पिता को लकवा, रद्द हुई परीक्षा और बारिश में भीगी ओएमआर शीट... कोटा के आर्यन की डॉक्टर बनने की अनोखी जंग

चेतन गुर्जर

• 11:37 AM • 21 Jul 2026

पिता के लकवे, NEET रद्द होने और बारिश में उत्तर पुस्तिका भीगने जैसी ढेरों विषम परिस्थितियों के बावजूद कोटा के आर्यन मालव ने हार नहीं मानी. अपनी अटूट मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर आर्यन ने दोबारा परीक्षा में 610 अंक हासिल कर डॉक्टर बनने का अपना सपना पूरा किया.

आर्यन मालव
आर्यन मालव
Google CTA

कहते हैं कि जब परिस्थितियां आपको बार-बार नीचे गिराने की कोशिश करें और आप हर बार दोगुनी ताकत से खड़े हो जाएं तो सफलता मिलना पक्का हो जाता है. राजस्थान के कोटा में रहने वाले आर्यन मालव की कहानी इसी बात का जीता जाता उदाहरण है. आर्थिक तंगी, पारिवारिक संकट और किस्मत की मार झेलने के बाद भी आर्यन ने खुद को हारने नहीं दिया और आखिरकार डॉक्टर बनने की दहलीज पर जा पहुंचे.

Read more!

आर्यन की जीवन की कहानी भी एक पिता के संघर्ष से शुरू होती है. मूल रूप से बूंदी के भवानीपुरा गांव के रहने वाले मुरलीधर मालव सालों पहले कोटा आ बसे थे. स्टेशनरी का छोटा-मोटा काम करके वे किसी तरह अपने परिवार का पेट पालते हैं. विनोबा भावे नगर के एक छोटे से किराए के मकान में रहने वाले इस परिवार की आंखें हमेशा बड़े सपने देखती रहीं हैं.

आर्यन के बड़े भाई राज का भी सपना डॉक्टर बनने का था लेकिन परिवार की आय कम और संसाधनों की कमी होने के कारण वो नीट क्लियर नहीं कर पाया. बाद में उन्होंने नर्सिंग की और अब सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं. हालांकि भाई का अधूरा सपना आर्यन की आंखों में आ बसा. जब 10वीं में आर्यन के 94 प्रतिशत अंक आए तो परिवार का भरोसा और गहरा हो गया.

जब मिला किस्मत का सहारा और फिर आया संकट

कोटा जैसी महंगी कोचिंग नगरी में पढ़ाई का खर्च उठाना मालव परिवार के लिए नामुमकिन जैसा था. ऐसे में मोशन एजुकेशन की स्कॉलरशिप लॉटरी योजना उनके लिए वरदान बनकर आई. आर्यन को 70 प्रतिशत स्कॉलरशिप मिली और कोचिंग की शुरुआत हो गई, लेकिन अभी सफर शुरू ही हुआ था कि आर्यन के पिता को अचानक पैरालिसिस अटैक आ गया. घर पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा लेकिन ऐसे वक्त में बड़े भाई राज ने पूरे घर की कमान संभाली, ताकि आर्यन की पढ़ाई न रुके. आर्यन जिस घर में रहता था वहां एक ही कमरा था और उसी में उसका पूरा परिवार रहता था. वहीं एक कोने में बैठकर आर्यन लगातार पढ़ाई करता रहता. शोर-शराबे के बीच भी उसका ध्यान सिर्फ अपनी किताबों पर रहा. उसने खुद से वादा किया कि वह एक भी क्लास मिस नहीं करेगा.

12वीं में फिर स्कॉलरशिप और नीट की तैयारी

12वीं में आते-आते एक बार फिर फीस का संकट खड़ा हुआ लेकिन मोशन एजुकेशन की स्कॉलरशिप ने दोबारा आर्यन का रास्ता आसान कर दिया. आर्यन ने पूरी तरह से पढ़ाई में खुद को झोंक दिया और फोन से दूरी बना ली. सितंबर तक सिलेबस खत्म करने के बाद उसने सिर्फ रिवीजन, मॉक टेस्ट और अपनी गलतियों को सुधारने पर ध्यान दिया. 12वीं बोर्ड में 90% से ज्यादा नंबर लाने के बाद 3 मई को हुई नीट परीक्षा में आर्यन ने 648 अंक हासिल किए. परिवार में जश्न का माहौल था कि अब तो सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलना तय है.

परीक्षा रद्द और फिर बारिश में भीगी उत्तर पुस्तिका

खुशियां अभी ठीक से मनाई भी नहीं गई थीं कि नीट परीक्षा रद्द होने और री-टेस्ट की खबर आ गई. इस फैसले से घर में उदासी तो छा गई थी लेकिन आर्यन ने अपनी हिम्मत नहीं हारी. उसे खुद पर यकीन था कि अगर वो एक बार 648 ला सकता हूं तो दोबारा भी कर सकता हूं."

21 जून को री-टेस्ट का दिन आया. आर्यन को जो सीट मिली वह खिड़की के पास थी और टेबल ढलान वाली थी. परीक्षा शुरू होने के घंटे भर बाद तेज आंधी के साथ बारिश शुरू हो गई. खिड़की से आती बौछारों के कारण आर्यन की उत्तर पुस्तिका भीगने लगी. कागज गीले हो रहे थे और लिखना भारी पड़ रहा था लेकिन आर्यन ने संयम बनाए रखा और जैसे-तैसे पेपर पूरा किया. वहीं जब री-टेस्ट का रिजल्ट आया तो आर्यन ने 610 अंक हासिल किए.

इन अंकों के साथ उन्हें एक अच्छे सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीट मिलना तय माना जा रहा है. अपनी सफलता पर बात करते हुए आर्यन कहते हैं, "मेहनत का कोई शॉर्टकट नहीं होता." वहीं उनकी मां इसे ठाकुर जी की कृपा मानती हैं. मुश्किलों के हर चक्रव्यूह को तोड़कर आगे बढ़े आर्यन अब डॉक्टर बनकर समाज और देश की सेवा करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

ये भी पढ़ें: टोंक: दुकान का शटर खुलते ही सामने था खूंखार तेंदुआ फिर अगले 60 सेकेंड में सब कुछ बदल, देखें वायरल VIDEO