Gangapur City GRP Police tortured canteen manager : जिस पुलिस और थाने पर लोग इंसाफ की उम्मीद लेकर भरोसा जताते हैं, अगर वहीं रक्षक ही भक्षक बन जाएं तो पूरा सिस्टम कटघरे में खड़ा हो जाता है. राजस्थान के गंगापुर सिटी से एक ऐसा ही झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने रेलवे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है. आरोप है कि रेलवे स्टेशन के एक कैंटीन मैनेजर को जीआरपी के अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने रातभर बंधक बनाकर प्रताड़ित किया, बर्बरता से पीटा और सारी हदें पार करते हुए अमानवीय व्यवहार किया. मामला अब जयपुर तक पहुंच चुका है, जहां मामले में गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है. क्या है पूरा मामल चलिए जानते है इस खबर में...
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महीने की 'कमीशन' और पानी की बोतल का वो विवाद...
यह पूरी घटना गंगापुर सिटी रेलवे स्टेशन पर संचालित एक कैंटीन की है. कैंटीन के मैनेजर अजीत सिंह ने जीआरपी के जिम्मेदार पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ बेहद गंभीर शिकायत दर्ज कराई है. अजीत सिंह की एफआईआर के मुताबिक, यह पूरा विवाद 26 मई 2026 की रात को शुरू हुआ था.
रात करीब 9:30 बजे रेलवे के एक वाणिज्यिक अधिकारी (कमर्शियल इंस्पेक्टर) कैंटीन मैनेजर से मिलने पहुंचे. आरोप है कि अधिकारी ने अजीत सिंह से 'मासिक भुगतान' (कमीशन या बंधी) की मांग की. जब अजीत ने व्यापार का हवाला देते हुए कुछ दिनों की मोहलत मांगी, तो अधिकारी भड़क गया और उसे देख लेने की धमकियां देने लगा. दूसरी ओर, कुछ पानी की बोतलों को सील करने की बात को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच कहासुनी की बात सामने आ रही है.
सरकारी क्वार्टर का बंद दरवाजा और रातभर खौफनाक प्रताड़ना
विवाद बढ़ने के बाद, उसी रात करीब 11:00 बजे जीआरपी थाना प्रभारी भवानी शंकर (एएसआई) ने अजीत सिंह को बातचीत के बहाने एक सरकारी क्वार्टर पर बुलाया. अजीत का आरोप है कि जैसे ही वह वहां पहुंचा, क्वार्टर का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया गया. इसके बाद वहां मौजूद पुलिसवालों और अधिकारियों ने उस पर लाठियां भांजनी शुरू कर दीं.
पीड़ित अजीत सिंह ने अपनी शिकायत में रोते हुए बताया कि उसके साथ न केवल बेरहमी से मारपीट की गई, बल्कि उसके आत्मसम्मान को पूरी तरह कुचल दिया गया. आरोप के मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने उसे जबरन पेशाब (यूरिन) तक पिलाया. अजीत ने कमरे के भीतर से मदद के लिए कई बार गुहार लगाई और चीख-पुकार मचाई, लेकिन दरवाजा बंद होने के कारण रेलवे स्टेशन पर उसकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था. इतना ही नहीं, पीड़ित का आरोप है कि पुलिसवालों ने उसकी जेब में रखी नकदी भी जबरन निकाल ली.
जयपुर पहुंचकर दर्ज कराई FIR, पुलिस महकमे में खलबली
घटना के बाद पीड़ित मैनेजर बुरी तरह डर गया था. उसके पूरे शरीर पर चोटों के गहरे निशान उभर आए थे. स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने की आशंका के चलते पीड़ित 29 मई को सीधे जयपुर पहुंचा और जीआरपी मुख्यालय में अपनी आपबीती सुनाई. मामले की संवेदनशीलता और संगीन आरोपों को देखते हुए जयपुर में तुरंत एफआईआर दर्ज की गई और पीड़ित का मेडिकल कराया गया.
तीन पुलिसवाले लाइन हाजिर, कोटा डीएसपी को सौंपी गई जांच
जैसे ही यह मामला मीडिया और उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आया, रेलवे पुलिस में खलबली मच गई. जीआरपी पुलिस अधीक्षक (एसपी) अजमेर ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तत्कालीन थाना प्रभारी एएसआई भवानी शंकर समेत तीन पुलिसकर्मियों को तुरंत प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है.
इस अमानवीय घटना की निष्पक्ष जांच के लिए केस की कमान कोटा जीआरपी के पुलिस उपाधीक्षक (सीओ/डीएसपी) को सौंपी गई है. रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि अनुसंधान जारी है और मेडिकल व वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. लेकिन इस घटना ने यह बड़ा सवाल छोड़ दिया है कि क्या कानून के रखवाले ही अब मर्यादा की सारी सीमाएं लांघने लगे हैं?
इनपुट: मनोहर गुप्ता
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