पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. राज्य की सभी 117 सीटों पर राजनीतिक दलों ने अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है . इसी बीच आए Matrize (मैटराइज) के ओपिनियन पोल ने पंजाब की राजनीति में खलबली मचा दी है . सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है .
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हालांकि, सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) 40 से 45 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभर सकती है, लेकिन बहुमत के आंकड़े (59 सीटें) से काफी दूर है . वहीं, कांग्रेस 35 से 40 सीटें हासिल कर AAP को कड़ी टक्कर देती दिख रही है .
Matrize ओपिनियन पोल: किसे कितनी सीटें और कितना वोट शेयर?
पंजाब में विधानसभा की कुल 117 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए जादूई आंकड़ा 59 है . सर्वे के अनुसार सीटों और वोट शेयर का गणित कुछ इस प्रकार है:
- आम आदमी पार्टी (AAP): 40-45 सीटें (30% वोट शेयर)
- कांग्रेस (Congress): 35-40 सीटें (27% वोट शेयर)
- भारतीय जनता पार्टी (BJP): 22-27 सीटें (16% वोट शेयर)
- शिरोमणि अकाली दल (SAD): 15-25 सीटें (19% वोट शेयर)
- बीएसपी व अन्य: BSP को 2% तथा अन्य के खाते में 6% वोट शेयर जाने का अनुमान है .
Vote Vibe सर्वे में भगवंत मान फिर पहली पसंद
मैटराइज के अलावा Vote Vibe के सर्वे के आंकड़े भी सामने आए हैं, जिसमें आम आदमी पार्टी को 40% और कांग्रेस को 36% वोट शेयर मिलने का अनुमान जताया गया है . वहीं बीजेपी को 12%, अकाली दल को 11% और अमृतपाल सिंह की पार्टी को 7% वोट मिलने की संभावना जताई गई है .
मुख्यमंत्री पद का चेहरा:
सीएम पद की पहली पसंद के रूप में मौजूदा मुख्यमंत्री भगवंत मान सबसे आगे हैं .
- भगवंत मान (AAP): 40% लोगों की पसंद
- चरणजीत सिंह चन्नी (Congress): 20% लोगों की पसंद
क्यों उलझा है पंजाब का चुनावी समीकरण?
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पंजाब का चुनाव इस बार बहुकोणीय (Multi-cornered contest) हो चुका है . विपक्ष में बिखराव का सीधा फायदा आम आदमी पार्टी को मिलता दिख रहा है:
1. विपक्ष का विभाजन: कांग्रेस, बीजेपी, अकाली दल और अन्य धड़े अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं . विपक्षी वोटों के बंटवारे से AAP को कम वोट प्रतिशत पर भी बढ़त मिल सकती है .
2. कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी: मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस में नेतृत्व और आंतरिक कलह (जैसे राजा वड़िंग को लेकर खींचतान) एक बड़ा सिरदर्द बना हुआ है . 2022 की तरह इस बार भी पार्टी अंदरूनी झगड़ों से जूझ रही है .
3. AAP के सामने चुनौतियां: सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर एंटी-इंकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) देखने को मिल रही है . इसके अलावा, राज्य में ड्रग्स (नशा) का मुद्दा आज भी सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है .
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