सिर पर हेलमेट,चारों तरफ पुलिस का पहरा और हर किसी की नजरें सिर्फ एक ही चेहरे पर! राजस्थान के जोधपुर से आई इन तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है. तस्वीर में दिख रही ये महिला कांग्रेस की तेजतर्रार नेता और पूर्व विधायक दिव्या मदरेणा हैं. मथानिया नगर पालिका चुनाव के दौरान दिव्या मदरेणा जब इस अनोखे अंदाज में वोट डालने पहुंचीं तो वहां मौजूद हर शख्स दंग रह गया. आखिर एक कद्दावर नेता को वोट डालने के लिए हेलमेट क्यों पहनना पड़ा? क्या ये कोई सियासी पैंतरा था या फिर जान का खतरा? और कौन हैं दिव्या मदरेणा. आइए, इस रिपोर्ट में विस्तार से समझते हैं.
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दरअसल 22 सितंबर को जोधपुर की मथानिया नगरपालिका में उपाध्यक्ष यानी डिप्टी चेयरमैन पद का चुनाव चल रहा था. हालांकि दिव्या मथरेणा के हेलमेट पहन के आने की वजह छिपी है ठीक एक दिन पहले. 22 सितंबर से एक दिन पहले मथानिया नगर पालिका अध्यक्ष पद का चुनाव था. उस दौरान जबरदस्त राजनीतिक ड्रामा और तनाव देखने को मिला था. 21 सितंबर की सुबह करीब 10:30 बजे वोटिंग शुरू होने से ठीक पहले माहौल उस वक्त बिगड़ गया, जब कांग्रेस पार्षदों से भरी एक बस मतदान केंद्र के मुख्य गेट तक पहुंच गई . इसे देखकर मौके पर मौजूद भाजपा कार्यकर्ता भड़क गए और विरोध जताने लगे. भाजपा कार्यकर्ताओं का आरोप था कि उनके पार्षदों की गाड़ियों को तो काफी दूर बैरिकेडिंग पर ही रोक दिया गया, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने कांग्रेस पार्षदों की बस को सीधे मेन गेट तक जाने की छूट दे दी . प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए बीजेपी कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी. हंगामे की सूचना मिलते ही कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक दिव्या मदरेणा मौके पर पहुंचीं थी. दोनों तरफ से तीखी नारेबाजी हुई, माहौल गरमा गया और धक्का-मुक्की के साथ-साथ पथराव की आशंका भी बन गई .
खतरे को देखते हुए उठाया ये कदम
दिव्या मदरेणा का कहना है कि इसी हिंसा और पथराव के खतरे को देखते हुए, उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए हेलमेट पहनने का फैसला किया . यानी कोई अचानक हमला कर दे या पत्थर चला दे तो कमसे कम उनका सिर पर तो कोई चोट न आए. हालांकि 21 सितंबर को हुए इस हंगामें के बाद अगले दिन उपाध्यक्ष चुनाव के दौरान पूरे इलाके को छावनी में बदल दिया गया था. जगह-जगह बैरिकेडिंग कर दी गई, गाड़ियों की आवाजाही रोक दी गई और हथियारबंद पुलिस जवानों को तैनात किया गया. पार्षदों को भी सख्त सुरक्षा घेरे में ही अंदर जाने की इजाजत दी जा रही थी. लेकिन दिव्या मदरेणा इतने पर ही शांत नहीं रहीं! उन्होंने सीधे तौर पर स्थानीय पुलिस और प्रशासन को आड़े हाथों ले लिया.
दिव्या मदरेणा का सीधा आरोप है कि स्थानीय बीजेपी विधायक भेरा राम चौधरी के दबाव में आकर प्रशासन काम कर रहा है. उनका कहना है कि पुलिस जानबूझकर उनके कार्यकर्ताओं की गाड़ियों के चालान काट रही है, धरने पर बैठे लोगों से अभद्र व्यवहार कर रही है और एकतरफा कार्रवाई कर रही है. दिव्या मदरेणा मथानिया के इस चुनाव पर पहले दिन से पैनी नजर बनाए हुए हैं और प्रशासन के रवैये को लेकर वो पहले भी धरने पर बैठ चुकी हैं . उनका साफ कहना है कि अधिकारियों का रवैया कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और पक्षपातपूर्ण रहा है .
कांग्रेस के मिली जीत
खैर, इस भारी तनाव, पुलिस-प्रशासन की मुस्तैदी और हेलमेट वाले हाई-वोल्टेज ड्रामे के बीच आखिरकार वोटिंग पूरी हुई. और जब नतीजे आए तो माहौल एकदम बदल गया. उपाध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी जितेंद्र देवड़ा ने 18 वोट हासिल करके एक शानदार जीत दर्ज की. वहीं दूसरी तरफ बीजेपी प्रत्याशी भरत चारण को महज 7 वोट ही मिल सके. आपको बता दें कि इससे पहले अध्यक्ष पद पर भी कांग्रेस ने ही परचम लहराया था. कांग्रेस की लीला देवी ने बीजेपी की इंद्रा देवी को 9 वोटों से हराकर अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया था. यानी मथानिया में अध्यक्ष के बाद अब उपाध्यक्ष पद पर भी कांग्रेस ने अपनी जीत का झंडा गाड़ दिया, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखने को मिला.
कौन है दिव्या मदरेणा
अब आइए जानते हैं उस शख्सियत के बारे में, जिनकी इस एक तस्वीर ने पूरे देश का ध्यान खींच लियाआखिर दिव्या मदरेणा कौन हैं. दिव्या मदरेणा का जन्म 25 अक्टूबर 1984 को जयपुर में हुआ था. वह राजस्थान के एक बेहद प्रभावशाली और प्रतिष्ठित राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखती हैं. उनके दादा, स्वर्गीय परसराम मदरेणा, राजस्थान राजनीति के बहुत बड़े नाम थे और उन्होंने राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं. उनके पिता महिपाल मदरेणा भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य सरकार में मंत्री रह चुके हैं.
दिव्या सिर्फ राजनीतिक विरासत लेकर ही आगे नहीं बढ़ीं, बल्कि पढ़ाई-लिखाई में भी वह काफी आगे रही हैं. उन्होंने इंग्लैंड की मशहूर नॉटिंघम यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स की पढ़ाई की है. पढ़ाई पूरी करके लौटने के बाद, महज 26 साल की उम्र में उन्होंने जोधपुर के ओसियां से जिला परिषद का चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की. इसके बाद साल 2018 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने उन्हें ओसियां सीट से टिकट दिया, जहां से जीतकर वह पहली बार विधायक बनीं . हालांकि, साल 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें बीजेपी के भेरा राम चौधरी से हार का सामना करना पड़ा था. भले ही दिव्या मदरेणा 2023 का विधानसभा चुनाव हार गईं हों, लेकिन कांग्रेस आलाकमान का भरोसा उन पर कायम रहा. हाल ही में पार्टी ने उन्हें एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है. उन्हें AICC यानी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी) की सचिव और जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का संयुक्त प्रभारी बनाया गया है.
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