क्या 60, 70 या 80 की उम्र में दिल धड़कना बंद कर देता है? क्या उम्र ढलने के साथ खुश रहने का हक भी खत्म हो जाता है? भीलवाड़ा में आयोजित एक अनूठे 'जीवन साथी परिचय सम्मेलन' ने इन सवालों का जवाब 'ना' में दिया है. शहर के नागौरी गार्डन स्थित माहेश्वरी हॉल में एक ऐसा नजारा दिखा जिसने साबित कर दिया कि प्यार की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती.
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80 की उम्र में हमसफर की तलाश
इस खास आयोजन में देशभर से करीब 80 से ज्यादा बुजुर्ग महिलाएं और पुरुष शामिल हुए. इनमें 50 से 80 साल तक के लोग थे, जो अहमदाबाद, दिल्ली, जयपुर, कोटा और बीकानेर जैसे शहरों से अपने अकेलेपन को दूर करने की उम्मीद लेकर आए थे. यहाँ पहुंचे लोगों में कोई विधवा था, कोई तलाकशुदा, तो कोई ऐसा जिसने कभी शादी ही नहीं की थी.
गुजरात के नट्टू भाई पटेल की अनूठी पहल
इस सम्मेलन का आयोजन गुजरात के 'अनुबंध फाउंडेशन' द्वारा किया गया. इस संस्था की नींव नट्टू भाई पटेल ने रखी थी. नट्टू भाई ने 2001 के भूकंप के बाद खुद अकेलेपन के दर्द को महसूस किया और फिर दूसरों का घर बसाने का संकल्प लिया. वे अब तक लगभग 200 बुजुर्गों की शादियां करवा चुके हैं और उनके पास 15,000 से ज्यादा लोगों का रजिस्ट्रेशन है.
समाज की सोच में आ रहा बदलाव
सम्मेलन में आए बुजुर्गों ने खुलकर अपनी बात रखी. एक बुजुर्ग ने कहा, "पैसा सबके पास है, लेकिन खुशियां बांटने के लिए एक पार्टनर जरूरी है." दिलचस्प बात यह है कि कई बुजुर्गों के साथ उनके बच्चे (बेटे और बेटियां) भी आए थे, जो चाहते हैं कि उनके माता-पिता अकेलेपन के बजाय एक सम्मानजनक और सुखद जीवन बिताएं. मारवाड़ी समाज जैसी रूढ़िवादी पृष्ठभूमि से आने वाली महिलाओं ने भी इस पहल की सराहना की और इसे अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का एक 'गोल्डन चांस' बताया.
क्यों जरूरी है उम्र के इस पड़ाव पर साथी?
अक्सर बुजुर्ग लोकलाज के डर से अपनी इच्छाओं को दबा देते हैं. उन्हें डर होता है कि बच्चे या रिश्तेदार क्या कहेंगे. लेकिन नट्टू भाई की संस्था ऐसे लोगों को एक सुरक्षित मंच प्रदान करती है जहाँ वे बिना किसी हिचकिचाहट के बातचीत कर सकें और यदि मन मिले तो विवाह के बंधन में बंध सकें.
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