पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी कलह और गुटबाजी को शांत करने के लिए पार्टी ने अपनी कवायद तेज कर दी है. पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल पिछले पांच दिनों से पंजाब में डेरा डाले हुए हैं. हालांकि, इन पांच दिनों के भीतर उनकी मुलाकात राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता चरणजीत सिंह चन्नी से नहीं हो पाई थी. लेकिन अब दोनों नेताओं के बीच मुलाकात का रास्ता साफ हो चुका है. माना जा रहा है कि यह अहम बैठक कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह के आवास पर होने जा रही है, जो इस समय पंजाब कांग्रेस की इस पूरी सियासी हलचल के केंद्र बिंदु बने हुए हैं.
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राणा गुरजीत सिंह के घर बनी चन्नी कैंप की रणनीति
पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल से मुलाकात करने और हाईकमान तक अपना संदेश पहुंचाने का पूरा खाका राणा गुरजीत सिंह के आवास पर ही तैयार हुआ है. बीते दिनों राणा गुरजीत सिंह के घर पर ही चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेताओं की एक बड़ी बैठक आयोजित की गई थी.
इस बैठक में सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रगट सिंह, भारत भूषण आशु और पाड़ा साहब जैसे दिग्गज नेताओं ने हिस्सा लिया था. बैठक के बाद यह बात सामने आई कि चन्नी कैंप प्रभारी भूपेश बघेल से मिलने के लिए तैयार है. खुद राणा गुरजीत सिंह ने इस बैठक की पुष्टि करते हुए कहा था कि प्रभारी हमारे अपने हैं और हमें उनके सामने अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, जिसके लिए सभी नेता एकजुट हैं.
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वडिंग ने दी बैठक की जानकारी
इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात को लेकर पंजाब कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने भी बड़ी पुष्टि की है. राजा वडिंग ने बताया कि प्रभारी भूपेश बघेल और चरणजीत सिंह चन्नी के बीच अगले 24 घंटों के भीतर यानी 11 जुलाई को बैठक होने वाली है. वडिंग ने स्पष्ट किया कि बघेल साहब ने उनसे कहा है कि वह पहले अकेले में चन्नी से बातचीत करेंगे और उसके बाद आगे का रुख तय होगा. राजा वडिंग ने उम्मीद जताई है कि आने वाले एक-दो दिनों के भीतर पंजाब कांग्रेस के सभी बड़े नेता एक साथ एक ही मंच पर एकजुट नजर आएंगे.
जानिए कौन हैं राणा गुरजीत सिंह, जो करा रहे हैं मीटिंग फिक्स
चन्नी और बघेल की मुलाकात फिक्स कराने के बाद पंजाब की सियासत में राणा गुरजीत सिंह की चर्चा जोरों पर है. राणा गुरजीत सिंह वर्तमान में कपूरथला विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक हैं और चन्नी के बेहद करीबी माने जाते हैं. वह साल 2012, 2017 और 2022 में लगातार तीन बार कपूरथला से विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं.
इसके अलावा वह 2004 से 2009 तक जालंधर लोकसभा सीट से सांसद भी रहे हैं और पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं. उनके पारिवारिक इतिहास की बात करें तो उनके पिता को उत्तर प्रदेश में नारायण दत्त तिवारी (एनडी तिवारी) को मुख्यमंत्री बनाने में अहम भूमिका निभाने के लिए जाना जाता है. हालांकि, साल 2016 में कुलविंदर सिंह बब्बल पर कथित हमले के आरोप में राणा गुरजीत सिंह के खिलाफ एक आपराधिक शिकायत भी दर्ज हुई थी.
आखिर किस बात को लेकर नाराज हैं चरणजीत सिंह चन्नी?
पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रहे इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष पद को लेकर है. हाल ही में कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब संगठन में जो नई नियुक्तियां की थीं, उनमें अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को एक बार फिर पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर बरकरार रखा गया है. वहीं, लोकसभा सांसद चरणजीत सिंह चन्नी को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया था. चन्नी और उनका पूरा कैंप इस फैसले से बेहद नाखुश है. चन्नी गुट की लगातार यह मांग है कि पंजाब कांग्रेस की कमान चरणजीत सिंह चन्नी को सौंपी जानी चाहिए.
दूसरी तरफ, कांग्रेस का एक धड़ा चन्नी को कमान सौंपने का पुरजोर विरोध कर रहा है. विरोधियों का तर्क है कि कांग्रेस ने साल 2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव चरणजीत सिंह चन्नी के चेहरे पर ही लड़ा था, जिसमें पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा था. उस चुनाव में चन्नी खुद दो अलग-अलग विधानसभा सीटों से मैदान में उतरे थे और दोनों ही सीटों पर चुनाव हार गए थे. अब देखना दिलचस्प होगा कि आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच भूपेश बघेल और चन्नी की इस मुलाकात से पंजाब कांग्रेस का यह अंदरूनी घमासान शांत होता है या नहीं.
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