'मिठाई बांटी, जश्न हुआ...संघर्ष की झूठी कहानी भी सुनाई', 899 रैंक की बताकर वाहवाही लूटने वाले बानसूर के निशांत का दावा निकला फर्जी!

राजस्थान के बानसूर में निशांत कुमार नाम के युवक ने UPSC में 899वीं रैंक का झूठा दावा किया. उसने आगरा के असली कैंडिडेट का रोल नंबर अपने एडमिट कार्ड पर एडिट कर लिया था. नेताओं से सम्मान भी पा लिया, लेकिन QR कोड स्कैन होते ही फर्जीवाड़ा पकड़ा गया.

Nishant Kumar case
Nishant Kumar case

Himanshu Sharma

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राजस्थान के बानसूर में एक युवक ने UPSC परीक्षा पास कर IAS बनने की बात कहकर इलाके में सनसनी फैला दी, लेकिन जांच हुई तो पूरा मामला झूठा निकला. मामला नांगल भाव सिंह गांव के निशांत कुमार का है, जिसने UPSC परीक्षा में 899वीं रैंक आने का झूठा दावा किया था.

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नेताओं से पहना ली माला, ढोल पर निकाला जुलूस

जैसे ही यूपीएससी के नतीजे आए, निशांत ने दावा किया कि उसने 899वीं रैंक हासिल की है. इस खबर के फैलते ही बानसूर में जश्न का माहौल बन गया. ग्रामीणों ने डीजे के साथ उसका भव्य जुलूस निकाला और तहसील स्तर पर उसका स्वागत किया गया. इस दौरान पूर्व मंत्री शकुंतला रावत और बानसूर विधायक देवी सिंह समेत कई दिग्गज नेता उसे बधाई देने पहुंचे और उसकी उपलब्धि की सराहना की.

इतना ही नहीं, निशांत ने माइक पर खड़े होकर अपने 'फर्जी' संघर्ष की झूठी कहानी भी सुनाई कि कैसे उसने बिना कोचिंग के घर बैठे यह मुकाम हासिल किया.

एक QR कोड से पकड़ा गया झूठ

निशांत की पोल तब खुली जब उसके एडमिट कार्ड की बारीकी से जांच हुई. कार्ड पर एक QR कोड बना था, जिसे स्कैन करते ही असली हकीकत सामने आ गई. कोड स्कैन करने पर पता चला कि निशांत का असली रोल नंबर कुछ और ही था और वह तो परीक्षा में फेल हो गया था.

हकीकत यह है कि 899वीं रैंक असल में आगरा के एक दूसरे निशांत कुमार की आई है, जो पहले से ही दिल्ली में सरकारी अफसर हैं. बानसूर वाले निशांत ने सिर्फ नाम एक जैसा होने का फायदा उठाया और एडमिट कार्ड में कांट-छांट कर सबको गुमराह किया.

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