चंबल के पूर्व विख्यात डकैत जगन गुर्जर की अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में हुई संदिग्ध मौत ने राजस्थान में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. जेल प्रशासन के अनुसार, विष्णु जाट नाम के एक कैदी ने जगन गुर्जर की हत्या कर दी, लेकिन इस दावे पर न तो जगन के परिवार को और न ही गुर्जर समाज को भरोसा हो रहा है. 6 फीट से अधिक लंबे और बेहद मजबूत माने जाने वाले जगन गुर्जर की एक मामूली कैदी द्वारा हत्या किए जाने की बात किसी के गले नहीं उतर रही है. इस घटना के बाद धौलपुर, भरतपुर समेत पूरे डांग क्षेत्र और यूपी-एमपी तक के गुर्जर समाज में भारी आक्रोश फैला हुआ है.
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अस्पताल के बेड से पत्नी कोमेश गुर्जर का खुला चैलेंज
पति की मौत की खबर के बाद से सदमे में आईं जगन गुर्जर की पत्नी कोमेश गुर्जर अस्पताल में भर्ती हैं. गंभीर हालत में भी कोमेश गुर्जर के तेवर बेहद आक्रामक हैं. अस्पताल के बेड से उन्होंने खुली चुनौती देते हुए कहा, "जिस किसी की मां ने दूध पिलाया है, वह सामने आ जाए. या तो मैं रहूंगी या फिर धोखे से मारने वाला रहेगा. पहले उससे यह कबूल करवाओ कि उसने जगन को क्यों मारा? उनकी क्या दुश्मनी थी? इतने बड़े आदमी के साथ गद्दारी की गई है." कोमेश के इन बयानों के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है.
हत्या या बड़ी साजिश? सीसीटीवी कैमरे पर टूथपेस्ट लगाने का आरोप
धौलपुर जेल से पैरोल पर बाहर आए जगन के बड़े भाई लाल सिंह गुर्जर के घर पर लगातार समाज के लोगों की बैठकें चल रही हैं. गुर्जर समाज के नेताओं का सीधा आरोप है कि यह कोई सामान्य जेल गैंगवार या आपसी लड़ाई नहीं बल्कि एक सोची-समझी गहरी साजिश है.
समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि:
- साढ़े छह फीट लंबे जगन गुर्जर को अकेला कोई मामूली अपराधी नहीं मार सकता. इस साजिश में जेल प्रशासन और पुलिस की मिलीभगत की आशंका है.
- आरोप लगाया जा रहा है कि सोची-समझी रणनीति के तहत जगन की बैरक को बदला गया था.
- घटना के वक्त अजमेर जेल के सीसीटीवी कैमरों पर टूथपेस्ट लगा दिया गया था ताकि वारदात की कोई फुटेज रिकॉर्ड न हो सके.
गुर्जर समाज ने मांग की है कि चूंकि जगन गुर्जर ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट के सामने आत्मसमर्पण कर अपराध की दुनिया छोड़ी थी, इसलिए सचिन पायलट और कांग्रेस के अन्य बड़े नेताओं को भी इस मामले में सामने आकर राज्य व भारत सरकार तक अपनी बात पहुंचानी चाहिए. समाज ने चेतावनी दी है कि जगन की १३वीं के बाद बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा.
बाड़ी विधायक जसवंत सिंह और रामवीर पोषवाल में जुबानी जंग
इस संवेदनशील मामले ने अब पूरी तरह से सियासी रंग ले लिया है. बाड़ी से विधायक जसवंत सिंह गुर्जर और कांग्रेस नेता रामवीर पोषवाल जगन के परिवार के साथ खड़े होने के दावे को लेकर आपस में भिड़ गए हैं.
विधायक जसवंत सिंह गुर्जर ने बाहर से आने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा, "कुछ बरसाती मेंढक लाशों पर राजनीति करने आ जाते हैं, जिन्हें खुद कोई ठिकाना नहीं है. समाज की दुहाई देने वाले ये लोग खुद कितने वफादार हैं, इन्हें अपनी गिरेबान में झांकना चाहिए. अंत में अपना ही आदमी काम आता है."
जसवंत सिंह के इस बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस नेता रामवीर पोषवाल ने कहा, "विधायक साहब, यह समाज का मामला है. अगर समाज इकट्ठा नहीं होगा तो जगन के परिवार को न्याय नहीं मिलेगा. आपने धौलपुर जिले के युवाओं को डराकर रखा है ताकि वे शासन-प्रशासन के खिलाफ आवाज न उठा सकें. यूपी और एमपी के गुर्जर नेता यहाँ आ रहे हैं और वही न्याय दिलाएंगे."
साजिश के तहत धौलपुर से अजमेर ट्रांसफर किया गया
जगन गुर्जर के परिजनों का कहना है कि जगन पूरी तरह से अपराध की दुनिया छोड़ चुका था और आम जिंदगी जी रहा था. इसके बावजूद उसे कुछ छोटे-मोटे मुकदमों में फंसाकर पहले धौलपुर जेल में बंद किया गया और फिर एक सोची-समझी साजिश के तहत उसका ट्रांसफर अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में करवाया गया, ताकि वहां उसकी हत्या की जा सके. गुर्जर समाज ने साफ कर दिया है कि अगर मामले की निष्पक्ष जांच कर साजिश का पर्दाफाश नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे.
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