संसद या विधानसभा में कौन कहां बैठेगा-यही सत्ता का खेल है. जो सत्ता में है, वो स्पीकर के राइट हैंड वाले बेंच पर बैठेगा. जो हारा हुआ है, विपक्ष वो स्पीकर के लेफ्ट हैंड वाली बेंच का हकदार बनता है. चुनाव इसलिए तो होते हैं कि कौन लेफ्ट जाएगा, कौन राइट में जाएगा. तमिलनाडु विधानसभा में एक विधायक की सीट क्या बदली, उससे थलापति विजय की सरकार की बुनियाद हिलने का संकेत मान लिया गया है. अकेली एक सीट का संग्राम ये है कि कल तक जो कांग्रेस विधायक थलापति विजय के साथ सत्ता पक्ष में बैठ रही थीं, उन्हें स्पीकर ने अचानक उठाकर विपक्ष की बेंच में बिठा दिया. कागजों पर इसे सिर्फ 'प्रोटोकॉल' कहा जा रहा है, लेकिन तमिलनाडु की राजनीति में सी. जोसेफ विजय और कांग्रेस के बीच दरार का सबसे बड़ा सबूत माना जा रहा है.
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कौन हैं थारहाई कुथबर्ट?
जिस विधायक की सीट सत्ता पक्ष से विपक्ष में कर दी गई, वो हैं थारहाई कुथबर्ट. तमिलनाडु कांग्रेस की पुरानी और जिम्मेदार नेता हैं, जो कन्याकुमारी जिले के कोलाचेल (Colachal) सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचीं. उन्हें बड़ा प्रमोशन ये मिला कि उन्हें तमिलनाडु में कांग्रेस विधायक दल की नेता चुना गया है, लेकिन खेल ये हुआ कि विजय की सरकार में शामिल कांग्रेस के विधायकों की नेता बनते ही उनकी अकेले की सीट सत्ता की बेंच से दूर विपक्ष की साइड कर दी गई. स्पीकर जे.सी.डी. प्रभाकर कह रहे हैं कि ये विधानसभा का प्रोटोकॉल है. पार्टी विधायक दल की नेता यानी फ्लोर लीडर होने के नाते उन्हें फ्रंट रो दी गई है. कांग्रेस की सिफारिश पर ही ये किया गया है. अब तक थारहाई कुथबर्ट TVK और कांग्रेस विधायकों के साथ सत्ता पक्ष की ओर बैठ रही थीं.
राहुल गांधी या विजय, पीएम चेहरे पर क्यों छिड़ी बहस?
सीट की अदला-बदली की कहानी जुड़ रही है इस डिबेट से कि राहुल गांधी देश के अगले पीएम होंगे या थलापति विजय. कुछ वक्त से तमिलनाडु में TVK ने कैंपेन चलाया हुआ है विजय को पीएम बनाने के लिए. पलटवार में कांग्रेस वालों ने राहुल गांधी फॉर पीएम का कैंपेन तेज किया. ये सब चल ही रहा था कि विजय सरकार के पर्यटन मंत्री और कांग्रेस विधायक एस. राजेश कुमार ने धमाका कर दिया, ये कहकर कि 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए राहुल गांधी ही प्रधानमंत्री पद के इकलौते और अंतिम उम्मीदवार हैं. अगर हमारी सहयोगी पार्टी TVK राहुल गांधी की उम्मीदवारी को स्वीकार नहीं करती है, तो मैं और मेरे साथी उच्च शिक्षा मंत्री पी. विश्वनाथन तमिलनाडु कैबिनेट से तुरंत इस्तीफा दे देंगे और हम सरकार से अपना समर्थन वापस ले लेंगे.
विवाद के बाद बदली थारहाई की सीट
जैसे ही ये विवाद गरमाया, वैसे ही थारहाई कुथबर्ट की सीट बदली गई और वो भी विपक्ष में भेज दी गईं. चूंकि थारहाई कुथबर्ट पहले सत्तापक्ष (TVK विधायकों) के ब्लॉक में बैठती थीं और ठीक एक दिन पहले ही दोनों पार्टियों में पीएम चेहरे को लेकर विवाद हुआ था, इसलिए राजनीतिक विश्लेषक इसे दोनों दलों के बीच बढ़ती दूरी के रूप में देख रहे हैं.
इसे दो तरीके से देखा जा रहा है. एक वही कि फ्लोर लीडर बनने पर उन्हें सम्मान के साथ फ्रंट रो दी गई है. बाकी चार कांग्रेस विधायकों की सीटों में इस तरह का कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है. दूसरी थ्योरी कि विजय सरकार के इशारे पर स्पीकर ने कांग्रेस के केवल एक विधायक को विपक्ष में भेजकर कांग्रेस को मैसेज दिया है कि ज्यादा फड़फड़ाने की जरूरत नहीं है.
फ्लोर लीडर को फ्रंट रो देने का है नियम
विधानसभा में ये स्थापित परंपरा है कि किसी भी मान्यता प्राप्त पार्टी के विधायक दल के नेता को सदन की पहली पंक्ति में ही सीट दी जाती है. थारहाई कुथबर्ट को 13 अगस्त को ही ये जिम्मेदारी मिली है, इसलिए नियम के मुताबिक उन्हें सम्मानजनक फ्रंट रो में जगह दी गई. तकनीकी रूप से इसे संसदीय नियमों का पालन कहा जाएगा.
भले ही यह नियमों के तहत हुआ हो, लेकिन राजनीति में क्रोनोलॉजी और टाइमिंग बहुत मायने रखती है. ठीक एक दिन पहले कांग्रेस मंत्री ने धमकी दी थी कि राहुल गांधी को पीएम चेहरा न मानने पर वे सरकार से इस्तीफा दे देंगे. इसके तुरंत बाद कांग्रेस नेता को सत्तापक्ष के घेरे से हटाकर विपक्ष की फ्रंट रो में बिठाना एक साफ संदेश है. TVK यह दिखाना चाहती है कि वह सहयोगियों के दबाव में नहीं झुकेगी. अटकलें ये भी हैं कि भले ही विपक्ष की फ्रंट रो में बैठना एक बड़ा सम्मान है, लेकिन विपक्ष की कतार में जाना प्रतीकात्मक रूप से यह दिखाता है कि TVK और कांग्रेस के बीच अब वैचारिक या रणनीतिक दूरियां आ चुकी हैं.
2029 से पहले ही क्यों शुरू हुई पीएम पद की लड़ाई?
इसमें कई और कहानियां हैं. एक तो 2029 से पहले लोकसभा चुनाव होने नहीं हैं. दूसरा TVK ने अभी तक नेशनल पॉलिटिक्स में एंट्री भी नहीं ली है. न चुनाव में उतरी, न किसी अलायंस के साथ हुई. बस इतना कि तमिलनाडु में कांग्रेस, लेफ्ट जैसी नेशनल पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाई. कांग्रेस ने 5 विधायकों के साथ विजय का समर्थन किया है. जिसमें एस. राजेश और पी. विश्वनाथ कुमार विजय सरकार में मंत्री हैं.
थारहाई कुथबर्ट का राजनीतिक सफर
थारहाई कुथबर्ट (Tharahai Cuthbert) तमिलनाडु कांग्रेस का एक बेहद जमीनी, पढ़ा-लिखा और जुझारू चेहरा हैं, जो वर्तमान में कन्याकुमारी जिले के कोलाचेल (Colachal) निर्वाचन क्षेत्र से विधायक हैं. 51 वर्षीय थारहाई ने अपनी पीएचडी (Doctorate) पूरी की है और राजनीति में आने से पहले वे एक सफल महिला उद्यमी के रूप में 'तराज़ रेडीमेड गारमेंट्स एंड यूनिफॉर्म मैन्युफैक्चरिंग यूनिट' की मालकिन थीं. उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत तटीय इलाकों में शोषित मछुआरा समुदाय और महिलाओं के हक की लड़ाई लड़कर की थी.
जून 2024 में विलावनकोड उपचुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचने वाली थारहाई को 2026 के मुख्य चुनाव में कांग्रेस ने कोलाचेल से उतारा, जहां उन्होंने शानदार जीत दर्ज की.
थारहाई ने दरार की अटकलों को किया खारिज
जब विवाद हद से ज्यादा बढ़ गया और उनकी सीट भी बदल दी गई, तब थारहाई कुथबर्ट ने डैमेज कंट्रोल के लिए कहा कि गठबंधन में कोई दरार नहीं है. खुद मुख्यमंत्री विजय ने राहुल गांधी को 'इंडिया' ब्लॉक का पीएम उम्मीदवार चुना है और वे इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं. विजय को पीएम बनाने की बातें सिर्फ TVK के जमीनी कार्यकर्ताओं का उत्साह हैं, पार्टी नेतृत्व का आधिकारिक स्टैंड नहीं है.
कौन हैं एस. राजेश कुमार?
एस. राजेश कुमार तमिलनाडु सरकार में पर्यटन मंत्री हैं. कांग्रेस के आक्रामक राजनेता हैं, वो भी कन्याकुमारी जिले से आते हैं. किल्लियार सीट से लगातार तीसरी बार विधायक चुने गए हैं. पेशे से वकील राजेश कुमार इससे पहले तमिलनाडु विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता भी रह चुके हैं. राहुल गांधी की भक्ति में उन्होंने इतना कुछ बोल दिया कि विजय और कांग्रेस का मामला विवादों में पड़ गया. पर्यटन मंत्री राजेश कुमार के सुर में सुर मिलाते हुए कैबिनेट मंत्री पी. विश्वनाथन ने भी कह दिया कि राहुल गांधी ही इंडिया ब्लॉक के पीएम उम्मीदवार हैं.
आढव अर्जुन के बयान से शुरू हुई थी असली चिंगारी
वैसे पूरे विवाद के लिए राजेश कुमार अकेले जिम्मेदार नहीं हैं. विवाद की असली चिंगारी TVK के बड़े नेता और विजय के मंत्री आढव अर्जुन के बयान से भड़की थी. उन्होंने एक सार्वजनिक मंच से कहा था: "देश के सबसे शीर्ष संवैधानिक पद (प्रधानमंत्री) पर अब तमिलनाडु के किसी नेता को बैठना चाहिए."
उनके इसी बयान के बाद TVK के कार्यकर्ताओं और अन्य नेताओं ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को 2029 का पीएम उम्मीदवार बताना शुरू कर दिया था.
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