Punjab Election 2027: इंदिरा गांधी हत्याकांड के दोषी केहर सिंह के बेटे को टिकट, अमृतपाल ने क्यों चला ये बड़ा पंथक दांव?

राजू झा

• 07:13 PM • 13 Aug 2026

Punjab Election 2027: अमृतपाल सिंह की पार्टी अकाली दल वारिस पंजाब दे ने इंदिरा गांधी हत्याकांड की साजिश के दोषी केहर सिंह के बेटे सतवंत सिंह को बस्सी पठाना से टिकट देकर बड़ा पंथक दांव खेला है. जानिए सतवंत सिंह कौन हैं, 1984 से जुड़े तीन परिवारों का इस पार्टी से क्या कनेक्शन है और 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव में अमृतपाल की रणनीति का क्या असर पड़ सकता है.

Punjab Election 2027
सतवंत सिंह
Google CTA

पंजाब में आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल अभी से तेज हो गई है. राज्य की राजनीति में जहां बीजेपी सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी है और कांग्रेस में अंदरूनी गुटबाजी की खबरें सामने आ रही हैं, वहीं तीसरे मोर्चे पर एक बड़ा सियासी दांव खेला गया है. जेल में बंद वारिस पंजाब दे के प्रमुख अमृतपाल सिंह की पार्टी ‘अकाली दल वारिस पंजाब दे’ ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या की साजिश के दोषी केहर सिंह के बेटे सतवंत सिंह को बस्सी पठाना सीट से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है.

Read more!

किसे मिला टिकट और क्या है उम्मीदवार का बैकग्राउंड?

फतेहगढ़ साहिब जिले की बस्सी पठाना सीट से घोषित उम्मीदवार 61 वर्षीय सतवंत सिंह, केहर सिंह के बेटे हैं. ध्यान देने योग्य बात यह है कि ये वो सतवंत सिंह नहीं हैं जिन्हें इंदिरा गांधी हत्याकांड के मामले में फांसी की सजा दी गई थी, बल्कि ये केहर सिंह के बेटे हैं जिनका जन्म मुस्तफाबाद गांव में हुआ था. केहर सिंह दिल्ली में केंद्र सरकार के एक विभाग में कर्मचारी थे, जिन्हें अदालत ने इंदिरा गांधी की हत्या की आपराधिक साजिश में दोषी मानकर मौत की सजा सुनाई थी और 6 जनवरी 1989 को तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी. सतवंत सिंह पहली बार चुनावी राजनीति में कदम रख रहे हैं.

अमृतपाल सिंह के पिता ने की उम्मीदवारी की घोषणा

सतवंत सिंह की उम्मीदवारी का ऐलान अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि 'अकाली दल वारिस पंजाब दे' केवल सत्ता हासिल करने के लिए राजनीति नहीं कर रही है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य पंजाब के हक, पंथक सिद्धांतों और सिख समुदाय के लिए बलिदान देने वाले परिवारों को सम्मान देना है. इस घोषणा के साथ ही 1984 की घटना से जुड़े तीन परिवारों के सदस्य अब वारिस पंजाब दे पार्टी के राजनीतिक मंच पर एक साथ नजर आ रहे हैं.

1984 के घटनाक्रम से जुड़े तीन परिवारों का एक मंच पर जमावड़ा

मौजूदा समय में वारिस पंजाब दे में इंदिरा गांधी हत्याकांड से जुड़े तीन प्रमुख परिवारों की मौजूदगी देखने को मिल रही है. पहले सतवंत सिंह (केहर सिंह के बेटे) जिन्हें बस्सी पठाना से उम्मीदवार बनाया गया है. दूसरे, फरीदकोट से सांसद सरबजीत सिंह खालसा, जो इंदिरा गांधी पर गोली चलाने वाले सुरक्षाकर्मी बेअंत सिंह के बेटे हैं और 2024 के लोकसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीतकर संसद पहुंचे हैं. तीसरे, सुखविंदर सिंह अघवां, जो इंदिरा गांधी के दूसरे हत्यारे सतवंत सिंह के भतीजे हैं और पार्टी के संसदीय बोर्ड में शामिल हैं.

अमृतपाल सिंह की पंथक राजनीति और चुनावी रणनीति

2023 से डिब्रूगढ़ जेल में बंद अमृतपाल सिंह और उनकी पार्टी के पास फिलहाल कोई पारंपरिक ढांचागत संगठन या बड़ा राजनीतिक अनुभव नहीं है. इसलिए पार्टी मुख्य रूप से पंथक वोटों को एकजुट करने की रणनीति पर काम कर रही है. पार्टी को हाल ही में जून में तब बड़ी सफलता मिली थी जब दाखा सीट से विधायक मनप्रीत सिंह अयाली उनके साथ जुड़े थे. इसके अलावा, पार्टी बंदी सिंहों की रिहाई जैसे संवेदनशील पंथक मुद्दों को उठाकर जनता के बीच अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश कर रही है.

पंजाब की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?

शिरोमणि अकाली दल (बादल) के कमजोर पड़ने के बीच पंजाब में पंथक राजनीति के लिए नए समीकरण बन रहे हैं. 1984 की यादों और उनसे जुड़े परिवारों को साथ लाकर अमृतपाल सिंह का संगठन खुद को मुख्य पंथक विकल्प के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रहा है. हालांकि, 2027 के विधानसभा चुनावों में यह पंथक कार्ड वोटों में कितना तब्दील हो पाता है और पार्टी को कितनी चुनावी सफलता मिलती है, यह आने वाला वक्त ही तय करेगा.

यहां देखें वीडियो

सुखबीर बादल पर नांदेड़ में हमला, निहंग ने कृपाण से किया वार; VIDEO आया सामने