'हम ही हैं असली तृणमूल कांग्रेस...', बागी गुट के विधायकों ने बढ़ाई ममता बनर्जी की टेंशन, चुनाव आयोग में किया दावा 

West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी संकट गहरा गया है. बागी विधायक गुट ने निर्वाचन आयोग में खुद को असली TMC होने का दावा करते हुए कहा है कि उनके पास दो-तिहाई से अधिक विधायकों का समर्थन है. जानिए ऋतब्रत बनर्जी गुट की मांग, नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी, अरूप रॉय की नियुक्ति और इस पूरे विवाद पर चुनाव आयोग की भूमिका.

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अनिर्बन सिन्हा रॉय

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में उथल-पुथल लगातार जारी है. 4 मई को आए विधानसभा चुनाव के परिणाम में जब से TMC हारी और ममता बनर्जी के हाथ से सत्ता गई है, तब से ही पार्टी की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आई है. ममता बनर्जी को भी लगातार झटके पर झटके लग रहे है और स्थिति ऐसी हो गई है कि TMC के अंदर ही तीन गुट बन गए है. इसी बीच बागी विधायक गुट ने एक बड़ा दांव चल दिया है. बागी गुट के प्रतिनिधियों ने मंगलवार को निर्वाचन आयोग के कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय में खुद को असली TMC होने का दावा किया है. उन्होंने साफ कहा है कि हमारे पास पार्टी के दो तिहाई से अधिक विधायकों का समर्थन है और हम ही असली तृणमूल कांग्रेस है. इस दावे के बाद एक बार फिर सियासी पारा हाई हो गया है. आइए विस्तार से जानते हैं पूरी कहानी.

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निर्वाचन आयोग में खुद को बताया असली TMC!

बीते कल यानी मंगलवार को ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के प्रतिनिधियों ने निर्वाचन आयोग के कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय में TMC की नवगठित राष्ट्रीय समिति से जुड़े दस्तावेज जमा किए. इस दौरान उन्होंने दावा किया कि उनके पास TMC के विधायक का स्पष्ट बहुमत है और पार्टी के 80 में से दो-तिहाई से ज्यादा विधायकों का समर्थ है. बागी गुट के प्रतिनिधियों ने इसी दावे के आधार पर निर्वाचन आयोग के सामने खुद को असली TMC के तौर पर पेश किया है.

'यह एक प्रक्रिया है'- ऋतब्रत बनर्जी

ऋतब्रत बनर्जी ने इस पूरी घटनाक्रम को लेकर मीडिया से बातचीत में कहा है कि, सोमवार को विशेष अधिवेशन के आयोजन और नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन के बाद संवैधानिक प्रक्रिया के तहत दस्तावेजों को निर्वाचन आयोग में जमा किया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि, दस्तावेज पहले ही दिल्ली स्थित निर्वाचन आयोग के मुख्यालय में जमा किए जा चुके हैं और अब उसकी एक कॉपी क्षेत्रीय कार्यालय में जमा की गई है. विशेष अधिवेशन और नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन के बाद यह एक सामान्य प्रक्रिया है.

चुनाव आयोग करेगा अंतिम फैसला!

पार्टी के नेतृत्व को लेकर चल रहे विवाद पर ऋतब्रत बनर्जी ने कहा है कि, अंतिम फैसला निर्वाचन आयोग ही करेगा. उन्होंने कहा कि, 'अगर दोनों पक्षों ने अलग-अलग सूचियां जमा की है, तो चुनाव आयोग उसकी जांच करेगा और फिर सही फैसला लेगा. इसलिए प्रक्रिया पूरी होने तक किसी प्रकार का अनुमान लगाने का कोई मतलब नहीं है.' वहीं TMC के चुनाव चिह्न को लेकर किए गए सवाल पर बागी गुट के नेताओं ने दावा किया है कि वे पार्टी का मूल प्रतिनिधित्व कर रहें है, इसलिए अलग से मान्यता मांगने का कोई सवाल ही नहीं उठता है.

ममता को हटाकर अरूप रॉय को बनाया पार्टी अध्यक्ष

बागी गुट ने खुद को असली TMC के दावे से पहले सोमवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है. सोमवार को बागी गुट के विधायकों ने अपने नेता ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में एक बैठक की. इस बैठक में ममता बनर्जी को पार्टी के अध्यक्ष पद से हटा दिया और उनकी जगह अरूप रॉय को TMC का नया अध्यक्ष बनाया. इसके अलावा रथिन घोष, सबीना यास्मीन और फिरहाद हकीम को पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया है.(पढ़ें पूरी खबर)

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