चंबल के जिस नाम से कांपते थे तीन राज्य, उस पूर्व डकैत जगन गुर्जर की अजमेर की 'हाई सिक्योरिटी' जेल में हुई हत्या ?

राजस्थान की अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में कुख्यात पूर्व डकैत जगन गुर्जर की कथित तौर पर हत्या कर दी गई है. चंबल में 20 साल तक खौफ का पर्याय रहे जगन की मौत ने जेल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पढ़ें क्या है पूरा मामला?

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जगन गुर्जर के साथ अजमेर जेल में क्या हुआ ?

उमेश मिश्रा

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Dholpur crime news: राजस्थान की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है. चंबल के बीहड़ों में कभी आतंक का दूसरा नाम रहे कुख्यात पूर्व डकैत जगन गुर्जर की जेल के भीतर संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है. शुरुआती जांच और सूत्रों के हवाले से मिल रही खबरों के मुताबिक, बैरक के अंदर ही गला दबाकर उसकी हत्या की गई है. इस सनसनीखेज वारदात ने न सिर्फ पुलिस महकमे को हिला कर रख दिया है, बल्कि जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था की भी पोल खोल कर रख दी है.

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बैरक में हुआ झगड़ा और थम गईं जगन की सांसें 

जानकारी के अनुसार, यह पूरी वारदात सोमवार दोपहर करीब 11:00 बजे से 3:00 बजे के बीच की बताई जा रही है. जेल नियमों के तहत जब सुरक्षाकर्मी बंदियों की रूटीन जांच और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए बैरक में दाखिल हुए, तो वहां जगन गुर्जर का शव बरामद हुआ. 

सूत्रों के मुताबिक, जगन गुर्जर जिस बैरक में बंद था, वहां उसकी अन्य कैदियों के साथ किसी बात को लेकर तीखी बहस और झड़प हुई थी. बताया जा रहा है कि भरतपुर के चर्चित कुलदीप जगीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु नामक एक अन्य हार्डकोर बंदी ने इस वारदात को अंजाम दिया है. दोनों को एक ही बैरक में रखा गया था. हालांकि, पुलिस अधिकारी अभी आधिकारिक रूप से इस बात की पुष्टि करने से बच रहे हैं. घटना के तुरंत बाद एफएसएल (FSL) और जांच टीमों ने मौके पर पहुंचकर फिंगरप्रिंट्स सहित अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए हैं. 

125 मुकदमों का इतिहास और 20 साल तक खौफ का राज 

धौलपुर के डांग क्षेत्र से अपना आपराधिक सफर शुरू करने वाला जगन गुर्जर कोई साधारण अपराधी नहीं था. साल 1994 में एक रिश्तेदार की हत्या का बदला लेने की नीयत से उसने बंदूक उठाई थी और बीहड़ का रास्ता चुना था. इसके बाद उसने अपनी एक मजबूत गैंग बनाई और अगले 20 सालों तक राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमाओं पर लूट, अपहरण, रंगदारी और हत्या जैसी वारदातों से हाहाकार मचाए रखा. 

उसका खौफ इस कदर था कि उसके डर से लोग गांवों में शादियां करने से कतराते थे. खुद उसके पिता को उसकी दहशत के कारण गांव छोड़ना पड़ा था. जगन के खिलाफ तीन राज्यों में कुल 125 आपराधिक मामले दर्ज थे और पुलिस ने उस पर लाखों रुपये का इनाम भी घोषित कर रखा था. मार्च 2026 में बाड़ी कोतवाली थाने में दर्ज मारपीट के एक मामले के सिलसिले में ही उसे अजमेर जेल में रखा गया था. 

जब सीएम के महल को उड़ाने की दी थी धमकी 

जगन गुर्जर केवल बीहड़ों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने सीधे सत्ता को भी चुनौती दी थी. साल 2008 में गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान उसने राजस्थान की तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर स्थित महल को बम से उड़ाने की धमकी देकर पूरे देश में सनसनी फैला दी थी. इसके बाद साल 2022 में उसने बाड़ी क्षेत्र के तत्कालीन विधायक गिरिराज सिंह मलिंगा के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी, जिसके बाद पुलिस का दबाव बढ़ने पर उसने करौली में आत्मसमर्पण कर दिया था.

कसम टूटी, राजनीति में भी आजमाया हाथ 

जगन गुर्जर ने अपने पूरे जीवन में करीब पांच बार पुलिस के सामने सरेंडर किया. उसने 2001 में तत्कालीन एसपी बीजू जॉर्ज जोसफ, 2009 में कैमरी गांव में पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट, और इसके बाद 2018, 2019 और 2021 में अलग-अलग अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण किया. साल 2010 में पुलिस सुरक्षा में अपनी बेटी की शादी में शामिल होने आए जगन ने अपराध की दुनिया से हमेशा के लिए तौबा करने की कसम खाई थी. करीब 8 साल जेल काटने के बाद 2017 में बाहर आकर उसने अपनी पत्नी ममता को धौलपुर से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर विधानसभा चुनाव भी लड़ाया, लेकिन वे हार गईं. इसके बाद जगन का नाता फिर से अपराध की दुनिया से जुड़ गया. 

कभी दूसरों के दिलों में खौफ पैदा करने वाला यह डकैत खुद जेल के भीतर असुरक्षित निकला. अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इतनी कड़ी निगरानी और हाई सिक्योरिटी वाली जेल में एक कैदी की जान इतनी आसानी से कैसे ले ली गई? क्या यह किसी पुरानी रंजिश का नतीजा है या फिर इसके पीछे कोई बड़ी साजिश है, इसका खुलासा पुलिस जांच के बाद ही हो पाएगा. 

चंबल के कुख्यात डकैत को पुलिस ने कस्टडी में लिया, कभी वसुंधरा राजे के महल को बम से उड़ाने की दी थी धमकी

 


 

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