गाढ़ी कमाई से भला किसको लगाव नहीं होता है. पैसे कैश में हों तो हमेशा उसके चोरी हो जाने की डर लगा रहता है. फिर लोग उसे सेफ करने के लिए अलग-अलग जुगत लगाते हैं. सोते-जागते उसकी हिफाजत करते हैं. पर बालोतरा के किसान ने ऐसा दिमाग लगाया कि उसे सब उल्टा पड़ गया. पैसे चोरों ने तो नहीं चुराए पर जब वो मिले तो किसी काम के नहीं रहे. बैंक ने भी पैसों की हालत देख उसे बदलने से साफ मना कर दिया. अब तो पूरा परिवार सिर पीट रहा है.
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ये कहानी बालोतरा के किसान मांगीलाल मेघवाल की है. उन्होंने जमीन का एक टुकड़ा बेचा. उन्हें 5 लाख रुपए कैश मिले. अब मांगलाल सोचने लगे कि ये पैसे यदि चोर चुरा लेंगे तो भला क्या कर पाएंगे. उनके दिमाग में चोरी का डर ऐसा समाया कि पैसों को एक थैले में रखकर अपने 10 बीघा में फैले खेत में एक स्थान पर गाड़ दिया. काफी वक्त बीत गया पर कभी पैसों की खोज-खबर लेने की नहीं सूझी. अचानक एक दिन याद आया तो वे लगे पैसों को खोजने. 10 बीघे में फैले खेत में खुद पैसे खोजने में जुट गए. खूब पसीने बहा लिए पर पैसे नहीं मिले.
घर में एक कमरा बनने की जरूरत पड़ी तो खुली पोल
इधर मांगीलाल ने इस बात को परिजनों ने छुपाकर रखा. हालांकि कब तक छुपाते एक न एक दिन पोल तो खुलनी ही थी. मकान में एक कमरा बनाने की योजना बनी तो घर वालों ने मांगी लाल से वो 5 लाख रुपए मांगे. पहले तो उन्होंने टालमटोल किया फिर बता दिया कि वे पैसे 10 बीघे वाले बड़े खेत में गाड़कर भूल गए हैं. पैसे किधर गड़े हैं ये याद नहीं है.
पूरा परिवार पैसे ढूंढने में लग गया
इधर पूरा परिवार पैसे ढूंढने लगा. पत्नी और बेटों ने खेतों की नीराई-गुड़ाई के नाम पर खूब खोदा पर पैसे कहीं नहीं मिले. आखिरकार थक हारकर परिवार ने पैसों की उम्मीद छोड़ दी. उन्हें लगा कि पैसे खोदकर कोई ले गया. खैर दिन बीते और बारिश का महीना आया. खेतों में जुताई शुरू हुई. इधर मांगीलाल ने भी अपने खेत की जुताई करानी शुरू की. जुताई के वक्त ही वो थैली बाहर निकली जिसमें 5 लाख कैश थे.
थैली देखकर खुश हुए मांगी पर नोट देख होश उड़े
मांगी की नजर जैसे ही थैले पर पड़ी उनकी खुशी का ठिकाना न रहा. वे इस थैले को पहचान चुके थे. हालांकि ये खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी. जैसे ही मांगी ने थैला खोला तो उनके तो होश फाख्ता हो गए. थैले में नोट तो थो पर आधे-अधूरे. दीमकों ने नोटों को चट कर रखा था. 500-500 के नोट थे और पर टुकड़े और चूरे में.
बैंक गए पर मायूसी हाथ लगी
इधर पत्नी और बेटों को ये खबर पता चली तो उनके भी पांवों तले जमीन खिसक गई. किसी ने सलाह दी कि बैंक जाइए. वे नोट देखकर शायद दूसरे नोट दे देंगे. मांगीलाल और उनके परिवार वालों के मन में फिर उम्मीद की किरण जगी. वे थैला लेकर पचपदरा स्थित एसबीआई की शाखा में पहुंचे. वहां उन्होंने पूरी कहानी बताई. बैंक ने नोट बदलने से इनकार करते हुए बालोतरा स्थित मुख्य शाखा में जाने को कहा. वहां भी उन्हें मायूसी ही हाथ लगी. कुल मिलाकर बैंक ने नोट बदलने से इनकार कर दिया. मांगीलाल के पुरखों की जमीन भी गई और उससे मिला रकम भी मिट्टी में मिल गया.
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