धौलपुर: प्रिंसिपल के ट्रांसफर के विरोध में पूरा गांव एकजुट, वापसी की मांग पर अड़े ग्रामीण, दो दिन से स्कूल नहीं पहुंचे छात्र

हनीफ खान

• 04:42 PM • 28 Jul 2026

Rajasthan News: राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के फोगड़ी गांव में एक सरकारी स्कूल पूरी तरह सूना पड़ गया है. लोकप्रिय प्रिंसिपल के तबादले के विरोध में ग्रामीणों और अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया. फर्जी बिल पर दस्तखत से इनकार को तबादले की वजह बताया जा रहा है, जिससे विवाद लगातार गहराता जा रहा है.

प्रिंसिपल के तबादले पर फूटा गांव का गुस्सा
प्रिंसिपल के तबादले पर फूटा गांव का गुस्सा
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Didwana Kuchaman school Principal transfer controversy: राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के फोगड़ी ग्राम पंचायत स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालय में इन दिनों एक अनोखा और बड़ा विवाद देखने को मिल रहा है. स्कूल के लोकप्रिय प्रिंसिपल जय सिंह चाहर का तबादला सीधे धौलपुर कर दिया गया है. इस फैसले के बाद से ग्रामीणों और विद्यार्थियों में गहरा रोष व्याप्त है. पहले ग्रामीणों और बच्चों ने स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला लगाकर विरोध जताया था, लेकिन अब उन्होंने पढ़ाई का पूरी तरह बहिष्कार करते हुए बच्चों को घर पर ही रोक लिया है. स्कूल में पिछले दो दिनों से एक भी छात्र पढ़ने नहीं आ रहा है. ऐसे में स्कूल का विशाल परिसर पूरी तरह सुनसान नजर आ रहा है.

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बच्चों की गैरमौजूदगी में शिक्षकों ने शुरू किया श्रमदान

स्कूल में पिछले दो दिनों से एक भी छात्र पढ़ने नहीं आ रहा है. ऐसे में स्कूल का विशाल परिसर पूरी तरह सुनसान नजर आ रहा है. खाली समय में खाली बैठने की बजाय स्कूल के शिक्षकों और उपप्राचार्य गिरधारी जी ने एक मिसाल पेश की है. शिक्षकों ने अपने हाथों में फावड़ा, खस्सी और झाड़ू थाम लिया है. वे बारिश के मौसम में उगी खरपतवार और झाड़ियों की सफाई कर रहे हैं ताकि परिसर में सांप या अन्य जीव-जंतुओं का खतरा न रहे और पेड़-पौधों का रख-रखाव हो सके.

फर्जी बिल पर दस्तखत न करना बना तबादले का कारण

गांव के लोगों और स्थानीय सूत्रों का कहना है कि यह तबादला सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक द्वेष और सजा के तौर पर किया गया है. जानकारी के मुताबिक, स्कूल की छत के जीर्णोद्धार का कार्य हुआ था, जिसमें ठेकेदार ने महज 25 प्रतिशत काम करके लाखों रुपये के फर्जी बिल पास कराने की कोशिश की थी. प्रिंसिपल जय सिंह चाहर ने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई और बिल पर दस्तखत करने से साफ मना कर दिया. जैसे ही तबादलों से बैन हटा, उनका स्थानांतरण सीधे धौलपुर कर दिया गया.

अधिकारियों के आश्वासन के बाद भी नहीं बनी बात

विवाद बढ़ने पर जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) अजीत सिंह, स्थानीय तहसीलदार और बड़वा थाना पुलिस मौके पर पहुंची थी. ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया गया था और अधिकारी ने 12 घंटे के भीतर उच्च अधिकारियों को मामले से अवगत कराने का वादा किया था. हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि 24 घंटे बीत जाने के बाद भी कोई मेल या सूचना आगे नहीं भेजी गई. प्रशासन की इस वादाखिलाफी से ग्रामीणों का गुस्सा और ज्यादा बढ़ गया है.

मांग पूरी होने तक जारी रहेगा बहिष्कार

फिलहाल ग्रामीणों और अभिभावकों का एक ही रुख है कि जब तक प्रिंसिपल जय सिंह चाहर का तबादला निरस्त कर उन्हें वापस इसी स्कूल में पदस्थापित नहीं किया जाता, तब तक एक भी बच्चा स्कूल की दहलीज पार नहीं करेगा. ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े हुए हैं, वहीं शिक्षक बच्चों के लौटने का इंतजार करते हुए परिसर में श्रमदान के जरिए समय का सदुपयोग कर रहे हैं. अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस गतिरोध को खत्म करने के लिए क्या कदम उठाता है.

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