पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के हाथों मिली शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर की कलह अब खुलकर सड़कों पर आने लगी है. पार्टी के अंदर चल रही इस बगावत के संकेत उस वक्त साफ हो गए, जब चुनाव के बाद आयोजित टीएमसी के पहले ही बड़े विरोध प्रदर्शन से आधे से ज्यादा विधायक गायब रहे. इतना ही नहीं, दो स्थानीय नगरपालिकाओं में पार्षदों के सामूहिक इस्तीफे ने ममता बनर्जी के खेमे में हड़कंप मचा दिया है.
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जब धरने पर पहुंचे सिर्फ 36 विधायक
TMC ने राज्य की नई सरकार द्वारा की जा रही चुनाव बाद हिंसा, बुलडोजर एक्शन और फुटपाथ दुकानदारों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के विरोध में एक बड़े प्रदर्शन का खाका तैयार किया था. विधानसभा परिसर में बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के पास आयोजित इस धरने में पार्टी के कुल 80 विधायकों में से केवल 36 विधायक ही पहुंचे.44 विधायकों की यह रहस्यमयी अनुपस्थिति उस वक्त सामने आई है जब पार्टी अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए संघर्ष कर रही है.
दरअसल, यह नाराजगी अचानक नहीं बढ़ी है.इससे पहले 19 मई को कालीघाट में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की अगुवाई में हुई आंतरिक बैठक से भी करीब 15 विधायक नदारद थे.उस बैठक में मौजूद कुछ विधायकों ने नेतृत्व की रणनीति पर सीधे सवाल उठाते हुए कहा था कि बंद कमरों की बैठक से जनता का विश्वास दोबारा नहीं जीता जा सकता.सूत्रों के मुताबिक, कोलकाता के दो और हावड़ा के एक विधायक ने तो वोटिंग से महज दो दिन पहले जहांगीर खान के चुनाव से हटने और उनके खिलाफ कोई एक्शन न लिए जाने पर आलाकमान को घेरा था, जिसे परोक्ष रूप से अभिषेक बनर्जी पर निशाने के तौर पर देखा जा रहा है.
पार्षदों का सामूहिक इस्तीफा
विधायकों की इस खींचतान के बीच उत्तर 24 परगना जिले से टीएमसी के लिए एक और बेहद बुरी खबर आई.यहां की दो प्रमुख नगरपालिकाओं- कांचरापाड़ा और हलीशहर में पार्टी पूरी तरह बिखरती नजर आ रही है.
- कांचरापाड़ा नगरपालिका: यहां कुल 24 पार्षदों में से 15 ने एक साथ अपने पदों से इस्तीफा दे दिया.
- हलीशहर नगरपालिका: यहां के कुल 23 पार्षदों में से 16 ने सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया, जिनमें 5 महिला पार्षद भी शामिल हैं.
हलीशहर में 20 मई की दोपहर डिप्टी चेयरमैन की मौजूदगी में पार्षद राजू साहनी के नेतृत्व में एक आपात बैठक बुलाई गई, जिसके तुरंत बाद इन 16 पार्षदों ने अपने इस्तीफे सौंप दिए.हालांकि, चेयरमैन शुभंकर घोष ने फिलहाल इस्तीफा नहीं दिया है.
क्या बीजेपी में शामिल होंगे बागी?
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे बीजेपी की रणनीति को अहम माना जा रहा है.सूत्रों के मुताबिक, बीजपुर से बीजेपी विधायक सुदीप्त दास ने हाल ही में इन नगरपालिका अधिकारियों के साथ एक गुप्त बैठक की थी, जिसके बाद 17 मई को कल्याणी में हुई टीएमसी पार्षदों की बैठक में इस्तीफे का यह बड़ा फैसला लिया गया.
इस्तीफा देने वाले सभी 16 पार्षदों की सूची जारी करते हुए बीजेपी विधायक सुदीप्त दास ने कहा, "मैं स्थानीय जनता को आश्वस्त करना चाहता हूं कि पार्षदों के हटने से नगर पालिका के कामकाज और नागरिक सुविधाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा." इस पूरे सियासी ड्रामे के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि इस्तीफा देने वाले पार्षद बहुत जल्द बीजेपी का दामन थाम सकते हैं.वहीं, इस बड़े संकट पर टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व ने फिलहाल पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है.
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