलनाडु में थलपति विजय के सामने बीजेपी का नया दांव, राम माधव की एंट्री क्यों हुई?

रूपक प्रियदर्शी

• 11:59 AM • 25 Sep 2026

तमिलनाडु में बीजेपी ने संगठनात्मक चुनौतियों के बीच राम माधव को नया प्रभारी बनाया है. अन्नामलाई के इस्तीफे और कई नेताओं के जाने के बाद पार्टी मुश्किल दौर से गुजर रही है. 2026 के चुनाव में विजय की TVK ने 108 सीटें जीतीं. अब बीजेपी राम माधव के अनुभव से संगठन मजबूत करने की कोशिश करेगी.

Ram Madhav
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दक्षिण भारत में तमिलनाडु हमेशा से बीजेपी के लिए एक ऐसा किला रहा है, जिसे भेदना उसके सबसे मुश्किल राजनीतिक अभियानों में से एक बना हुआ है. बीजेपी अरसे से इस ताक में थी कि जिस दिन डीएमके और एआईएडीएमके की द्रविड़ पॉलिटिक्स का सूरज डूबेगा, तो तमिलनाडु में कमल खिलेगा. तमिलनाडु के अलावा बीजेपी ने जितने राज्यों में ये गोल सेट किया, वहां अचीव किया, लेकिन तमिलनाडु बेकाबू था और बेकाबू है.

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बीजेपी के सामने तमिलनाडु में नई चुनौती

बीजेपी ने केरल की लाल ज़मीन पर कमल खिलाकर ऐतिहासिक एंट्री तो मार ली, लेकिन तमिलनाडु की द्रविड़ सियासत का किला वह आज तक टच भी नहीं कर पाई है. इसी किले को भेदने के लिए दिल्ली दरबार से अब फिर नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं. अंदरूनी कलह, यौन उत्पीड़न के संगीन आरोप और नेताओं के बीच मची भगदड़ के बाद आखिरकार दिल्ली हाईकमान ने तरकश से अपना सबसे बड़ा तीर निकाल लिया है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने पुराने रणनीतिकार राम माधव को तमिलनाडु का नया प्रभारी नियुक्त किया है.

थलपति विजय की एंट्री ने बदला सियासी समीकरण

बीजेपी जिस द्रविड़ राजनीति के विकल्प को खुद में तलाश रही थी, वहां बाज़ी मार ले गए तमिल सिनेमा के थलपति सी. जोसेफ विजय. विजय ने अपनी नई नवेली पार्टी 'तमिलगा वेट्री कज़गम' (TVK) के साथ ऐसी तूफानी एंट्री मारी कि डीएमके और एआईएडीएमके के पैर उखड़ गए.

विधानसभा चुनाव में विजय ने वह कर दिखाया, जिसकी कल्पना बीजेपी सालों से कर रही थी. उनकी पार्टी TVK ने 108 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया और विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली. बीजेपी केवल एक सीट पर सिमट कर देखती रह गई. 2026 के चुनाव में TVK 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, जबकि बीजेपी को एक सीट मिली.

अन्नामलाई के जाने के बाद बीजेपी में बढ़ी हलचल

एक समय था जब पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई को तमिलनाडु में बीजेपी का 'सार्थक विकल्प' माना जा रहा था. आक्रामक भाषण और 'सिंघम' वाली छवि के दम पर उन्होंने शोर तो बहुत मचाया, लेकिन ग्राउंड रियलिटी कुछ और ही थी. संगठन के पुराने और वरिष्ठ नेता उनके एकतरफा फैसलों और अहंकार से बुरी तरह नाराज थे. पार्टी के भीतर असंतोष का घड़ा तब फूटा, जब दिल्ली नेतृत्व ने एआईएडीएमके (AIADMK) के साथ दोबारा गठबंधन का मन बनाया, जिसका अन्नामलाई लगातार विरोध कर रहे थे. संगठन में अलग-थलग पड़ने के बाद इसी साल जून 2026 में अन्नामलाई ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. उनके जाते ही तमिलनाडु बीजेपी में मानो पतझड़ आ गया. प्रदेश उपाध्यक्ष करू नागराजन और उमा हेमवती जैसे बड़े चेहरों ने एक के बाद एक इस्तीफे ठोक दिए. नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच ऐसी भगदड़ मची कि बीजेपी का पूरा सांगठनिक ढांचा ताश के पत्तों की तरह ढह गया. अन्नामलाई ने 5 जून 2026 को बीजेपी से इस्तीफा दिया था. उनके बाद करू नागराजन समेत कई नेताओं ने भी पार्टी छोड़ी.

संकट के समय बीजेपी ने राम माधव पर लगाया दांव

जब घर में आग लगी हो और दुश्मन सामने अडिग खड़ा हो, तो बीजेपी अपने सबसे बड़े 'संकटमोचक' यानी राम माधव को याद करती है. बीजेपी ने तमिलनाडु में राम माधव को ऐसे ही नहीं भेजा है. आरएसएस (RSS) के प्रचारक से लेकर बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव (2014-2020) और अब राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में उनका ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि वह राजनीतिक डेडलॉक (गतिरोध) को तोड़ने के माहिर खिलाड़ी हैं. उन्हें राजनीति में 'इम्पॉसिबल को पॉसिबल' करने वाला जादूगर माना जाता है. राम माधव 2014 से 2020 तक बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव रहे और जम्मू-कश्मीर तथा पूर्वोत्तर में पार्टी के राजनीतिक मामलों से जुड़े रहे हैं.

जम्मू-कश्मीर से पूर्वोत्तर तक रहा राम माधव का अनुभव

2015 में जब जम्मू-कश्मीर में महबूबा मुफ्ती की पीडीपी और बीजेपी जैसी दो घोर विरोधी विचारधाराओं को एक मंच पर लाकर सरकार करनी थी, तो यह काम राम माधव ने ही अपनी बैक-चैनल डिप्लोमेसी से मुमकिन किया था. असम, त्रिपुरा और नागालैंड जैसे राज्य, जहां बीजेपी का झंडा उठाने वाला कोई नहीं मिलता था, वहां राम माधव ने स्थानीय पार्टियों के साथ 'नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस' (NEDA) बनाकर बीजेपी की सत्ता स्थापित कर दी.

इतने शानदार ट्रैक रिकॉर्ड वाले नेता को बीजेपी ने छह साल के वनवास के बाद दोबारा केंद्रीय टीम में लिया और सीधे तमिलनाडु के मोर्चे पर तैनात कर दिया है.

तमिलनाडु बीजेपी में आरोपों के बीच जांच कमेटी

तमिलनाडु पहुंचते ही राम माधव के सामने कांटों का ताज है. हाल ही में प्रदेश महासचिव करुप्पु मुरुगानंदन पर एक महिला पदाधिकारी द्वारा जबरन गर्भपात और ब्लैकमेलिंग जैसे संगीन आरोप लगने के बाद उन्हें बाहर का रास्ता देखना पड़ा. इस "अप्रत्याशित घटनाक्रम" की जांच के लिए पार्टी ने एच. राजा की अगुवाई में 3 सदस्यीय कमेटी बनाई है. एच. राजा की कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद अनुशासनहीन और विवादित नेताओं पर कार्रवाई की जा सकती है. आरोप लगाने वाली पार्टी पदाधिकारी ने मुरुगानंदन पर उत्पीड़न, दबाव, धमकी और डराने-धमकाने जैसे आरोप लगाए हैं. मुरुगानंदन ने आरोपों से इनकार किया है.

मुख्यमंत्री विजय के तमिल गौरव वाले चेहरे का मुकाबला करने के लिए राम माधव तमिल भाषा, अध्यात्म और राष्ट्रवाद का एक नया कॉकटेल पेश करने वाले हैं. अकेले चुनाव लड़कर गर्त में जा चुकी बीजेपी को वापस खड़ा करने के लिए राम माधव एआईएडीएमके (AIADMK) या अन्य क्षेत्रीय क्षत्रपों के साथ मिलकर एक नया मजबूत विपक्षी ब्लॉक तैयार करेंगे.

2026 के चुनाव के बाद बीजेपी की नई रणनीति

बीजेपी का लक्ष्य 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद तमिलनाडु में अपनी पकड़ मजबूत करना है. तमिलनाडु के इस बेहद जटिल राजनीतिक चक्रव्यूह में राम माधव की एंट्री ने यह साफ कर दिया है कि बीजेपी दक्षिण के इस मोर्चे पर अपनी संगठनात्मक मौजूदगी और राजनीतिक आधार बढ़ाने पर जोर दे रही है.

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