राजस्थान की राजधानी जयपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे. यहां एक शख्स, जो कल तक करौली के एक तबेले में गाय-भैंसों की देखरेख करता था और दूध बेचकर अपना गुजारा करता था, रातों-रात खाकी वर्दी पहनकर जयपुर पुलिस की 'स्पेशल टीम' का थानेदार बन बैठा. रौबदार चाल, कड़क आवाज और पुलिस का फर्जी आईकार्ड, इस बहरूपिए ने ऐसा जाल बुना कि असली पुलिस वाले भी लंबे समय तक उसे पहचान नहीं पाए.
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तबेले से थाने तक का 'फर्जी' सफर
पकड़ा गया आरोपी जितेंद्र कुमार उर्फ रमन शर्मा मूल रूप से करौली के टोडाभीम का रहने वाला है. वह जयपुर के सिंधी कैंप और रेलवे स्टेशन जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में पुलिस की वर्दी पहनकर घूमता था. उसका मकसद सीधा था—बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का झांसा देकर लूटना. वह खुद को पुलिस विभाग का बड़ा अधिकारी बताकर लोगों का भरोसा जीतता और फिर वन विभाग या पुलिस भर्ती के नाम पर उनसे लाखों रुपये ऐंठ लेता.
ऐसे हुआ भांडाफोड़
इस फर्जी थानेदार का खेल तब खत्म हुआ जब सीकर के एक युवक रवि कुमार ने हिम्मत दिखाई. रवि दिल्ली पुलिस की परीक्षा देकर लौट रहा था, तभी सिंधी कैंप बस स्टैंड पर जितेंद्र ने उसे वन विभाग में नौकरी दिलाने का झांसा दिया और ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करवा लिए. जब रवि को शक हुआ, तो उसने सिंधी कैंप थाने के असली पुलिसकर्मियों को इसकी जानकारी दी. पुलिस ने जाल बिछाकर जितेंद्र को रंगे हाथों पकड़ लिया.
वर्दी, लाल जूते और फर्जी दस्तावेज बरामद
तलाशी के दौरान पुलिस को जितेंद्र के पास से सब-इंस्पेक्टर की वर्दी, पुलिस की टोपी, बेल्ट, लाल जूते और कांस्टेबल रैंक का एक फर्जी आईकार्ड मिला. इतना ही नहीं, उसके पास से ठगी से जुड़े कई दस्तावेज भी बरामद हुए हैं. पूछताछ में सामने आया कि वह खुद को पुलिस की 'स्पेशल टीम' का हिस्सा बताता था ताकि लोग उस पर सवाल न उठाएं.
बेरोजगार युवा थे मुख्य निशाना
सिंधी कैंप थाने के एसएचओ माधव सिंह ने बताया कि जितेंद्र मुख्य रूप से उन युवाओं को निशाना बनाता था जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जयपुर आते थे. वह उन्हें वनपाल (Forest Guard) या पुलिस में सीधी भर्ती का लालच देता था. फिलहाल पुलिस यह पता लगा रही है कि इस फर्जी थानेदार ने अब तक कितने लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाया है.
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