'दलबदलुओं को नकारें...' चुनावी नारा देने वाली पार्टी ही बनी TMC के बागियों का सहारा, जानिए इसका पूरा इतिहास

TMC Rebel MPs News: पश्चिम बंगाल में TMC के 20 बागी सांसदों ने NCPI में विलय का ऐलान कर दिया है. कभी 'दलबदलुओं को नकारें' का नारा देने वाली नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया अब तृणमूल कांग्रेस के बागी नेताओं का नया ठिकाना बन गई है. जानिए NCPI का इतिहास, पार्टी का चुनाव चिह्न, त्रिपुरा से लेकर 20 सांसदों तक का सफर और इस राजनीतिक समीकरण के पीछे की पूरी कहानी.

West Bengal Politics
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सौरव कुमार

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त तूफान आया हुआ है. विधानसभा चुनाव में TMC की करारी हार के बाद पार्टी को लगातार झटके लग रहे है. इसी बीच TMC के 28 लोकसभा सांसदों में 20 सांसदों ने बागी होकर NCPI यानी नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया में विलय का ऐलान कर दिया है. रविवार को बागी सांसदों के एक गुट ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर उन्हें इस विलय का एक आधिकारिक पत्र भी सौंप दिया है. बागी सांसदों की अगुवाई करने वाली काकोली घोष दस्तीदार ने संसद में अलग बैठने की व्यवस्था की भी मांग की है. इस फेर-बदल के साथ ही सवाल उठने लगे है कि क्या है NCPI का इतिहास और क्यों 'दलबदलुओं का नकारें' वाली पार्टी ने TMC के बागियों को सहारा दिया है. विस्तार से जानिए पूरी कहानी.

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'NDA के साथ मिलकर करेंगे काम'

बीते कल TMC के बागी सांसद गुट के 17 सांसद केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के घर पहुंचे और वहां पर लगभग 2 घंटे तक बैठक चली. इसी बैठक के बाद ये सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिले और वहां पर NCPI पार्टी में विलय करने का ऐलान किया. उन्होंने दावा किया कि उनके पास 20 सांसद है जो कि दो-तिहाई से भी ज्यादा है. TMC के बागी सांसद गुट की अगुवाई करने वाली काकोली घोष ने कहा कि, हम पीएम मोदी के नेतृत्व में NDA के साथ मिलकर काम करेंगे. वहीं बागी सांसद सुदीप बंदोपाध्याय और शताब्दी रॉय ने कहा कि उनका गुट पहले ही NCPI में विलय कर चुका है. 

कब बनी थी NCPI और क्या है चिह्न?

NCPI(नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया) त्रिपुरा की एक रजिस्टर्ड, लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है. इस पार्टी का गठन त्रिपुरा विधानसभा चुनाव से कुछ सप्ताह पहले 20 जनवरी 2023 को हुआ था. चुनाव आयोग ने इसे गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत किया था. NCPI का चुनाव चिह्न पेन निब यानी कलम की नोक है. आपको बता दें कि बंगाल की राजनीति में उठा-पटक के बीच 13 मई को उत्तिया कुंडू ने सीएम सुभेंदु अधिकारी के साथ एक तस्वीर भी शेयर की थी.

चुनाव आयोग के डेटा के मुताबिक, पार्टी को केवल 1.13 लाख रुपए का चंदा मिला था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक NCPI को एक दंपत्ति उत्तिया कुंडू और शेउली कुंडू ने शुरू किया था. उत्तिया कुंडू पार्टी के अध्यक्ष है वहीं शेउली कुंडू पार्टी की कोषाध्यक्ष है. वहीं NCPI के पते पर पंजीकृत दो सगंठनों में शेउली कुंडू निदेशक(डायरेक्टर) है. पार्टी का रजिस्टर्ड पता बंगाल के हावड़ा के बानीपुर क्षेत्र में बताया रहा है. साथ ही पार्टी ने अपना चुनवी नारा 'अपने अधिकारों को बचाने के लिए दलबदलुओं को नकारें' रखा था.

त्रिपुरा में नहीं खुला पार्टी का खाता

पार्टी भले ही बंगाल में रजिसटर्ड है, लेकिन त्रिपुरा से उन्होंने अपना पहला चुनाव लड़ा था. त्रिपुरा में NCPI का सारा काम शांतनु डे संभालते रहे. त्रिपुरा चुनाव में पार्टी ने 7 उम्मीदवार मैदान में उतारे, लेकिन 4 उम्मीदवारों का नामांकन पत्र खारिज कर दिया गया. फिर पार्टी ने अपने चुनाव चिह्न पर 2 सीटों पर चुनाव लड़ा और एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार को अपना समर्थन दिया, जहां छवामनु सीट पर 536 वोट और कैलाशहर सीट पर 286 वोट मिले. वहीं निर्दलीय उम्मीदवार को 376 वोट मिले थे. इस चुनाव के बाद पार्टी लगभग गायब ही गई थी.

0 से 20 सांसदों तक का सफर!

त्रिपुरा चुनाव के बाद पार्टी एक्टिव नहीं थी. वहीं शांतनु डे पत्रकारों से बातचीत में कहा कि 2026 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी चुनाव लड़ना चाहती थी, लेकिन संसाधनों की कमी की वजह से यह नहीं हो पाया. 

लेकिन अब पार्टी की स्थिति पूरी तरह बदलते हुई दिखाई दे रही है. NCPI ने भले ही 2024 में लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन अब उनके पास 20 सांसद है. हालांकि इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं इस बात की हो रही है कि 'दलबदलुओं को नकारें' नारा देने वाली पार्टी ने आखिर बागियों को क्यों सहारा दिया? इस पर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह दोनों के लिए जरूरी था, क्योंकि ऐसे में बागी सांसदों पर दल-बदल का कानून भी लागू नहीं होगा और इन बागी सांसदों के पास एक नाम हो जाएगा. साथ ही NCPI अपना अस्तित्व बचाने में भी सफल हो जाएगी.

ओम बिरला से मिलने के बाद काकोली घोष का ऐलान- '20 TMC सांसद अलग पार्टी में कर रहे विलय, NDA के साथ करेंगे काम'

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