पंजाब में हुई एक सनसनीखेज हत्या के बाद से राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है. इस हाई-प्रोफाइल मामले में बढ़ते जन आक्रोश और विपक्षी दलों के भारी दबाव के बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एक्शन लेते हुए मामले की जांच सीबीआई (CBI) से कराने का बड़ा ऐलान कर दिया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे और पीड़ित परिवार से मुलाकात से ठीक कुछ घंटे पहले सरकार के इस फैसले को राजनीतिक गलियारों में डैमेज कंट्रोल के रूप में देखा जा रहा है. अकाली दल, बीजेपी और कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों और पीड़ित परिवार की लगातार यही मांग थी कि इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कौन हैं परविंदर सिंह झोटा और उनके मामले से पंजाब चुनाव पर कितना असर पड़ेगा? विस्तार से जानिए पूरी बात.
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कौन थे परविंदर झोटा और क्या है पूरा मामला?
परविंदर सिंह झोटा एक जाने-माने एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट (नशा विरोधी कार्यकर्ता) थे. वे राज्य में ड्रग माफिया और अवैध रूप से नशा बेचने वालों के खिलाफ अकेले दम पर आवाज उठाते थे. वे न सिर्फ नशा तस्करों से तीखे सवाल करते थे, बल्कि सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो के जरिए उनकी पोल भी खोलते थे, जिससे वे युवाओं और आम जनता के बीच काफी लोकप्रिय हो गए थे. 13 अक्टूबर को मानसा क्षेत्र की एक फार्मेसी दुकान पर दवा मालिक के साथ विवाद के दौरान हुई गोलीबारी में उनकी मौत हो गई थी. हत्या के बाद से ही पूरे पंजाब में भारी गुस्सा है और विभिन्न संगठनों ने राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया था.
आगामी चुनावों और राजनीतिक समीकरणों पर कितना पड़ेगा असर?
पंजाब में विधानसभा चुनाव में अब महज कुछ ही महीनों का वक्त बचा है, ऐसे में परविंदर झोटा हत्याकांड राज्य की राजनीति और आगामी चुनावों के लिहाज से एक टर्निंग पॉइंट बनता जा रहा है. इस घटना ने सीधे तौर पर पंजाब के दो सबसे बड़े और संवेदनशील मुद्दों-'नशा (Drugs)' और 'कानून-व्यवस्था (Law and Order)' पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
नशा मुक्ति के दावों को झटका: आम आदमी पार्टी की सरकार ने पिछले चुनाव में पंजाब को पूरी तरह नशा मुक्त करने का बड़ा वादा किया था. सरकार अपनी 'युद्ध नशियां विरुद्ध' मुहिम को बड़ी उपलब्धि बताती रही है, लेकिन ड्रग्स के खिलाफ लड़ने वाले एक प्रमुख एक्टिविस्ट की दिनदहाड़े हत्या ने सरकार के इन दावों को तगड़ा झटका दिया है.
विपक्ष के हाथ लगा बड़ा हथियार: कांग्रेस के प्रगट सिंह और राजा वडिंग समेत तमाम विपक्षी नेताओं ने इसे सरकार की कानून-व्यवस्था की पूरी नाकामी बताया है. सचिन पायलट समेत कई बड़े नेता भी पीड़ित परिवार से मुलाकात कर चुके हैं, जिससे यह मुद्दा पूरी तरह चुनावी एजेंडे के केंद्र में आ गया है.
चूंकि परविंदर झोटा सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय थे, उनकी हत्या के बाद मालवा क्षेत्र (मानसा) और ग्रामीण इलाकों के वोटर्स में सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ भारी गुस्सा देखा जा रहा है. किसान और मजदूर संगठनों के राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन ने सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.
नशे का गंभीर डेटा और चुनावी भविष्य
सरकारी और आधिकारिक रिपोर्ट्स (जैसे एनसीआरबी और संसदीय समिति) के मुताबिक, पंजाब में एनडीपीएस (NDPS) मामलों की दर राष्ट्रीय औसत से काफी ज्यादा है और राज्य में लाखों लोग नशे की गिरफ्त में हैं. ऐसे माहौल में परविंदर झोटा हत्याकांड ने जनता के बीच इस बहस को फिर से जिंदा कर दिया है कि क्या सरकार वास्तव में नशा माफिया पर लगाम कसने में कामयाब हो पाई है या नहीं. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सीबीआई जांच के ऐलान और राजनीतिक सरगर्मी के बीच यह मुद्दा आगामी चुनाव में किस करवट बैठता है.
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