कभी ममता के वफादर तो अब बागी गुट के साथ...कौन हैं अरूप रॉय, जिन्हें ऋतब्रत बनर्जी ने बनाया TMC का नया अध्यक्ष?

TMC New President Arup Roy: पश्चिम बंगाल में TMC के भीतर जारी सियासी संकट के बीच बागी गुट ने बड़ा फैसला लेते हुए ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटाकर वरिष्ठ नेता अरूप रॉय को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया है. जानिए कौन हैं अरूप रॉय, कैसे वह ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में शामिल हुए, उनकी राजनीतिक यात्रा क्या रही और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट में उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई.

TMC New President Arun Roy
TMC New President Arun Roy

कुबूल अहमद

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पश्चिम बंगाल में जब से विधानसभा चुनाव के नतीजे आए और वहां ममता बनर्जी की करारी हार हुई, तब से उठा-पटक शुरु हैं. हालात ऐसे बन गए है कि जिस TMC के पास 15 सालों तक सत्ता थी, वह अब तीन गुटों में बंट गई है. पहला गुट बागी विधायकों का है जिन्होंने ऋतब्रत बनर्जी को अपना चुना, दूसरा बागी लोकसभा सांसदों का है जो NCPI में विलय कर गए और तीसरा गुट वो है जो फिलहाल ममता के साथ खड़ा है. अब इन्हीं हलचल के बीच TMC पर नियंत्रण की नई लड़ाई तेज हो गई है.

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बीते कल यानी सोमवार को बागी विधायक गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कोलकाता में एक बैठक का आयोजन किया, जिसमें की TMC की नई वर्किंग कमेटी बनाई गई. इस दौरान पार्टी के अध्यक्ष पद से ममता बनर्जी को हटाने का फैसला लिया गया. साथ ही अरूप रॉय को TMC का नया अध्यक्ष बनाया गया. हालांकि ऋतब्रत ने यह भी कहा कि ममता दीदी चाहें तो वह हमारी मुख्य सलाहकार बन सकती है. लेकिन इस फेर-बदल के बीच चर्चाएं इस बात की हो रही है कि आखिर अरूप रॉय हैं कौन, जिन्हें TMC का नया अध्यक्ष बनाया गया है. तो आइए विस्तार से जानते हैं पूरी बात.

कौन हैं अरूप रॉय?

पश्चिम बंगाल की राजनीति में अरूप रॉय एक जाने-पहचाने शख्सियत हैं. अरूप रॉय का जन्म पश्चिम बंगाल में हावड़ा हुआ और उन्होंने छात्र जीवन से ही राजनीति में कदम रख दिया है. उनकी पॉलिटिकल एंट्री कांग्रेस के छात्र संगठन से जुड़ने के बाद हुई. फिर 1990 के दशक में उनकी असली सियासी पारी की शुरुआत हुई जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस के अलग होकर 1998 में 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' यानी TMC का गठन किया.

तब अरूप रॉय ने अपनी वफादारी निभाते हुए ममता बनर्जी के संघर्ष के दिनों में काफी साथ निभाया था. उन्होंने हावड़ा जिले के अंदर तृणमूल कांग्रेस की जड़ों को मजबूत करने के लिए कड़ा जमीनी संघर्ष किया, जिसके बाद वह ममता बनर्जी के भरोसेमंद लोगों में शामिल हो गए.

ममता सरकार में हर बार बने मंत्री

साल 2011 में पश्चिम बंगाल में 34 साल पुराने वामपंथी शासन का अंत हुआ और ममता बनर्जी सत्ता में आई. उस वक्त अरूप रॉय 'हावड़ा मध्य' विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर विधायक बने. पहले से ही ममता बनर्जी के करीबी, भरोसेमंद और उनके संघर्ष के कारण उन्हें पहली कैबिनेट में जगह मिली और वे 'कृषि विपणन' मंत्री बनाए गए. इसके अलावा वो सहकारिता जैसे प्रमुख मंत्रालय भी संभाल चुके है. साथ ही अरूप रॉय ममता की हर सरकार में मंत्री बने है.

संगठन के माहिर, 4 बार से लगातार विधायक 

साल 2011 में पहली बार चुनाव जीतने के बाद अरूप रॉय ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. 2011, 2016, 2021 और यहां तक की 2026 में भी उन्होंने चुनाव जीता और TMC से विधायक बने. बताया जाता है कि अरूप रॉय ने अपनी सादगी से संगठनात्मक पकड़ और हावड़ा जिले की राजनीति पर मजबूत पकड़ बना रखा है. यही वजह है कि जब 2026 में TMC बुरी तरह हारी लेकिन अरूप रॉय की सीट पर कोई असर नहीं पड़ा. हालांकि अब समीकरण थोड़े बदल गए है और फिलहाल वो ऋतब्रत बनर्जी वाले बागी गुट में शामिल हो गए, जिसके बाद ममता बनर्जी को हटाकर बागी गुट ने नया अध्यक्ष बना दिया है.

अरूप रॉय की सबसे बड़ी खासियत!

ममता बनर्जी के करीबी और भरोसेमंद होने के साथ-साथ अरूप रॉय हावड़ा जिले में TMC का एक मजबूत पिलर माने जाते हैं. पिछले काफी समय से वे TMC के हावड़ा जिला अध्यक्ष भी रहें और जब से स्थानीय राजनीति में कोई कलट होता तो वह आराम से उस समस्या का समाधान कर देते. इसलिए उन्हें अक्सर पार्टी का 'संकटमोचक' भी कहा जाता है.

इसके अलावा अरूप रॉय की सबसे बड़ी खासियत उनका जमीनी जुड़ाव है. वे हावड़ा के लोगों के लिए हमेशा मौजूद रहते है, जिसकी वजह से लोगों के बीच उनकी छवि 'माटी के नेता' की है. साथ ही जब अरूप रॉय सहकारिता मंत्री थे तब उन्होंने ग्रामीण बंगाल के आर्थिक ढांचे को मजबूत करने के लिए एक बड़ी भूमिका निभाई थी.

किसे-किसे मिली जिम्मेदारी?

सोमवार को हुए TMC के बागी गुट के विधायकों की बैठक में TMC के नए संगठनात्मक स्ट्रक्चर का ऐलान किया. अरूप रॉय को राष्ट्रीय अध्यक्ष तो रथिन घोष, सबीना यास्मीन और फिरहाद हकीम को पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया है. साथ ही ऋतब्रत बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा को महासचिव के तौर पर नियुक्त किया है. वहीं कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी बागी विधायक अखरुज्जमान अंसारी को सौंपी गई है.

ऋतब्रत बनर्जी ने इस बैठक को लेकर साफ दावा किया है कि यह मीटिंग पार्टी संविधान के तहत ही आयोजित की गई है और साथ ही नई वर्किंग कमेटी का ऐलान भी उसी के तहत किया है. जल्द ही इसकी जानकारी चुनाव आयोग को दी जाएगी. साथ ही नई वर्किंग कमेटी जल्द ही जिला समितियों, राज्य इकाई और प्रवक्ताओं के नाम का ऐलान भी कर देगी.

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